'पाठ्यक्रम के साथ गुणवत्तापूर्ण शिक्षा महत्वपूर्ण'

ठाणे
सर्वोत्तम शिक्षा पद्धति और अध्यापकों के समर्पण भाव से काम करने की वजह से आज कई बड़े स्कूलों में शिक्षा का स्तर ऊंचाई तक पहुंचा है। यह उद्गार मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस  ने ठाणे में आयोजित एक कार्यक्रम में व्यक्त किए। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि स्कूली शिक्षा के दौरान पाठ्यक्रम के साथ ही गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का भी बहुत बड़ा योगदान होता है। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से स्वत: का विकास करते हुए समाज और राष्ट्र को लेकर विचार छात्रों के मस्तिष्क में डाला जाता है। यह काम सरकार के शिक्षा विभाग द्वारा राज्य  के सभी जिला परिषदों के स्कूलों में किया जा रहा है। ठाणे के श्रीमती सुनिती देवी सिंघानिया विद्यालय का उद्घाटन गुरुवार को मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस के हाथों हुआ। कार्यक्रम में  राज्य के उद्योग मंत्री सुभाष देसाई, शिक्षा मंत्री विनोद तावड़े, भाजपा विधायक निरंजन डावखरे, संजय केलकर, महापौर मिनाक्षी शिंदे, राजेश फाटक, मनपा आयुक्त संजय  जायसवाल, पुलिस आयुक्त विवेक फनसलकर, निवासी उपजिलाधिकारी डॉ. शिवाजी पाटील, लोकमत के मालिक विजय दर्डा, रेमंड उद्योग समूह के अध्यक्ष तथा प्रबंधकीय निदेशक  गौतम सिंघानिया, कल्पना सिंघानिया, नवाज सिंघानिया, प्राचार्य तथा संचालक रेवती श्रीनिवासन के साथ-साथ बड़ी संख्या में नेता और पदाधिकारी उपस्थित थे। अपने भाषण में  मुख्यमंत्री फड़नवीस ने कहा कि मराठी सर्वोत्तम भाषा है, जिसे सीखने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि राज्य में आठवीं तक मराठी भाषा को अनिवार्य किया गया है। इसे अनिवार्यता  के मुताबिक नहीं, बल्कि स्वैछिक रूप से सीखने की चेष्टा होनी चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि मराठी प्राचीन भाषाओं में से एक है, जो बहुत ही समृद्ध है। यह सभी संकायों में ज्ञान  भाषा के रूप में उपलब्ध है। खुद की इच्छाशक्ति से इस भाषा का पठन गहराई से हो, यह मेरी इच्छा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि देश में 25 साल आयु वालों की आबादी अधिक है।  यदि इस आबादी को अच्छी शिक्षा मिलती है, तो देश में उत्तम मानव संसाधन तैयार किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि आज देश में 25 साल तक के छात्रों को उत्तम मानव संसाधन के रूप में परिवर्तित करने के लिए शिक्षा की जरूरत है। इसके लिए राज्य के जिला परिषद स्कूलों में  सरकार के मार्फत पाठ्यक्रमों के साथ गुणवत्तापूर्ण शिक्षा भी दिया जा रहा है। सीएम फड़नवीस ने कहा कि राज्य का शिक्षा विभाग कई योजनाओं को चला रहा है, जिसमें अब तक  कई बदलाव किए जा चुके हैं। इन बदलावों की देन है कि शिक्षा के मामले में पूर्वी महाराष्ट्र जहां 17वें स्थान पर था, वह आज तीसरे पायदान पर पहुंच चुका है। उन्होंने विश्वास दिलाते हुए कहा कि शिक्षा पर राज्य सरकार जिस तरह से काम कर रही है, आने वाले कुछ सालों में महाराष्ट्र शिक्षा के मामले में पहले स्थान पर होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा  प्राप्त करने की सभी बच्चों में जन्मजात इच्छा होती है। हालांकि इसके लिए उत्तम अध्यापक, योग्य शिक्षा पद्धति और आवश्यक संसाधनों की जरूरत पड़ती है। एक बार बच्चों को  शिक्षा के प्रति अग्रसर कराते ही उनमें अपने आप निखार आना शुरू हो जाता है। इसके लिए सरकार ने राज्य में स्थित जिला परिषद के सौ स्कूलों को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर शुरू करने  की योजना बनाई है, जिसके लिए प्रयास शुरू किए गए हैं।
शिक्षा मंत्री विनोद तावड़े ने कहा कि शिक्षा के प्रति नजरिया बदलने की जरूरत है। शिक्षा को केवल पढ़ने, सुनने और समझने तक ही सीमित न रखते हुए विश्लेषण, मूल्यांकन और  निर्माण के त्रिसूत्री आधार पर किया जाना चाहिए।
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