जगन-नायडू की जंग में भाजपा को मौका!

तेलंगाना
दक्षिण भारतीय राज्य तेलंगाना में सरकार विरोधी लहर और धार्मिक ध्रुवीकरण के बढ़ते ट्रेंड की वजह से राज्य में लोकसभा चुनाव में चार सीटें जीतने वाली भाजपा अपना जनाधार  बढ़ाने में लग गई है। भाजपा की नजर आंध्र प्रदेश पर भी है, जहां पर उसने विधानसभा और लोकसभा चुनाव में अपने मित्र से शत्रु बने चंद्रबाबू नायडू की हार को सुनिश्चित किया  है। तेलंगाना में सत्तारूढ़ तेलंगाना राष्ट्र समिति असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम को मुख्य विपक्षी दल का दर्जा देने पर विचार रही है, वहीं भाजपा इसे और ज्यादा  धार्मिक ध्रुवीकरण के मौके के रूप में देख रही है। बता दें कि तेलंगाना में कांग्रेस के 12 विधायक पार्टी से अलग होकर टीआरएस में शामिल हो गए हैं। विधानसभा में अब ओवैसी की  पार्टी सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी है। उधर, आंध्र प्रदेश में भाजपा टीडीपी के शीर्ष नेताओं को लुभाने में लगी है, जो केंद्र की एनडीए सरकार और राज्य की वाईएसआर कांग्रेस पार्टी की  ओर से किसी भी प्रकार के नियामकीय छापे से बचने के लिए भगवा पार्टी में जा सकते हैं। भाजपा के एक शीर्ष नेता ने नाम नहीं बताने की शर्त पर कहा कि आने वाले कुछ सप्ताह  में कम से कम छह टीडीपी नेता भाजपा का दामन थाम सकते हैं। उधर, तेलंगाना भाजपा के अध्यक्ष के लक्ष्मण ने कहा कि तेलंगाना में टीआरएस सरकार की अल्पसंख्यक  तुष्टीकरण की नीति ने धार्मिक ध्रुवीकरण में मदद की है और इसके मुताबिक भाजपा के पक्ष में वोट पड़े लोकसभा चुनाव में उसे फायदा हुआ। उन्होंने कहा कि भाजपा ओवैसी की  पार्टी को मुख्य विपक्षी दल का दर्जा देने की टीआरएस की रणनीति की कलई खोल देगी। भाजपा टीआरएस की अल्पसंख्यक तुष्टीकरण की नीति को जनता को बताएगी। लक्ष्मण ने  कहा कि कांग्रेस की हार के कारण तेलंगाना में एक खाली जगह बन गई है, जिसे भाजपा भरने का प्रयास करेगी।

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