कश्मीर पर बदलेगी मोदी सरकार की रणनीति!

नई दिल्ली
राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर गुरुवार को गृह मंत्री अमित शाह, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और गृह सचिव राजीव गौबा ने बैठक की। मिली जानकारी के मुताबिक इस  बैठक में कश्मीर से जुड़े मुद्दों की भी चर्चा की गई। बता दें कि बीते दिनों शाह ने राज्यपाल सत्यपाल मालिक से मुलाकात की थी, जिसके बाद विधानसभा सीटों के परिसीमन की   चर्चाएं सामने आईं थीं। चुनाव आयोग ने भी कहा है कि इस साल के अंत तक जम्मू कश्मीर में विधानसभा चुनाव कराए जा सकते हैं। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक इस  मीटिंग का मुख्य मुद्दा आंतरिक सुरक्षा और सीमा सुरक्षा ही था। इसमें चर्चा की गई कि गृह मंत्रालय इन दोनों क्षेत्रों में सामने आ रही चुनौतियों का कैसे सामना करेगा। इस मीटिंग में  भी कश्मीर अहम मुद्दा रहा और आगामी विधानसभा के दौरान सुरक्षा को लेकर भी चर्चा हुई। कश्मीर में बर्फ पिघलने के मौसम के दौरान ही पाकिस्तान की तरफ से सबसे ज्यादा  घुसपैठ देखी जाती है, इसके लिए अधिक सतर्कता बरतने का फैसला लिया गया। शाह ने इस मीटिंग में निर्देश दिया कि इस घुसपैठ को सिरे से ख़त्म करना बेहद ज़रूरी है। बता दें  कि पीडीपी के साथ गठबंधन में होने के चलते जम्मू कश्मीर में कट्टरपंथ के शिकार युवाओं के प्रति भाजपा का रुख भी नरम और सुधारवादी था, लेकिन अब अमित शाह के गृह मंत्री   बनने के बाद इसमें बदलाव होना तय माना जा रहा है।
पिछले दिनों खबरें आईं थीं कि गृह मंत्री अमित शाह जम्मू-कश्मीर में परिसीमन आयोग के गठन पर विचार कर रहे हैं। जम्मू-कश्मीर में आखिरी बार 1995 में परिसीमन किया गया   था। 1995 में राज्यपाल जगमोहन के आदेश पर जम्मू-कश्मीर में 87 सीटों का गठन किया गया था। जम्मू-कश्मीर विधानसभा में कुल 111 सीटें हैं, लेकिन 24 सीटों को खाली रखा  गया है। जम्मू-कश्मीर के संविधान के सेक्शन 47 के मुताबिक इन 24 सीटों को पाक अधिकृत कश्मीर के लिए खाली छोड़ गया है और बाकी बची 87 सीटों पर ही चुनाव होता है।   बता दें कि जम्मू-कश्मीर का अलग से भी संविधान है।

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