कठुआ रेप और मर्डर केस मे तीन को उम्रकैद


  • पठानकोट सेशन कोर्ट ने 7 में से 6 आरोपियों को दोषी करार दिया
  • स्पेशल कोर्ट ने 6 दोषियों में से 3 को रेप और मर्डर का दोषी पाया
  • बाकी तीन को सबूत मिटाने का दोषी माना गया
  • सबूतों से छेड़छाड़ पर तीन पुलिसवालों को 5 साल की जेल

पठानकोट
देश को झकझोर कर रख देने वाले कठुआ गैंगरेप और मर्डर केस में पठानकोट सेशन कोर्ट ने तीन दोषियों दीपक खजुरिया, सांजी राम और परवेश कुमार को उम्रकैद की सजा सुनाई  है। इन पर कोर्ट ने एक-एक लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया है। वहीं, सबूतों से छेड़छाड़ करने वाले तीन अन्य दोषी पुलिसकर्मियों को कोर्ट ने 5-5 साल की सजा दी है। इन तीनों  पर 50-50 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया गया है। इससे पहले सोमवार सुबह सुनवाई के दौरान कोर्ट ने 7 में से 6 आरोपियों को दोषी करार दिया था। बता दें कि स्पेशल कोर्ट ने  6 दोषियों में से 3 को रेप और मर्डर का दोषी पाया। बाकी तीन को सबूत मिटाने का दोषी माना गया। सांजी राम, परवेश कुमार, दीपक खजुरिया को 302 (मर्डर), 376 (रेप), 120  बी (साजिश), 363 (किडनैपिंग) के तहत दोषी करार दिया गया। कोर्ट ने पुलिसकर्मी आनंद दत्ता, सुरेंद्र कुमार, तिलक राज को 201 (सबूतों को मिटाना) के तहत दोषी माना और  उन्हें पांच-पांच साल की सजा सुनाई। पिछले साल 10 जनवरी को बकरवाल समुदाय से ताल्लुक रखने वाली 8 साल की एक बच्ची का अपहरण किया गया था। इसके बाद 17  जनवरी को उसका शव क्षत-विक्षत हालत में बरामद हुआ था। इस सनसनीखेज मामले के खिलाफ पूरे देश में विरोध-प्रदर्शन हुए और पीड़िता के लिए न्याय की गुहार लगाई गई। इस  वीभत्स मामले में जम्मू-कश्मीर पुलिस ने 15 पन्ने की चार्जशीट दाखिल की थी, जिसमें कई चौंकाने वाले खुलासे हुए थे। सुप्रीम कोर्ट ने जम्मू से बाहर भेजा केस सुप्रीम कोर्ट ने  मामले को जम्मू-कश्मीर से बाहर भेजने का आदेश दिया था, जिसके बाद जम्मू से करीब 100 किलोमीटर और कठुआ से 30 किलोमीटर दूर पठानकोट की अदालत में मामले को  भेजा गया। इस मामले में कुल आठ आरोपी बनाए गए थे, जिनमें से एक नाबालिग था। जिला और सत्र न्यायाधीश ने आठ आरोपियों में से सात के खिलाफ दुष्कर्म और हत्या के  आरोप तय किए थे। किशोर आरोपी के खिलाफ मुकदमा अभी शुरू नहीं हुआ है और उसकी उम्र संबंधी याचिका पर जम्मू-कश्मीर हाई कोर्ट सुनवाई करेगा।

ग्राम प्रधान निकला मास्टरमाइंड
सुप्रीम कोर्ट द्वारा मामले को जम्मू-कश्मीर से ट्रांसफर करने के निर्देश दिए जाने के बाद पिछले साल जून के पहले सप्ताह में मुकदमा शुरू हुआ और इसकी रिकॉर्डिंग भी की गई।  पूरे देश को हिलाकर रख देने वाले इस मामले का मास्टरमाइंड ग्राम प्रधान सांजी राम था।

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