दवा विक्रेताओं पर एफडीए की कार्रवाइ

ठाणे
नियमों को ताक पर रखकर मेडिकल स्टोर चलाने वाले दुकानदारों पर एफडीए ने सक्ती बरतनी शुरू कर दी है। दवा बेचने वाले फुटकर और होलसेल 176 विक्रेताओं पर एफडीए ने  कार्रवाई करते हुए उनके लायसेंस को रद्द कर दिया है। इसी तरह 416 विक्रेताओं के लाइसेंस को निलंबित कर दिया है। सर्वाधिक लायसेंस फुटकर दवा विक्रेताओं के हुए हैं। उल्लेखनीय है कि अन्न और औषधि प्रशासन के कोकण विभाग में ठाणे, पालघर, रत्नागिरी, रायगड़, सिंधुदुर्ग जिले आते हैं। इन पांचों जिलों में 9 हजार 102 फुटकर और 5 हजार  755 होलसेल सहित कुल 14 हजार 857 दवा विक्रेता हैं। इनकी संख्या में दिनोंदिन बढ़ोतरी हो रही है। वहीं दवा विक्रेताओं पर नजर रखने के लिए एफडीए के पास जरूरत के   अनुसार ड्रग इंस्पेक्टर नहीं हैं। ऐसी स्थिति में दवा की दुकानों में किसी भी तरह की गड़बड़ी होने पर उसे आसानी से समझना मुश्किल होता है। हालात यह है कि दवा विक्रेताओं पर  एफडीए का किसी भी प्रकार का नियंत्रण नहीं है।
आलम यह है कि कई दवाइयों की दुकान में न केवल खामियां मिल रही हैं, बल्कि फार्मासिस्ट भी नहीं हैं, जो गंभीर गलतियों में शामिल है। इन खामियों को गंभीरता से लेते हुए  एफडीए के तत्कालीन आयुक्त महेश झगड़े ने नियमों की अनदेखी करने वाले दवा विक्रेताओं पर कार्रवाई की शुरुआत की थी। इसके बाद भी दवा विक्रेताओं का मनमाना कामकाज  चल रहा है। एफडीए के कोकण विभाग ने एक अप्रैल से 31 मार्च के बीच 14 हजार 875 दवा की दुकानों में से 4 हजार 496 दवा दुकानों की जांच की थी। इनमें नियम भंग करने  वाले 330 फुटकर दवा विक्रेताओं के लाइसेंस निलंबित कर दिए गए थे, जबकि 116 के लाइसेंस को रद्द कर दिया हैं। इसी तरह 86 होलसेल दवा विक्रेताओं के लाइसेंस निलंबित कर  दिए गए। साथ ही 60 के लाइसेंस को रद्द कर दिया गया। कहा जा रहा है कि सहायक आयुक्त और ड्रग इंस्पेक्टर के पद रिक्त हैं अन्यथा कार्रवाई का आंकड़ा बढ़ सकता था। जानकारी के अनुसार एफडीए के कोकण विभाग में सहायक आयुक्त के कुल 10 पद हैं, जिनमें से दो रिक्त हैं। ड्रग इंस्पेक्टर के कुल 33 मंजूर पदों में से 21 को भर दिया गया है,  जबकि 12 पद अभी भी रिक्त हैं। रिक्त पद होने के बावजूद एफडीए ने बीते साल डीएमआर, बिना लाइसेंस, मिसब्रांड सहित अन्य पर कार्रवाई करते हुए 10 करोड़ 98 लाख 26  हजार 129 रुपए का माल जब्त किया है। इसी के साथ बिना लाइसेंस के मामले में पांच करोड़ 28 लाख 67 हजार 423 रुपए के सामानों को जब्त किया गया है।
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