ब्लैकलिस्ट होगा पाकिस्तान!

वाशिंगटन
आतंकवाद की फंडिंग पर नजर रखने वाली वैश्विक संस्था फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) के अध्यक्ष मार्शल बिलिंग्सले ने पेरिस में बैठक के बाद आतंकवाद के लिए  धन मुहैया कराने के मुद्दे पर पाकिस्तान को काली सूची में डालने के संकेत दिए हैं। एफएटीएफ प्रमुख मार्शल बिलिंग्सले ने प्रेस कांफ्रेंस में बताया कि पाकिस्तान ने जून 2018 में  एक कार्ययोजना पर सहमति जताई थी, लेकिन इस पर वह खरा नहीं उतरा। इस बारे में पाकिस्तान को फरवरी में चेतावनी दी गई थी। वह कार्ययोजना के अंतर्गत जनवरी तक के  लिए निर्धारित अधिकांश लक्ष्यों को पूरा नहीं कर पाया था। इसके बाद उसने आग्रह किया था कि वह आतंकी फंडिंग की बाबत मई तक के लिए निर्धारित किए गए लक्ष्यों को हासिल  कर लेगा। लेकिन वह अपने वादे पर एक बार फिर खरा नहीं उतरा। मार्शल बिलिंग्सले ने कहा कि यदि पाकिस्तान कार्ययोजना को अंजाम देने में असफल होता है, तो संस्था उस पर  अगली कार्रवाई पर विचार करेगी। उन्होंने इस बात की भी पड़ताल की है कि पाकिस्तान कार्ययोजना को पूरा करने में कितना पीछे है। जांच में पाया गया कि वह इस पर काम करने  में बेहद पीछे है। पाकिस्तान को इस साल सितंबर तक आतंकवाद के खिलाफ ठोस कार्रवाई करनी होगी। इससे पहले एफएटीएफ ने कहा था कि पाकिस्तान आतंकी फंडिंग रोकने के   लिए दिए निर्देशों का पालन निर्धारित समय (मई, 2019) तक करने में असफल रहा है। संस्था पाकिस्तान से यह भी दो टूक कह चुकी है कि उसने अक्टूबर, 2019 तक आतंकवाद  के खिलाफ संतोषजनक कदम नहीं उठाया, तो उसे काली सूची में डाल दिया जाएगा यानी उसको प्रतिबंधों का सामना करना पड़ सकता है। उल्लेखनीय है कि पाकिस्तान इस समय  एफएटीएफ की 'ग्रे सूची' में है। इस सूची में वह देश आते हैं, जो अपने देश में मनी लांड्रिंग और आतंकवाद को वित्तीय फंडिंग को रोकने में नाकाम रहे हैं।

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