मराठा समाज की बड़ी जीत: मुख्यमंत्री

मुंबई
राज्य में मराठा समाज को नौकरी और शिक्षा में 16 फीसदी आरक्षण को लेकर मुंबई उच्च न्यायालय के आए फैसले के बाद मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस ने कहा कि ओबीसी समाज के  आरक्षण को ध का न देते हुए मराठा समाज को आरक्षण दिया गया है। गुरुवार को विधानसभा में न्यायालय द्वारा दिए गए निर्णय को सीएम ने पढ़कर सुनाया, जिसके बाद पूरा  सदन जय-भवानी जय शिवाजी के नारों से गूंज उठा। फड़नवीस ने कहा कि यह हमारी बहुत बड़ी जीत है। इस काम में सहयोग करने वाले सभी लोगों का मैं आभार मानता हूं।  विधिमंडल ने जो कानून बनाया था उसे कोर्ट वैध ठहराया दिया है। इसको लेकर मुझे बहुत ख़ुशी है। फड़नवीस ने कहा कि राज्य सरकार के महाधिवक्ता ने आरक्षण मामले की जो जानकारी दी है, वह मैं सदन से साझा कर रहा हूं। न्यायालय ने फैसला सुनाते हुए कहा कि विधिमंडल को कानून बनाने का पूरा अधिकार है। सीएम ने कहा कि 50 फीसदी से ज्यादा  आरक्षण किसी को नहीं दिया जा सकता, इसी मुद्दे के लेकर लोग न्यायालय गए थे।
मराठा समाज को 16 फीसदी आरक्षण की घोषणा के बाद मासावर्गीय समिति ने इसे अपवाद होने की बात कही थी। उन्होंने कहा कि 16 फीसदी मराठा समाज आरक्षण को लोगों ने  एकमत से पास किया था। लेकिन मासावर्गीय आयोग समिति ने शिक्षा में 12 और नौकरी में 13 फीसदी करने की शिफारिश की थी। जिसे न्यायालय ने मान्य करते हुए समाज को  16 की जगह शिक्षा में 12 और नौकरी में 13 फीसदी मराठा समाज को आरक्षण देने की सलाह दी है। ऐसा मुख्यमंत्री फड़नवीस ने स्पष्ट किया। इस दौरान मराठा क्रांति मोर्चा,   विपक्षी दल, सरकार के सभी मंत्री, संभाजी राजे, मराठा समाज और आंदोलकारियों, मंत्री चंद्रकांत पाटिल के नेतृत्व में तैयार किए गए मंत्रीगट का मुख्यमंत्री फड़नवीस ने अभिनंदन  किया।
बता दें कि राज्य में वर्षोंसे मराठा समाज के आरक्षण की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन के बीच राज्य की देवेंद्र फड़नवीस सरकार ने 30 नवंबर को मराठा समाज को 16 फीसदी  आरक्षण को लेकर विधानसभा में एक विधेयक पारित किया था जिसमें मराठाओं को शिक्षा और सरकारी नौकरियों में 16 प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था की गई थी। राज्य सरकार ने  इस समुदाय को सामाजिक एवं शैक्षणिक रूप से पिछड़ा वर्ग घोषित किया था। यह आरक्षण राज्य में पहले से मौजूद कुल 52 प्रतिशत आरक्षण से इतर होगा। सरकार द्वारा पारित   आरक्षण विधेयक को चुनौती देने वाली सात याचिकाएं दायर हुई थीं। जिसकी सुनवाई करते हुए गुरुवार को उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति रंजीत मोरे ने मराठा समाज को सरकार  द्वारा दी गई 16 फीसदी की जगह शिक्षा में 12 और नौकरी में 13 फीसदी आरक्षण देने का निर्णय सुनाया।
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