शर्मनाक और त्रासद कुकृत्य

चार दिन पहले अलीगढ़ में एक मासूम के साथ घटी वहशियाना घटना, जिसने पूरे देश को स्तब्ध कर दिया है। क्रोध, घृणा शर्म और कुछ ना कर पाने की बेबसी जो इस कुकर्म के  बाद लोगों के बयानों से निकल रहे हैं। वाकई ही परेशान करने वाली है। मात्र कुछ हजार रुपए का कर्ज समय पर न लौटाने पर ऐसा क्रूर और वहशी प्रतिशोध किसी भी व्यक्ति की  चेतना को सुन्न कर सर पकड़ने के लिए काफी है। वह भी हमारे जैसे देश में जहां कुवारी, कन्या देवी का स्वरूप मानी जाती है, नवरात्र और ऐसे मांगलिक अवसरों पर उसकी पूजा  होती है। समझ से परे है और बानगी है उस गर्त के जिसमें हमारा समाज जा रहा है और परिणामस्वरुप ऐसे हैवान हमारे बीच से निकल रहे हैं, जिनकी काली करतूतों से शैतान भी  शर्मिंदा हो जाए, इसमें उक्त मुख्य अपराधी के दोस्तों के साथ एक महिला भी शामिल है। यह इस घटना को और खतरनाक बना देता है वैसे जिस तरह पूरे देश में इसके खिलाफ  आक्रोश व्यक्त हो रहा है और लोग इसकी भर्त्सना कर रहे हैं, उस अबोध की जान तो नहीं वापस ला सकेगा और न ही उस माता-पिता की पीड़ा कम कर सकेगा, जो इस दु:ख से  पथराए ऐसे पापियों को फांसी की सजा की मांग कर रहे हैं। पुलिस हमेशा की तरह यहां भी अपनी लेट लतीफी को लेकर आलोचना की पात्र बनी है और निरीक्षक सहित कई  पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई हुई है।
अब प्रशासन पूरी तरह काम में जुटा है। गिरफ्तारियां भी हुई हैं, परंतु यह सवाल हमेशा खड़ा होगा कि यदि सूचना मिलते ही पुलिस हरकत में आई होती तो शायद इस वारदात का   अंजाम इतना विद्रूप और भयावह नहीं होता। बताया जाता है कि इसमें शामिल मुख्य अपराधी के ऊपर पहले से ही पास्को के तहत मामला दर्ज था, तो फिर यह कैसे समाज में छुट्टा  घूम रहा था। हमारा समाज जो छोटी-छोटी बातों पर लोगों का जीना हराम कर देता है, आखिर ऐसे नर पिशाचों का सामूहिक बहिष्कार या प्रतिकार क्यों नहीं करता। लोमहर्षक कुकर्म  करने के बाद भी ये कैसे खुलेआम घूम पाते हैं। कारण जब तक समाज सतर्क नहीं होगा, चौकस नहीं होगा, तब तक जैसा चाहिए वैसी कानून व्यवस्था नहीं बन पाएगी। रही बात  पुलिस विभाग की, तो हमारी पुलिस के बारे में यह विख्यात है कि वह घटना के बाद जिस तरह हरकत में आती है। यदि घटना की आशंका के रहते उसकी शुरूआत में ही उतनी  तत्पर हो जाए तो अधिकांश हादसे नहीं होंगे और कई बहुमूल्य जीवन बच जाएंगे। इसको लेकर इस घटना की तरह कई मामलों में पुलिस की कई बार फजीहत हुई है, परंतु दुर्भाग्य  से इसका वांछित सुधार अभी तक नहीं हो पाया है। पुलिस महकमा सदा लगने वाले इस कलंक को धोने का ईमानदारी से प्रयास करे और धोए, इसका प्रयास इस विभाग से संबंधित  हर स्तर के लोगों को करना होगा। रही बात उक्त घटना की तो ऐसा जघन्य और अक्षम्य अपराध करने वालों के खिलाफ हर संभव सख्त और कठोर काईवाई होनी चाहिए, जो  समाज में एक बानगी बने, जिससे समाज सीखे। कन्या को देवी मान कर ही हमारे कर्तव्य की इतिश्री नहीं हो जाती, उसका लालन - पालन, शिक्षा-दीक्षा और विकास ऐसे सुरक्षित   माहौल में भी होने चाहिए, जिससे उसके व्यक्तित्व का समुचित विकास हो सके और वह एक जिम्मेदार नागरिक की तरह अपना जीवन यापन कर सके। वैसे ही न जाने कितने तरह   के विकार हमारे समाज में महिलाओं को लेकर हैं, जिसने सदियों से लड़ाई जारी है परंतु इस तरह के प्रतिशोधात्मक काली करतूत अपने आप में अनूठी है। परिणामत: और ज्यादा  त्रासद भी। इसकी पुनरावृत्ति समाज में न हो, इसके लिए समाज के बच्चे-बच्चे को सतर्क और चौकस रहना होगा और हर तरह से ऐसे तत्वों का प्रतिकार और बहिष्कार करना  होगा।

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