खतरनाक मोड़ पर अमेरीका - इरान टकराव

वॉशिंगटन
अमेरिका और ईरान के बीच खतरनाक स्तर तक पहुंच गए तनाव के बीच पूरी दुनिया खाड़ी क्षेत्र में एक और युद्ध की आशंका से भयभीत है। हाल की कुछ घटनाओं ने यह चिंता पैदा  कर दी है कि अगर इन दोनों के बीच बढ़ते तनाव को कम नहीं किया गया, तो एक नया विश्व संकट दुनिया के तमाम देशों की मुश्किलें बढ़ाने आ सकता है। चिंता खासतौर से  भारत के लिए है, क्योंकि हमारा देश तेल आयात के लिए बहुत हद तक ईरान से होने वाली सप्लाई पर निर्भर रहा है, जो फिलहाल अमेरिका के दबाव के चलते ठप पड़ी है। उधर  कहा जा रहा है कि अगले साल अमेरिका में होने वाले राष्ट्रपति चुनावों के मद्देनजर वहां के मौजूदा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपने मुल्क से दूर इलाके में कोई छोटे स्तर का युद्ध छिड़ते  देखना पसंद करेंगे, ताकि उसके असर से सत्ता में उनकी वापसी मुमकिन हो सके। ऐसे में कुछ हालिया घटनाओं के बीच सवाल उठ खड़ा हुआ है कि अगर अमेरिका-ईरान के बीच  जंग की नौबत आई तो क्या दुनिया उसके असर से बच पाएगी।

ताजा टकराव की वजह
ताजा मुश्किल 20 जून को तब उठ खड़ी हुई, जब ईरान की इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कोर (आइआरजीसी) ने घोषणा की कि उसने अमेरिका के एक जासूसी ड्रोन को मार गिराया  है। ड्रोन मार गिराने की घटना की पुष्टि अमेरिकी सेना के सेंट्रल कमांड ने भी की और कहा कि ईरान ने अमेरिकी नेवी का ड्रोन मार गिराया है। अमेरिका ने यह दावा भी किया कि  उसका ड्रोन अंतर्राष्ट्रीय हवाई क्षेत्र में था न कि ईरानी हवाई क्षेत्र में। अमेरिकी सेना ने इसे बिना किसी कारण का हमला बताया। इस घटना की प्रतिक्रिया में अमेरिकी राष्ट्रपति  डोनाल्ड ट्रंप ने पहले तो कहा कि ईरान ने बहुत बड़ी गलती की है। बाद में उनका यह बयान भी आया कि वे ईरान के तीन ठिकानों पर हमला करने के लिए पूरी तरह से तैयार थे,  लेकिन हमला होने के सिर्फ 10 मिनट पहले उन्होंने अपना फैसला बदल लिया। ट्रंप ने हमला रोकने के पीछे अपने सैन्य जनरल का यह आकलन बताया कि ड्रोन के बदले किए जाने  वाले जवाबी हमले के आधे घंटे में ही 150 मौतें होंगी। ट्रंप के मुताबिक यह मानव-विनाश देखते हुए उन्होंने हमला रोकने का आदेश दिया।

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