एनबीएफसी की चिंता में डूबा बाजार

मुंबई
घरेलू शेयर बाजारों में गुरुवार को इस साल की एक दिन में सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की गई। रिजर्व बैंक के रेपो दर में उम्मीद के अनुसार कटौती लेकिन एनबीएफसी क्षेत्र को लेकर  निवेशकों की चिंता दूर करने में विफल रहने के बाद यह गिरावट आई। तीस शेयरों वाला सूचकांक 553.82 अंक अर्थात 1.38 प्रतिशत लुढ़ककर 39,529.72 अंक पर बंद हुआ। वहीं  नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 177.90 अंक यानी 1.48 प्रतिशत टूटकर 11,843.75 अंक पर बंद हुआ। इससे पहले 22 अप्रैल को सेंसेक्स ने 495.10 अंक का गोता लगाया था  जबकि निफ्टी 158.35 अंक टूटा था। केंद्रीय बैंक ने इस साल लगातार तीसरी बार रेपो दर में 0.25 प्रतिशत की कमी की है। इस कटौती के बाद रेपो दर 5.75 प्रतिशत पर आ गई  जो नौ साल का न्यूनतम स्तर है। साथ ही मौद्रिक नीति रुख को 'तटस्थ' से 'नरम' कर दिया है। हालांकि रिजर्व बैंक ने चालू वित्त वर्ष के लिए घरेलू गतिविधियों में नरमी तथा  वैश्विक व्यापार बढ़ने के कारण आर्थिक वृद्धि दर के अनुमान को घटाकर 7 प्रतिशत कर दिया। रिजर्व बैंक गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि केंद्रीय बैंक की एनबीएफसी क्षेत्र में  गतिविधियों पर नजर है और वह वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित करेगा। हालांकि, कारोबारियों ने कहा कि बाजार नकदी बढ़ाने तथा देश के समस्याग्रस्त एनबीएफसी क्षेत्र में भरोसे   के  संकट के समाधान को लेकर ठोस उपायों की प्रतीक्षा कर रहा था। सेंसेक्स में शामिल जिन शेयरों में गिरावट दर्ज की गई, उसमें इंडसइंड बैंक, यस बैंक, एसबीआई, एलएंडटी, टाटा  स्टील, महिंद्रा एंड महिंद्रा, बजाज फाइनेंस, वेदांता, टाटा मोटर्स और आरआईएल शामिल हैं। इनमें 6.97 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई। वहीं दूसरी तरफ कोल इंडिया, पावर  ग्रिड, एनटीपीसी, एचयूएल, हीरो मोटो कार्प, एशियन पेंट्स और इंफोसिस में 1.92 प्रतिशत तक की तेजी आई। आनंद राठी शेयर्स एंड स्टॉक ब्रोकर्स में निवेश सेवा मामलों के शोध  प्रमुख नरेंद्र सोलंकी ने कहा कि नीतिगत दर में कटौती का सकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ा।
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