आज से तीन दिनों तक कामबंद आंदोलन पर जेजे अस्पताल के चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी

मुंबई
मुंबई के जेजे अस्पताल समूह के चतुर्थ श्रेणी में कार्यरत कर्मचारी मंगलवार से तीन दिवसीय कामबंद आंदोलन शुरू कर रहे हैं। कर्मचारियों का कहना है कि अस्पताल में 50 प्रतिशत   कर्मचारियों के पद रिक्त पड़े हुए हैं, जिसे भरने की बजाय उसका निजीकरण किया जा रहा है। उनका आरोप है कि अनुकंपा पर कार्यरत करीब 105 कर्मचारियों को निकाल दिया   गया है। सरल सेवा भर्ती पर रोक लगा दी गई है। इसके साथ ही अन्य मांगों को लेकर यह आंदोलन किया जा रहा है। एक महीने के भीतर मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया  गया तो अनिश्चितकालीन आंदोलन छेड़ दिया जाएगा। वहीं मंगलवार से शुरू आंदोलन में जेजे के साथ जीटी, कामा और सेंट जार्ज अस्पताल में कार्यरत चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारी भी  शामिल होंगे। राज्य सरकारी चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी मध्यवर्ती संगठन के भाऊसाहेब पठान ने कहा कि जेजे अस्पताल में 1500 चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी अपनी सेवा दे रहे हैं। उन्होंने कहा  कि अस्पताल में पहले से ही आवश्यकता के मुताबिक कर्मचारियों की संब्या पचास प्रतिशत कम है, जिसके चलते अस्पताल के कामकाज का अधिकतर भार इन्हीं कर्मचारियों पर   रहता है। ऐसे में रिक्त पदों को भरने की बजाय चतुर्थ सेवा का निजीकरण किया जा रहा है। संगठन के अध्यक्ष भाऊसाहेब पठान ने कहा कि 14 मई को संगठन की तरफ से  मुख्यमंत्री, स्वस्थ्य शिक्षा मंत्री, राज्य के मुख्य सचिव, स्वस्थ्य शिक्षा व संसोधन निदेशालय और अस्पतालों के अधिष्ठाताओं को मांगों से संबंधित पत्र दिया गया था, जिय पर किसी  तरह का ठोस निर्णय नहीं लिया गया। इतना ही नहीं चतुर्थ सेवा को निजीकरण करने के लिए ई-टेंडरिंग द्वारा बाकायदा निविदा मंगाया गया है। जल्द ही इस सेवा का निजीकरण  कर दिया जाएगा। इस निर्णय के चलते कई लोगों की नौकरी चली जाएंगी और किसानों की तरह उन्हें भी आत्महत्या के लिए बाध्य होना पड़ेगा। ऐसे में मजबूरन अस्पतालों के चतुर्थ  श्रेणी कर्मचारियों को तीन दिवसीय सांकेतिक काम बंद आंदोलन करने के लिए बाध्य होना पड़ा है। संगठन के अध्यक्ष पठान और महासचिव प्रकाश बने ने कहा कि कर्मचारी चतुर्थ  सेवा के निजीकरण का विरोध कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि निजीकरण के लिए निकाली गई ई-टेंडरिंग निविदा को रद्द करने, अनुकंपा के तहत प्रलंबित पदों को भरने, सरल सेवा के  तहत भर्ती शुरू करने, कई सालों से अस्पतालों में सेवा दे रहे ठेकाकर्मियों को नियमित करने के साथ अन्य प्रलंबित मांगों को लेकर आंदोलन के जरिए सरकार और संबंधित विभागों  का ध्यान आकृष्ट किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यदि एक महीने के भीतर उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो इस आंदोलन को और तीव्र करते हुए  अनिश्चितकालीन तक शुरू रखा जाएगा। वहीं मंगलवार से शुरू आंदोलन से अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाओं पर असर पड़ेगा। दुसरी तरफ इसे लेकर जेजे अस्पताल के अधिष्ठाता डॉ.  अजय चंदनवाले और अधिक्षक डॉ. संजय सुरासे से संपर्क किया गया, लेकिन उनसे इस बारे में बात नहीं हो सकी।
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