मराठा समाज के लाखों छात्रों को बड़ी राहत

मुंबई
राज्य के इंजीनियरिंग, फार्मास्युटिकल, होटल मैनजमेंट, आर्किटेक्ट जैसे व्यावसायिक पाठम्यक्रमों में प्रवेश के वक्त मराठा समाज के छात्रों को एसईबीसी वर्ग में जाति प्रमाणपत्र की तत्काल जरूरत नहीं है। बुधवार को विधानसभा  में इस बात की घोषणा उच्च व तकनीकी शिक्षा मंत्री विनोद तावडे ने की। इस निर्णय से राज्य के लाखों छात्रों को राहत मिलेगी। मंगलवार को राज्य में तकनीकी शिक्षा पाठम्यक्रम  सहित अन्य व्यावसायिक पाठम्यक्रमों में प्रवेश प्रक्रिया के पहले दौर में दस्तावेजों के साथ जाति प्रमाणपत्र पेश करने का निर्देश दिया गया था, लेकिन बुधवार को मुख्यमंत्री देवेंद्र  फड़नवीस की प्रमुख उपस्थिति में प्रवेश नियमन समिति के अध्यक्ष रिटायर्ड न्यायमूर्ति देशमुख, उच्च व तकनीकी शिक्षा मंत्री विनोद तावडे, श्रमिक, विमुक्त जाति, भटख्या जमाति,  अन्य पिछड़ा वर्ग और विशेष पिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री संजय कुटे और विभागों के सचिवों की बैठक हुई। इस बात की जानकारी देते हुए तावडे ने कहा कि वर्ष 2018 के अधिनियम  के अनुसार मराठा समाज को सामाजिक व शैक्षणिक दृष्टि से पिछड़ा वर्ग (एसईबीसी) में शामिल किया गया है। इस वर्ग के छात्रों के लिए जाति प्रमाणपत्र के सत्यापन के लिए पर्याप्त तंत्र उपलब्ध नहीं है। ऐसे में सरकार ने फैसला लिया है कि एसईबीसी वर्ग के जिन छात्रों ने संबंधित जाति सत्यापन समिति के पास जाति सत्यापित करने का आवेदन किया  है, ऐसे छात्रों से प्रवेश के वक्त जाति प्रमाणपत्र पेश करने की सख्ती नहीं की जाएगी। व्यावसायिक पाठम्यक्रमों में प्रवेश लेने वाले अनुसूचित जाति, जनजाति, विमुक्त जाति, भटक्या जमाति, अन्य पिछड़ा वर्ग के ऐसे छात्र, जिनके पास आवेदन करते वक्त जाति प्रमाणपत्र नहीं है, ऐसे छात्रों को प्रवेश के दूसरा दौर शुरू होने के पहले प्रवेश नियामक  प्राधिकरण की तरफ से तय तारीख तक जाति प्रमाणपत्र दाखिल करने की मुद्दत बढ़ाकर देने का निर्णय शासन ने लिया है। इस निर्णय से मराठा समाज के लाखों छात्रों को राहत मिली है।
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