किसानों के लिए अब एप बनेगा सहारा

वाराणसी
अब किसानों कोअपनी समस्याओं को लेकर कृषि विभाग के दब्तरों का चकर नहीं लगाना पड़ेगा। उनको अपनी खेती की तकनीकी जानकारी के लिए भी भटकना नहीं पड़ेगा। वे जब चाहे गेहूं व धान के बेहतर उपज के लिए वैज्ञानिक पहलुओं को जानकर खुद भी वैज्ञानिक बन सकेंगे। यानी घर बैठे ही उनकी सारी समस्याओं का हल मिल जाएगा। यह संभव होगा ईरी (अंतर्राष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान) के वेब एप से। खास है कि धान का संस्थान होने के बाद भी ईरी गेहूं के प्रति भी अपनी रूचि दिखाई है।
चावल व गेहूं की फसल से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए ईरी ने 'आरडल्यूसीएम' नाम से वेब एप लाच किया है। इसके जरिए सान अपनी समस्याओं को साझा करेगा जिससे महज चंद मिनटों में किसान को जबाब मिल जाएगा। यह जानकारी संस्थान के विशेषज्ञ डॉ. डीएस राणा ने बातचीत में दी। डॉ. राणा ने कलेक्ट्री फार्म स्थित ईरी के दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय केंद्र में आयोजित तीन दिवसीय कार्यक्रम से इतर बताया कि एप में करीब 15 सवाल शामिल हैं, जिसका जवाब किसानों को देना है। इस एप को कोई भी किसान अपने एंड्रायड मोबाइल में डाउनलोड कर सकता है। इसमें खाद बीज को सही समय पर सही तरीके से खेत में डालने, उससे होने वाले फायदे, कम लागत में अधिक उत्पादन, सिचांई, मृदा जाच समेत कई बिंदू शामिल होंगे। किसान घर जाकर आसपास के अन्य किसानों को भी एप की जानकारी को साझा कर सकते हैं।
बताया कि इसका ओडिशा में प्रयोग हो चुका है। इनसेट 14 दिनों तक बाढ़ की मार झेल सकता है 'स्वर्णा सब-1' डॉ. राणा ने बताया कि ईरी  ओर से धान की प्रजाति स्वर्णा सब-1 विकसित की गई है। यह बाढ़ वाले इलाके में भी सफल है। इसमें लगातार 14 दिनों तक बाढ़ की मार झेलने की क्षमता है। इसके अलावा उन्होंने सूख में भी 5-6 टन प्रति हेक्टेयर उपज देने वाली प्रजाति सहभागी के बारे में भी जानकारी दी। आईआईआर, हैदराबाद की ओर से विकसित की गई प्रजाति डीआरआर-44 के बारे में बताया कि यह भी सूखे में बेहतर उपज देगी। हालांकि रक्त बढ़ाने वाली धान की किसी भी प्रकार की प्रजाति विकसित करने से इंकार किया।
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