नीतीश ने मंत्रिमंडल में शामिल नहीं होने की बताई वजह

पटना
जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष और बिहार के सीएम और नीतीश कुमार ने कहा है कि जेडीयू एनडीए के साथ है, लेकिन पार्टी केंद्र सरकार में शामिल नहीं होगी। शुक्रवार को दिल्ली से  शपथ ग्रहण समारोह में भाग लेकर पटना लौटे नीतीश कुमार ने एयरपोर्ट पर पत्रकारों से लंबी बात की और सरकार में शामिल न होने के कारणों को बताया। सीएम ने कहा कि  किसी को कोई भ्रम में नहीं रहना चाहिए। हम एनडीए के साथ हैं हमारा समर्थन उनके साथ हैं। उन्होंने ने कहा कि जिस परिस्थिति में सरकार में शामिल होने की बात की जा रही  थी, वो हमारी पार्टी के लिए सही नहीं था। नीतीश ने आनुपातिक भागेदारी पर सवाल करते हुए कहा कि हमने सरकार से मिले प्रस्ताव को अपनी पार्टी के समक्ष रखा और सबकी  सहमति के बाद ही हमने सरकार में शामिल नहीं होने का निर्णय लिया। नीतीश ने कहा कि बैठक के दौरान मुझे बताया गया कि मंत्रिमंडल में सभी सहयोगियों को एक-एक सीट दी  जा रही है। जब उन्होंने एक सीट की बात कही यानी सिंबोलिक एपियरेंस की तो हमने कहा कि हमें नहीं लगता कि इसकी जरूरत है। हमने इसकी चर्चा अपने लोगों से की। नीतीश  ने कहा कि हमारे लोकसभा में 16 और राज्यसभा से छह सदस्य हैं। हमने अपनी कोर टीम से बात की और लोगों ने कहा कि ये उचित नहीं है। भागेदीरी अनुपातिक होना चाहिए  और ये हमारी पार्टी में सभी लोगों की भी मांग थी। नीतीश ने कहा कि हमने अपनी तरफ से कुछ नहीं मांगा था लेकिन पेपर में पढ़ा कि हम तीन मांग रहे थे, जो कि सत्य से  बिल्कुल परे है। हमें सरकार में सिंबोलिक सहभागिता की आवश्यक्ता नहीं थी। वाजपेयी सरकार का जिक्र करते हुए नीतीश ने कहा कि पूर्व की सरकारें जो केंद्र में रही हैं सभी में  सहयोगियों का सही प्रतिनिधित्व रहा है। हमने जब भाजपा के इस प्रस्ताव को लेकर संगठन से लेकर मंत्रियों और सांसदों तक से बात की तो सभी ने नकारा और सभी की सहमति   से सरकार में शामिल नहीं होने का फैसला लिया गया।
नीतीश ने कहा कि बिहार के हित में ही ये गठबंधन किया है। हमलोग इसी के लिए साथ हुए हैं। नीतीश ने कहा कि सरकार में शामिल करने वाली पार्टियों के मंत्री पद का अनुपात  उनको तय करना चाहिए था। हमारा कोई प्रस्ताव नहीं था उनका एक का प्रस्ताव था। नीतीश से जब नई सरकार के गठन में जातिगत समीकरण को लेकर प्रतिक्रिया मांगी गई तो  उन्होंने कहा कि हमें उनके सरकार के गठन पर कोई प्रतिक्रिया नहीं देना, लेकिन इतना जरूर कहना है कि सांकेतिक भागेदारी का कोई मतलब ही नहीं। हमलोगों के लिए इन चीजों  की कोई आवश्यक्ता नहीं। हम ये कहना चाहते हैं कि किसी पार्टी के पास पूर्ण बहुमत होता है, तो मंत्री बनाने न बनाने का निर्णय उनका होता है। नीतीश ने कहा कि कैबिनेट में  शामिल होने को लेकर पीएम की तरफ से कोई प्रस्ताव नहीं आया था। नीतीश भविष्य में मंत्रिमंडल में शामिल होने के सवालों को नकार गए और कहा कि अब उसकी कोई जरूरत  नहीं है वरना लोग कहेंगे कि हम तब नाराज थे और अब हमारी मांग पूरी हो गई तो हम नाराज नहीं हैं।
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