एक महत्वपूर्ण शक्ति

अमेरिका के एक अध्ययन दल का यह दावा कि हमारे देश का स्थान एशिया में महत्वपूर्ण रहेगा, मुनादी है। आने वाले उस कल की, जिसकी नीव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहली ही   पारी में पड़ चुकी है और जिसकी धमक दुनिया ने महसूस की है और जिसने दुनिया को हमें देखने का नजरिया बदलने को बाध्य किया है यह कोई छोटी मोटी उपलब्धि नहीं है,  बल्कि सफलता की सुनामी का प्रमुख कारण है, जिसमें अपना सब कुछ गवां चुका विपक्ष अभी ठीक से खड़ा नहीं हो पा रहा है। हमसे कई मामले में बड़ा चीन इस क्षेत्र में वह स्थान  नहीं प्राप्त कर सकता, यह भी उस अध्ययन दल का दावा है और यह सच भी है। कारण चीन ने जिस तरह से अपना उल्लू सीधा करने के लिए छोटे देशों को कर्ज के जाल में  फंसाने का कुचक्र अपनी बेल्ट एंड रोड योजना के माध्यम से रचा है, वह अब दुनिया के सामने उजागर हो गया है। भुक्तभोगी देश खुद चिल्लाने लगे हैं, उसकी भू पिपासा और अन्य  बातें भी लोगों के दिलों को खटक रही है, जबकि हम 'सबका साथ और सबका विकास' का सिद्धांत विदेशी नीति में भी मानते हैं, हमारा अतीत या वर्तमान कभी किसी का नाजायज  लाभ उठाने वाला या हड़पने वाला नहीं रहा है। इसके चलते हमारे रिश्ते चीन और पाक को छोड़कर बाकी इस क्षेत्र के सभी देशों से अच्छे रहे हैं और मोदी युग में, तो उन्हें और  ऊंचाई मिली है, यह उक्त अध्धयन भी स्वीकारता है। वह तो यह भी मानता है कि दक्षिणी एशिया के अन्य देशों से भारत के अच्छे सबंध चीन का प्रभाव रोकने में काफी कामयाब  हुए हैं। यह हमारे लिए अच्छी बात है और उससे अच्छी बात यह है कि एक बार फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी पार्टी और राजग के बंपर बहुमत के साथ सत्तासीन हो चुके हैं और जिस तरह इस बार शपथ ग्रहण समारोह में बंगाल की खाड़ी के देश शामिल हुए हैं। हमारे देश की उक्त देशों से संबंध और ऊंचाई पर जाने वाले है। प्रधानमंत्री के इस मास्टर  स्ट्रोक, जिसके तहत बड़ी चतुराई से चीन और पाकिस्तान को यह संदेश भी गया कि अपने आपको सुधारों नहीं, तो आगे की राह बड़ी कठिन है। वैसे चीन का निजाम इस बदले  माहौल को समझ रहा है और आजकल वह हमसे व्यवहार में काफी नर्म है, परंतु उसका अतीत का गिरगिटिया स्वभाव देखते हुए उस पर सहजता से विश्वास करना मुश्किल है और  उसपर सतर्क दृष्टि रखना है और जो हमारी है भी। रही बात पाक की तो आर्थिक बदहाल से बेहाल और दुनिया से अलग-थलग वह फिलहाल मोदी युग की उससे डील करने की शैली  से भयभीत है। परंतु उसमें चरित्रगत बदलाव आया है, ऐसा नहीं लगता कारण रोज हमसे लगी उसकी सीमा पर आतंकियों के होने, घात लगाने की बातें सुर्खियां बन रही हैं। वैसे भी  ऐसे निजाम जल्दी सुधरते नहीं, जबकि हमारे प्रधानमंत्री ने उन्हें सही राह पर लाने और अब हमारी सरजमीं पर किसी भी तरह से कोई अनुचित हरकत न करने देने का बीड़ा उठा  लिया है और उसे कड़े शŽदों में सतत जताते भी रहते हैं और अब तो दुबारा देश की जनता ने उन्हें पहले से बड़ी सफलता देकर उनकी नीतियों का अनुमोदन कर दिया है। अपना  भरोसा जता दिया है। यह पाक को भी समझना चाहिए। कारण अब कोई चूक और चाल बहुत भारी पड़ेगी। कुल मिलाकर अब हम द्रुतगति से विश्व की महाशक्ति बनने की राह पर  हैं और मोदी की इस दूसरी पारी में और तेजी से आगे बढ़ेंगे। इसमें कोई दो राय नहीं है। जिसका दबाव सबसे ज्यादा चीन और पाकिस्तान पर ही होगा। कारण हमारे यहां कुछ भी  अच्छा होता है, तो उन्हें सबसे ज्यादा बुरा लगता है। कारण एक को अपनी चौधराहट का खतरा है, तो दूसरे को जो हमसे द्वेष के गर्भ से पैदा ही हुआ है। खैर कोई चाहे जो सोचे,  भारत आगे बढ़ चुका है, बढ़ता ही रहेगा, उसे कोई रोक नहीं सकता।

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