विश्व कप से टीम इंडिया आउट

मैनचेस्टर
वर्ल्ड कप के पहले सेमीफाइनल में न्यूजीलैंड से हारकर टीम इंडिया का सफर यहीं पर समाप्त हो गया है। कीवी टीम ने पहले खेलते हुए 240 रन का लक्ष्य दिया था, लेकिन भारतीय  टीम 18 रन से यह मैच हार गई। खराब शुराआत के बाद रविंद्र जडेजा (77) और एमएस धोनी पाए और गेंद उनके बैट को चूमती हुई सीधे विकेटकीपर टॉम लेथम के हाथ में पहुंची।  इसके बाद अगले ही ओवर में कप्तान विराट कोहली को ट्रेंट बोल्ट ने अपना शिकार बनाया। इस लेफ्टआर्म बोलर की अंदर आती हुई गेंद पर विराट बल्ले से छूने से चूक गए और  गेंद सीधे पैड पर टकरा गई। वह पगबाधा आउट हुए। विराट ने खुद को सुरक्षित बचाए रखने के लिए डीआरएस जरूर मांगा, लेकिन कैमरे से साफ हो गया कि गेंद स्टंप की चूमते  हुए जा रही थी। निर्णय अगर-मगर में था, तो नियम के अनुसार अंपायर के निर्णय को ही सही माना गया। कोहली निराश होकर पैवेलियन लौट गए। अगले ओवर में दूसरे ओपनर  केएल राहुल भी मैट हैनरी की स्विंग को नहीं संभाल पाए और वह भी विकेटकीपर को कैच देकर पैवेलियन लौट गए। 3.1 ओवर में भारत ने अपने टॉप तीन बल्लेबाज गंवा दिए और  स्कोरबोर्ड पर अभी सिर्फ पांच रन ही थे। यहां से दिनेश कार्तिक ने युवा बल्लेबाज ऋषभ पंत के साथ मिलकर लड़खड़ा चुकी पारी को संभालने की कोशिश की, लेकिन कार्तिक-पंत ने  अभी 19 रन ही और जोड़े थे कि 10वें ओवर की अंतिम बॉल पर दिनेश कार्तिक पॉइंट पर खड़े जिम्मी नीशम के उम्दा कैच का शिकर हो गए। मैट हैनरी के खाते में यह तीसरी सफलता रही। नीशम ने अपनी बाईं ओर छलांग लगाते हुए जमीन से कुछ सेंटीमीटर पहले ही कार्तिक का यह शॉट अपने हाथ में लपक लिया। जल्दी-जल्दी चार विकेट गंवाने के बाद  हार्दिक पंड्या यहां क्रीज पर धोनी से पहले आ गए। पंड्या और पंत ने पारी को जिम्मेदारी से संभालने का प्रयास किया। दोनों बल्लेबाज धैर्य के साथ धीमी गति से पारी को आगे बढ़ा  रहे थे और इस समय जरूरत विकेट बचाने की थी, तो दोनों ही अपने स्वभाव के विपरीत और परिस्थितियों के अनुरूप खेलते दिख रहे थे। दोनों ने अगली 65 बॉल तक कोई विकेट 
नहीं गिरने दिया।
अब लगने लगा था कि ये दोनों बल्लेबाज भारत को 100 पार पहुंचा देंगे। तभी सेंटनर की बॉल पर 32 रन के निजी स्कोर पर खेल रहे पंत मिड विकेट पर छक्का जड़ने की  जल्दबाजी कर गए और एक आसान सा कैच वहां बाउंड्री के पास खड़े कोलिन डि ग्रैंडहोम को थमा गए। यह भारत को पांचवां झटका था। अब पंत के बाद पंड्या का साथ निभाने  सीनियर बल्लेबाज एमएस धोनी क्रीज पर आए। दोनों ने अगले कुछ ओवर एक बार फिर पारी को संभालने की कोशिश की। 30 ओवर के बाद टीम इंडिया का स्कोर 92 ही था और  अब नेट रन रेट भी ऊपर जा रहा था। यहां से भारत को अंतिम 20 ओवर में जीत के लिए 148 रन चाहिए थे तो पंड्या ने अपने गियर बदलने की सोची। यह रणनीति एक बार  फिर काम नहीं की और सेंटनर की बॉल पर मिड विकेट की ओर खेला उनका शॉट खड़ा हो गया।
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