बीमा कंपनियों के खिलाफ मोर्चा

मुंबई
फसल बीमा योजना का क्रियान्वयन उचित तरीके से होने से किसानों को इसका लाभ मिल सके, इसके लिए शिवसेना बांद्रा-कुर्ला कांप्लेक्स में फसल बीमा कंपनियों के कार्यालयों पर  आगामी 17 जुलाई को मोर्चा निकालेगी। इस बात की घोषणा शिवसेना पक्ष प्रमुख उद्धव ठाकरे ने की। गुरुवार को दादर स्थित शिवसेना भवन में आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में उद्धव ठाकरे  ने कहा कि शिवसेना की तरफ से निकाला जाने वाला यह मोर्चा फसल बीमा कंपनियों के लिए चेतावनी मोर्चा है। शिवसेना का यह मोर्चा किसान मोर्चा नहीं, यह किसानों के लिए  मोर्चा होगा। यह आंदोलन नहीं है। यह मोर्चा एशियन हार्ट अस्पताल के सामने से निकल कर एसबीआई, कोटक बैंक होते हुए परिणि इमारत में जाएगा, जिसमें भारती एक्सा इंश्युरेंस  कंपनी को ज्ञापन दिया जाएगा। उद्धव ने कहा कि शिवसेना एक बीमा कंपनी को ज्ञापन देगी, लेकिन यह सभी बीमा कंपनियों को चेतावनी होगी। उन्होंने कहा कि चेतावनी मोर्चा के  बाद यदि किसानों के फसल बीमा संबंधी सभी मामले सामने नहीं आए तो शिवसेना बीमा कंपनियों से शिवसेना की भाषा में बात करेगी। उद्धव ने चेतावनी दी कि किसानों को परेशान  करने वाली बीमा कंपनियों को उचित सबक सिखाया जाएगा। यह विषय हमारे अन्नदाताओं का है। हमें सभी को मिलकर उनकी मदद करनी चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि जिस  तरह कर्ज के जाल में उलझे किसानों के दरवाजे पर बैंक नोटिस लगाते हैं, उसी तरह कर्जमाफी पाए किसानों के नाम बैंक के दरवाजे पर लगाए जाएं। उन्होंने कहा कि सरकार बदली,  लेकिन मशीनरी वही रहने से योजनाएं किसानों तक नहीं पहुंचती। राज्य के कुछ हिस्सों में फसल बीमा का काम ठीक तरीके से हुआ, लेकिन आज भी कई जगह किसान फसल बीमा  योजना से वंचित हैं। उन्हें उचित मुआवजा नहीं दिया जाता। फसल बीमा के संदर्भ में हम कई विशेषज्ञों से बात कर रहे हैं। योजना में जो भी त्रुटियां होंगी, उन्हें समझकर सरकार को  सूचित कर उनमें सुधार किया जाएगा। उद्धव ने कहा कि हमने केंद्र सरकार से स्वतंत्र कृषि आयोग गठन की मांग की है, इसमें कृषि विशेषज्ञ होंगे, जो सरकार और किसानों को  बेहतर सुझाव देंगे, इससे किसानों को फायदा होगा।

शिवसेना का स्टंट - कांग्रेस
महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष अशोक चव्हाण ने कहा कि सरकार में रहकर अपना कर्तव्य निभाने में शिवसेना असफल रही है। सरकार के रूप में वह किसानों को न्याय नहीं दे पाई है।  इस असफलता को छुपाने के लिए वह अब बीमा कंपनियों पर मोर्चा निकालने का स्टंट कर रही है। उन्होंने कहा कि किसानों को फसल बीमा योजना का लाभ नहीं मिलने की वजह  योजना के नियम और शर्तें हैं। यह नियम शिथिल करने के लिए शिवसेना कैबिनेट बैठक में आक्रामक भूमिका अपनाकर किसानों को राहत दे सकती थी, लेकिन यह करने के बजाय  वह मोर्चे निकालकार किसानों की सहानुभूति प्राप्त करना चाहती है।
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