मराठा कोटे से भरी खुले वर्ग की नियुक्तियां होंगी रद्द

मुंबई
सरकार ने मराठा कोटे के तहत खुले वर्ग से की गई अस्थाई नौकरियों को रद्द करने का निर्णय लिया है। इससे तकरीबन 3 हजार लोगों का भविष्य अधर में लटक गया है। कोर्ट के  आदेश के बाद मराठा कोटे के तहत खुले वर्ग से कांट्रेक्ट के आधार पर लोगों को नौकरियां दी गई थी। राज्य सरकार की तरफ से गुरुवार को जारी किए गए एक आदेशानुसार 9  जुलाई 2014 से 14 नवंबर 2014 इन तीन माह की अवधि की सरकारी नियुक्तियां एसईबीसी अर्थात मराठा उम्मीदवारों के लिए सुरक्षित की गई हैं। दूसरी तरफ इन अवधि में इनकी  जगह पर खुले वर्ग से अस्थाई नियुक्तियों को खत्म करने के आदेश जारी किए गए हैं। इससे खुले वर्ग के उम्मीदवारों की सेवा अपने आप खत्म हो गई है। खुले वर्ग के तकरीबन 3  हजार लोगों को अपनी अस्थाई सरकारी नौकरी छोड़नी होगी। आघाडी सरकार के काल में वर्ष 2014 में नारायण राणे समिति की सिफारिश के अनुसार मराठा समाज को एक  अध्यादेश के जरिए 16 फीसदी आरक्षण दिया गया था। तत्कालीन सरकार के कार्यकाल में इस आरक्षण के आधार पर विभिन्न सरकारी विभागों में विज्ञापन निकालकर नौकरियों की  भर्ती की गई थी, हालांकि इस अध्यादेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई, जिसके बाद मराठा आरक्षण को स्थगित किया गया। आघाडी सरकार के बाद सत्ता में आई युति सरकार ने  मराठा आरक्षण संबंधी कानून विधानमंडल में मंजूर किया। इस कानून को उच्च न्यायालय में चुनौती दी गई। इस पर सुनवाई करते हुए अदालत ने अंतिम निर्णय आने तक सरकार  को अस्थाई तौर पर खुला वर्ग के लोगों को नौकरी देने के निर्देश दिए थे। कोर्ट के निर्देश के अनुसार सरकार ने हर 11 माह के कांट्रेक्ट के आधार पर अस्थाई नियुक्तियां की। इन  नियुक्तियों की मुद्दत को कोर्ट के आदेश के बाद बढ़ाया गया था। हाईकोर्ट के 26 जून के निर्णय के बाद मराठा समाज के आरक्षण को कानूनन संरक्षण मिला है। हालांकि अदालत ने  16 के बजाय नौकरियों में 13 फीसदी आरक्षण को स्वीकार्य किया। ऐसे में सरकार को विभिन्न आदेश निकालकर छात्रों के प्रवेश सहित सरकारी नौकरियों में नियुक्तियों को संरक्षित   करना पड़ रहा है। हालांकि मराठा समाज को न्याय देने से खुले वर्ग के उम्मीदवारों का भविष्य अधर में लटक गया है। सरकारी अधिकारियों का कहना है कि 2014 में हुई नियुक्तियां  अस्थाई थीं, इसकी जानकारी खुले वर्ग के उम्मीदवारों को थी, ऐसे में उनके साथ कोई अन्याय नहीं हुआ है।

मेडिकल में आरक्षण का रास्ता साफ
मराठा छात्रों को बंबई उच्च न्यायालय ने बड़ी राहत दी है। मेडिकल में प्रवेश के लिए मराठा छात्रों को आरक्षण न देने की याचिका हाईकोर्ट ने रद्द कर दी है। इससे मेडिकल में मराठा छात्रों को आरक्षण मिलने का रास्ता साफ़ हो गया है।
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