मौसमी फल सब्जियां ही खाएं

मनुष्य के भोजन में प्रतिदिन हरी शाक-सŽजी एवं फलों का होना अत्यावश्यक बताया गया है। इससे न सिर्फ विभिन्न तरह के स्वाद एवं भोजन रूचिकर होते हैं, बल्कि शरीर को  आवश्यक तत्व वसा, प्रोटीन, कार्बोहाइडे्रट, विटामिन आदि भी प्राप्त होते हैं। इन शाक- सब्जियों एवं फलों में बंदगोभी, पालक, आलू, फूलगोभी, शलजम, बैंगन, करेला, भिंडी, टमाटर,  गाजर, मूली, सेब, नासपाती, नारंगी, केला, अंगूर, मौसमी आदि प्रमुख हैं।
इन फलों एवं सब्जियों में कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, वसा, खनिज प्रचुर मात्र में पाए जाते हैं। कार्बोहाइडे्रट एवं वसा शरीर को ऊर्जा प्रदान करते हैं, वहीं प्रोटीन शरीर निर्माण एवं रख रखाव  के लिए जिम्मेवार है। आलू में कार्बोहाइड्रेट 20 प्रतिशत, प्रोटीन 1.9 प्रतिशत, वसा 0.1 प्रतिशत, पाए जाते हैं। बंद गोभी में कार्बोहाइड्रेट 5.5 प्रतिशत, प्रोटीन 1.2 प्रतिशत तथा वसा   0.3 प्रतिशत पाया जाता है जबकि मटर एवं केले में कार्बोहाइडे्रट क्रमश  16.7 और 20 प्रतिशत, प्रोटीन 5.2 और 1.0 प्रतिशत तथा वसा 0.5 प्रतिशत दोनों में समान रूप से पाए  जाते हैं। इसी तरह सेब एवं पालक में कार्बोहाइड्रेट क्रमश: 12.8 एवं 3.2 प्रतिशत प्रोटीन 0.3 प्रतिशत पाया जाता है।
मोटे तौर पर यह भी जान लें कि पीले एवं लाल फलों में विटामिन 'ए' की प्रचुर मात्रा होती है तथा खट्टे फलों में विटामिन 'सी' का भंडार होता है। विटामिन 'ए' शारीरिक ऊर्जा एवं   आंखों को रोशनी प्रदान करता है। इसकी कमी से रतौंधी नामक बीमारी होने का खतरा रहता है। विटामिन 'सी' मानसिक एवं बौद्धिक विकास में सहायक होता है जिसका प्रमुख स्रोत आंवला भी है।
कहा भी गया है, 'आहारेव्यवहारे च त्य€त लज्जा सुखी भवेत' अर्थात खाने-पीने और बोल-बर्ताव में आदमी लज्जा को त्याग कर सुखी होता है। अगर संपूर्ण भारत पर एक दृष्टि डाली   जाये तो करोड़ों लोग गरीबी रेखा से नीचे जीवन बिता रहे हैं। ऐसे में खासकर महंगे खाद्य पदार्थों को खरीद कर खाना आम लोगों के बस की बात नहीं है। ऐसी समस्या गरीबी के   कारण तो होती ही है, उन परिवारों में भी यह समस्या होती है जहां या तो सदस्य अधिक हों या परिवार नियोजन के साधन नहीं अपनाए जाते हों। कई बड़े परिवार ऐसे भी होते हैं   जहां कमाने वाले एक और खाने वाले कई होते हैं लेकिन हमेंहताश होने की जरूरत नहीं है। हमारे पास महंगे पोषक खाद्य पदार्थों के विकल्प भी हैं। सौभाग्य से हमारे देश में ऐसे  अनेक खाद्य पदार्थ उपलब्ध हैं जो सस्ते हैं और पोषक तत्व भी उनमें काफी होते हैं।
उदाहरण के लिए दूध कैल्शियम का अच्छा स्रोत है। कैल्शियम से हड्डियों का विकास होता है लेकिन दूध महंगा आता है अत: हम कैल्शियम की पूर्ति हरी पत्तेदार सब्जियों जैसे-  शलजम, चुकंदर, मूली आदि का सेवन करके कर सकते हैं जो कैल्शियम का उत्कृष्ट स्रोत हैं और दूध से ज्यादा सस्ते हैं। गाजर, टमाटर, पके आम, हरी पत्तेदार सब्जियों का सेवन  कर विटामिन 'ए' की जरूरत की पूर्ति कर सकते हैं। वसा ऊर्जा का अपेक्षाकृत महंगा स्रोत है लेकिन हम इसकी आंशिक रूप से पूर्ति सस्ते स्रोतों जैसे, आलू, केला आदि का सेवन   करके कर सकते हैं। खीरा-ककड़ी भी सलाद और सब्जियों में उपयोग किया जाता है। खीरे में 95 प्रतिशत पानी होता है। ककड़ी में भी लगभग 70 प्रतिशत जल की मात्र होती है जो  खाने पर ठोस रूप से शरीर को प्राप्त हो जाता है। खीरा-ककड़ी, तरबूज, खरबूजा आदि तमाम सरीखे फल काफी सस्ते मिलते हैं। हम जानते हैं कि पानी शरीर के लिए कितना जरूरी  है। शरीर में कुल वजन का 70 प्रतिशत पानी, 9 प्रतिशत र€त और शेष 21 प्रतिशत में हड्डी एवं स्थूल शरीर का अंश होता है।
ऐसा नहीं है कि महंगे खाद्य पदार्थ ही ज्यादा फायदा करते हैं बल्कि व्यक्ति को चाहिए कि जब मौसमी फल एवं सŽजी उनके खास मौसम में सस्ती एवं प्रचुर मात्र में हो तो उसका  भरपूर फायदा उठाया जाय। सिर्फ महंगी रोजमर्रा की वस्तुओं के प्रति आकर्षित न हों। झूठा दिखावा और दिखावटी सामाजिक मान मर्यादा का उचित एवं स्वस्थ खान-पान में कोई स्थान नहीं होना चाहिए।

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