मुंबई में इस वर्ष गढ्ढों की 17200 शिकायते

मुंबई
मुंबई में गड्ढों ने लोगों की परेशानियां बढ़ा दी है। पिछले साल की तरह इस साल भी टैक्सपेयर्स की गाढ़ी कमाई कुएं में ही जा रही है और वजह है मुंबई महानगरपालिका का गैर जिम्मेदाराना रवैया। हालांकि बीएमसी का दावा है कि वो मुंबईकरों की सड़कों पर परेशानी से मुक्त आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ रही है, लेकिन जमीनी  स्तर पर पिछले साल की तुलना में कोई खास बदलाव नजर नहीं आ रहा। मुंबई और उपनगरों में पिछले कुछ दिनों से बारिश नहीं हो रही है, लेकिन फिर भी यहां के लोग जगहज गह उभर आए गड्ढों से परेशान हैं। मुंबई मनपा में विपक्ष के नेता रवि राजा ने लोगों की परेशानी पर अपने ट्वीट में कहा है कि मनपा को पिछले 30 दिनों में गड्ढों की 1578  शिकायतें मिलीं। यह प्रशासन के लिए शर्म की बात है, लेकिन अब मनपा को आंकड़ों का अध्ययन और विश्लेषण करना चाहिए। साथ ही पिछले डेटा से इसकी तुलना करनी चाहिए।  ऐसे में जहां खराब से खराब स्थिति बनती है उनकी पहचान करनी चाहिए, ताकि वहां आसपास के लोगों को परेशानी का सामना नहीं करना पड़े। 'अगर इस साल 10 जून से 1  अगस्त के बीच उपलब्ध डेटा की बात की जाए तो अधिकतर वार्डों में 100 से अधिक शिकायतें मिलीं। किस वार्ड से कितनी शिकायतें ए वार्ड -102 केई वार्ड -291, केडब्ल्यू वार्ड - 149 एल वार्ड -123 पीएन वार्ड -158 पीएस वार्ड -132 आरएस वार्ड -109 एस वार्ड -191 आधिकारिक डेटा से पता चलता है कि मनपा ने कुल मिली शिकायतों में से 89.23 फीसदी  का निस्तारण किया और सिर्फ 10.77 फीसदी शिकायतें ही लंबित हैं। ऐसे में कोई भी हैरान हो सकता है कि जब मनपा इतनी अच्छी तरह काम कर रहा है तो लोगों को शहर में  इतने सारे गड्ढों से सामना क्यों करना पड़ रहा है। वर्ष 2019 में सिर्फ मुंबई में 17200 गड्ढों की शिकायतें दर्ज हुईं। इनमें से मनपा ने सिर्फ 3500 शिकायतों का ही निस्तारण  किया। बाकी की तरफ देखा तक नहीं गया। यही वजह है कि आज लोग पूछ रहे हैं कि इस तथाकथित अंतर्राष्ट्रीय शहर में इतने सारे गड्ढे क्यों हैं? कांग्रेस नेता रवि राजा के  मुताबिक इसका एक ही कारण है कि मनपा अपना काम ठीक से नहीं कर रहा। विपक्ष का आरोप है कि मनपा एशिया के सबसे अमीर नागरिक निकायों में से एक है। ये हर साल  नई सड़कें बनाने पर 2000 करोड़ रुपए खर्च करता है, लेकिन इतनी रकम खपाने के बाद भी अपेक्षित मानकों के मुताबिक ग्राउंड पर नतीजे नजर नहीं आते। मनपा द्वारा मरम्मत  कराए जाने के बावजूद हर साल मानसून में गड्ढे उभर आते हैं, जबकि पता चला है कि मनपा ने इस साल गड्ढों की मरम्मत के लिए करीब 125 करोड़ रुपए आवंटित किए। विपक्ष  का यह भी आरोप है कि दो साल पहले एक कंपनी को गड्ढे भरने के लिए कोल्ड मिक्स सामग्री तैयार करने का ठेका दिया गया था। यह साफ तौर पर एक खराब कदम था, लेकिन  फिर भी इसे जारी रखा गया। इस तरह का कदम आपदा के रूप में सामने आया, क्योंकि पहली ही बारिश में ये कोल्ड मिक्स सामग्री बह गई। फिर भी इसी तरीके को जारी रखा जा रहा है जो नाकाम हो चुका है। विपक्षी नेता का आरोप है कि कहीं न कहीं ऐसा लगता है कि मनपा की तरफ से कोल्ड मिक्स के ठेकेदारों को लाभ पहुंचाने की कोशिश की जा रही  है। शहर के कई हिस्सों में मनपा अभी भी गड्ढों को भरने के लिए पेवर फ्लॉक का उपयोग कर रही है, जो एक बार उखड़ जाने के बाद सड़कों पर बाइक सवारों के लिए आफत  साबित होते हैं। जब इस संबंध में जानकारी ली तो बताया गया कि तीन साल पहले नगर आयुक्त द्वारा सड़कों पर पेवर फ्लॉक का इस्तेमाल नहीं करने का आदेश दिया गया था।  स्पष्ट रूप से उस आदेश का पालन नहीं किया जा रहा है और शहर के कई हिस्सों में पेवर फ्लॉक के उखड़ने का असर देखा जा सकता है। हालात कितने विकट हैं, यह इसी से  समझा जा सकता है कि मुंबईकरों ने अब खुद ही गड्ढे भरने का जिम्मा संभाला है। पॉटहोल वारियर्स के नाम से एनजीओ चलाने वाले मुश्ताक अंसारी और इरफान माचीवाला ने  पिछले साल से लगभग 343 गड्ढे ठीक करने का कार्य किया है। दोनों का दावा है कि इस साल अकेले उन्होंने शहर के कई हिस्सों में 39 गड्ढे भरे हैं। मनपा की ओर से इस्तेमाल  किए जाने वाला मिश्रण मिलावटी है और उसे कंक्रीट बजरी के साथ मिक्स किया जाता है। ये गड्ढों में जम नहीं पाती। इंजीनियरों की ओर से इस काम पर निगरानी नहीं रखी  जाती। मनपा अधिकारियों से जब इस संबंध में उनका पक्ष जानने की कोशिश की गई, तो कोई जवाब नहीं मिला।
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