जो हो रहा है सही हो रहा है

तीन दशक कोई छोटा-मोटा समय नहीं होता है। हमारा देश इतने लंबे समय से एक राज्य में, जिसे धरती का स्वर्ग कहा जाता है पाक प्रायोजित आतंकवाद का सामना कर रहा है  और जिसमें स्थानीय गुमराह तत्व और अलगाववादियों का भरपूर योगदान होने की बात सतत सामने आती रही है। मोदी के पूर्व की सरकारें ने सुरक्षात्मक नीति को ही अंगीकार कर  इसका जवाब ही देती रही हैं, पाक को चेतावनी ही देती रही हैं, जिसको अनसुना कर पाक अपनी काली और क्रूर कारस्तानी जारी रखे रहा और तरह-तरह के लोमहर्षक घटनाएं घाटी  और देश के कोने-कोने में अंजाम दी जाती रहीं। स्थानीय राजनेता, जिसमें महबूबा और फारुख जैसों का समावेश है कुछ ऐसा करते नहीं लगे कि वे इस समस्या से दो-दो हाथ करने  में संजीदा हैं। उलटा मुफ्ती जैसों का बयान माहौल को और खराब करता दिखा और जिस तरह से वे वहां सुरक्षा में वृद्घि करने और तीर्थ यात्रियों और पर्यटकों को यह निर्देश देने के  बाद कि वे घाटी छोड़ दें, बौखालाई है और कुछ भी बोल रही हैं। तिल का ताड़ कर रही हैं, इसे क्या कहा जाए, समझ से परे है। वह जो कुछ कह और कर रही है, वह उस व्यक्ति   के लिए सही नहीं है, जो राज्य का मुख्यमंत्री रहा हो और जो वहां की रियाया की प्रतिनिधि बनने का दावा करता हो, जबकि उसी रियाया ने उसे हाल में हुए चुनाव में पटखनी दे दी  है। उन्हें पाक के हर नापाक कृत्य में पाकीजगी दिखती है, जबकि भारत सरकार का या जम्मू कश्मीर सरकार का हर कदम उन्हें खतरा दिख रहा है, तो वह उस जगह क्यों नहीं चली  जातीं और अपनी बात करतीं, उन्हें पता चल जाएगा कि पाक कितना पाक है।
सरकार में रहते हुए उनकी सरकार में उन पर भ्रष्टाचार का,  पाक परस्ती का, आतंकवाद को काबू में करने में विफलता का, हर तरह का आरोप लग चुका है। इसलिए भाजपा को  उनकी सरकार से हटना पड़ा। रमजान के पाक महीने में भी आतंकी अपने काले कारनामे करने से परहेज नहीं करते और सेना पर पत्थरबाजी होती है , कश्मीर में पाक के झंडे  लहराए जाते हैं और उस समय ये राज्य की मुखिया रहती हैं, तब भी इनकी भाषा में वह सख्ती नहीं दिखती, जैसी की आज दिख रही है। यह इतनी अंधी हो गई है कि सीमा पर  आतंकियों और पाक सेना के जवानों को मारने के हमारी सुरक्षा बलों के शौर्य पर उनकी वाहवाही करने के बजाय उन्हें सलाम करने के बजाय उसमें भी मीन मेख निकाल रही हैं।  इन्हें उसमें भी खतरा दिख रहा है, तो ऐसे लोग, जिन्हें देश में दुश्मनों पर की गई कार्रवाई में भी खतरा दिख रहा है, आतंकवाद को लेकर उठाए कड़े कदमों से जिनका जीना मुहाल  हो रहा है, उन पर यथोचित सख्ती करने की भी दरकार है। कोई भी व्यक्ति देश की एकता और अखण्डता से बड़ा नहीं है। देश के एकता अखण्डता को मजबूत करने और देश के  किसी भी कोने में शांति बहाल करने के मार्ग में जो भी कोई रोड़ा बने, उसके साथ देश विरोधी की तरह व्यवहार होना चाहिए। कारण कोई भी व्यक्ति ऐसा कुछ करे, जो देश के  दुश्मनों के उपयोग में आए, तो वह देश विरोधी है। अपने हर विधान के समय महबूबा मुफ्ती को यह ध्यान में रखना चाहिए। रही बात केंद्र सरकार की तो जो कुछ भी होना चाहिए,  वह शांति बहाल के लिए कर रही है। वह शत प्रतिशत सही है। जम्मू कश्मीर का जनमानस भी यही चाहता है कि एलओसी सहित पूरा जम्मू कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है, उसे  किसी भी हाल में वैसा होना चाहिए और देश के मुख्य प्रवाह में आना चाहिए और इसके लिए जो जरूरी हो, भारत सरकार करे और वह कर रही है । इसके इतर सोचने वाले और  अपनी दुकान चलाए रखने की मनसा वाले पाक परस्तों को इसे स्वीकार करना होगा, नहीं तो उन्हें भी पाक चले जाना चाहिए। कारण और कोई रास्ता नहीं है।

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