मुंबई में जापानी तकनीक से होगा वृक्षारोपण

मुंबई
मनपा क्षेत्र में 100 स्थानों पर जापानी तकनीक 'मियावाकी' पद्धति से शहरी वन विकसित करने का निर्णय मनपा के उद्यान विभाग ने लिया है। इसके तहत 60 स्थानों का चयन   कर लिया गया है, बचे हुए 40 स्थानों का नियोजन शीघ्र ही कर लिया जाएगा। 60 स्थानों पर शहरी वन विकसित करने के लिए जल्द ही निविदा जारी की जाएगी। निविदा शर्तों में  मियावाकी वन क्षेत्र के विशेषज्ञ संस्था का सहयोग लिया जाना अपेक्षित है। बचे हुए 40 स्थानों पर 'सीएसआर' अंतर्गत मियावाकी पद्धति से वन विकसित करने का लक्ष्य है।   विकसित किए जाने वाले वन क्षेत्र को खुला रखना संबंधित कंपनियों को अनिवार्य होगा।
महापालिका की तरफ से उद्यानों, मैदानों आदि के प्रस्ताव को लेकर तैयार की गई पॉलिसी से 'मियावाकी' पद्धति के वनों से किसी तरह का संबंध नहीं है,दोनों अलग-अलग विषय है।  यह जानकारी उद्यान अधीक्षक जितेंद्र परदेशी ने दी है। मनपा के उद्यान विभाग की तरफ से कहा गया है कि सामान्य उद्यानों एवं वनों की तुलना में मियावाकी पद्धति से विकसित   किए जाने वाले वनों के पेड़ अधिक तेजी से बढ़ते हैं। सामान्य पद्धति से लगाये गए पेड़ को बढ़ने में जितना समय लगता है, मियावाकी पद्धति से बहुत कम समय में पेड़ की उंचाई  उससे अधिक हो जाती है। जापानी टेक्निक के तहत पेड़ों के बीच अंतर कम होने से वन अधिक घने होते हैं । जिसको देखते हुए मनपा आयुक्त प्रवीणसिंह परदेशी के निर्देश पर  100 स्थानों पर 'मियावाकी' पद्धति से शहरी वन विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है । 60 स्थानों के लिय निविदा जारी की जा रही है, जबकि 40 स्थानों पर 'सीएसआर'  अंतर्गत  मियावाकी वने विकसित किया जाएगा। इसके लिए संस्थाओं एवं कंपनियों के आगे आने पर विचार किया जाएगा। मनपा की तरफ से कहा गया है कि 'सीएसआर' अंतर्गत मियावाकी  वन विकसित किया जाएगा। जगह एवं वन का मालिकाना अधिकार मनपा का ही होगा। सीएसआर अंतर्गत संबंधित कंपनी की तरफ से केवल मियावाकी पद्धति से वृक्षारोपण किया  जाएगा। वन की देखभाल एवं संरक्षण मनपा की तरफ से ही किया जाएगा। मियावाकी पद्धति से वृक्षारोपण मियावाकी विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में किया जाना आवश्यक होगा।
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