राज्य वक्फ न्यायाधिकरण की स्थापना

मुंबई
महाराष्ट्र तीन सदस्यीय राज्य वक्फ न्यायाधिकरण की स्थापना करने वाला देश का पहला राज्य बन गया है। सभी जिलों में संबंधितों को औरंगाबाद में सुनवाई के लिए जाना पड़ता  था, इससे उन्हें असुविधा होती थी, लेकिन अब त्रिसदस्यीय न्यायाधिकरण की स्थापना से नागरिकों की असुविधा दूर होगी। सरकार ने इस बात का ध्यान रखा है कि तीन सदस्यीय  न्यायाधिकरण के निर्णय से धार्मिक कार्य की जमीन का दुरुपयोग न हो। वक्फ संपत्ति का सर्वेक्षण अंतिम चरण में राज्य में वक्फ संपत्ति का दूसरा सर्वेक्षण पुणे और परभणी जिलों  में किया जा रहा है और यह काम अंतिम चरण में है।
प्रत्यक्ष अनुभव तथा निष्कर्ष के आधार पर बाकी बचे भागों का सर्वेक्षण किया जाएगा। संपत्ति की सुरक्षा के लिए तथा इस पर अतिक्रमण रोकने के लिए वक्फ संपत्ति का जमाबंदी  आयुक्त के मार्फत सर्वेक्षण शुरु है। वक्फ संपत्तियों में मस्जिदों, दरगाहों, कब्रिस्तानों, अनाथालयों आदि से जुड़ी अचल संपत्ति और मशरुतुल खिदमत इनाम भूमि शामिल होगी।  वक्फ संपत्तियों की जानकारी केंद्र सरकार द्वारा विकसित कंप्यूटर प्रणाली वक्फ मैनेजमेंट सिस्टम ऑफ इंडिया में दर्ज की जाएगी। सभी प्रासंगिक वक्फ संपत्तियों का प्रत्यक्ष दौरा  और रिकॉर्ड का निरीक्षण करके सर्वेक्षण किया जा रहा है। अल्पसंख्यक विकास मंत्री विनोद तावड़े ने इस बारे में कहा कि दूसरे सर्वेक्षण के लिए सभी जिलों के अतिरिक्त जिला अधिकारी को उनके संबंधित जिलों के लिए औकाफ के अतिरिक्त सर्वेक्षण आयुक्त के रूप में नियुक्त किया गया है और तालुका के तहसीलदार को संबंधित तालुकों के लिए सहायक  जिला आयुक्त के रूप में नियुक्त किया गया है।
अल्पसंख्यक विभाग के प्रधान सचिव श्याम तागडे ने कहा कि वर्ष 1997 से 2002 की अवधि में हुए सर्वेक्षण में 1 जनवरी 1996 को अस्तित्व में रहे मौजूदा वक्फ का सर्वेक्षण किया  गया था। दूसरा सर्वेक्षण में 1 जनवरी 1996 से 31 दिसंबर 2015 की अवधि में अस्तित्व में रही वक्फ संस्था और 31 दिसंबर 2015 को अस्तित्व में रहे तथापि पहले सर्वेक्षण में  शामिल नहीं हुई सभी वक्फ संपत्ति का सर्वेक्षण किया गया था।
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