पाक और उसकी हताशा उसके कुकर्मों का फल

एक अनुचित, अर्थहीन और अव्यहारिक द्विराष्ट्रवाद के सिद्धांत से उदभूत पाकिस्तान ने आग से खेलने का जो सिलसिला अपने जन्म से ही किया और सिर्फ हमारे द्वेष के बलबूते  अपने अस्तित्व को टिकाए रखने का प्रयास किया वह अब औंधे मुह गिर चुका है और उसकी सारे कुकर्म एक- एक करके सामने आ रहे हैं। उसके विदेश मंत्री का यह Žबयान की आज  पाक एकदम अकेला है उसके साथ कोई नहीं है। उस हताशा का परिचायक है, जिसमें पाक अपने आप पा रहा है। शीत युद्ध में वह जिन दो राष्ट्रों की कठपुतली था, उनमें से एक  यानी अमेरिका उससे बहुत पहले अपने पल्ले झाड़ चुका है और अपने स्वार्थों के लिए अंतर्राष्ट्रीय मान्यताओं को ताख पर रखने के लिए कुख्यात चीन भी अब उसको कितना झेलता है यह विवाद का विषय है। जिस तरह उसने हाफिज सइद के मुद्दे पर पाक को पीछे छोड़ दिया, कुछ वैसा ही रूख वह आज भी अख्तियाकर रहा है। यदि वैसा नहीं होता, तो हमारे  द्वारा अनुच्छेद 370 हटाने के बाद पाक के विदेश मंत्री के सबसे पहले वहां जाने के बाद वे ऐसे हताशा नहीं व्यक्त करते जैसा उनके बयानों से प्रकट हो रहा है। यह भारत के  राजनय का काल है कि कोई भी चाहेवह मुस्लिम राष्ट्र हो या पश्चिमी राष्ट्र या अफ्रीका के कोई देश कोई भी पाकिस्तान की पुकार नहीं सुन रहा है। कारण सब जानते हैं कि हमने  ऐसा कुछ नहीं किया और वह पाकिस्तान ही है, जो हमारे जम्मू- कश्मीर के एक हिस्से पर नाजायज काबिज है और वह ही प्रायोजक है उस हिंसा, खूनी खेल का, जिसके चलते वहां  तीन दशक से खून-खराबा हो रहा है। जबसे हमने उसके भाड़े के टट्टूओं पर और आतंकवादियों पर कड़ी कार्रवाई की है। तबसे स्थिति रोज सुधर रही है और अब जबकि उक्त अनुछेद  जो आतंकवाद और भ्रष्टाचार रोकने में सबसे बड़ी बाधा था इतिहास बन चुका है, वहां तेजी से शांति का माहौल बना रहा है। हमने कुछ भी किया है। अपने सीमा के अंदर किया है  और हमारा ध्येय वहां विकास की गंगा बहाना है और उन कश्मीर को मुख्यधारा में लाना है, जो इस आर्टिकल के चलते वहां मुख्यधारा में नहीं आ पाते थे और उन कश्मीरी पंडितों 
को पुन: घाटी में वैसे ही आŽबाद करना है, जो देश के विभिन्न शहरों में अपना घर-बार छोड़कर आज शरणार्थी के तौर पर रह रहे हैं और घाटी में किसी भी नेता उन्हें बसाने या  उनका दु:ख दर्द दूर करने का प्रयास नहीं किया। ऐसे लोग अब यह समझ लें कि भारत सरकार ने नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में वहां सही अर्थों में कश्मीरियत स्थापित करने का बीड़ा उठा  लिया है और सरकार के हर कदम, हर Žायान इस बात की गवाही दे रहे हैं कि सरकार की नियति वहां शुरू दशकों पुराने उपद्रव को समाप्त कर, वहां विकास की गंगा बहाने की है  इससे लिए हर कश्मीरी को वहां से बसाने और उनकी हर तरह से रक्षा, सहायता करने के लिए प्रतिबद्ध है और दुनिया इसे समझ रही है। इसलिए पाकिस्तान की गीदड़भभकी,  समर्थन जुटाने का प्रयास और आत्मघाती प्रतिबंध उसका ही नुकसान कर रहे हैं। उसे और अलग-थलग कर रहे हैं। पहले से ही दिवालिया उसकी अर्थव्यवस्था को और चौपट करते हुए  उसके निर्दोष रियाया की हालत और खराब कर रहे हैं और उनका जन जीवन दूभर कर रहे हैं। अभी भी पाक को यह समझ जाना चाहिए कि हमारे आंतरिक मामले में अपनी नाक  घुसाकर और अपना समय और पैसा बरबाद कर उसके हाथ कुछ नहीं लगेगा। अलबत्ता वह और तेजी से गर्त की ओर अग्रसर होगा। इसलिए आग से खेल हाथ जलाना बंद कर उसे  अपने माली हालत को सुधारने पर ध्यान देना चाहिए और तैयारी करनी चाहिए। पाक वह क्षेत्र भी दे दे। जिस पर उसका नाजायज कब्जा है। कारण उसे हम जल्दी से वापस लेंगे।

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