बदलाव और समाज

देश ने धूमधाम से 73वां स्वतंत्रता दिवस मनाया। अपने भाषण में प्रधानमंत्री ने स्वतंत्रता दिवस के अपन भाषण में अपनी सरकार की उपलब्धियों को रेखांकित करते हुए उन  सकारात्मक तब्दीलियों का यथोचित उल्लेख किया, जिनसे आज देश का चेहरा-मोहरा बदला नजर आ रहा है। आज उसकी पूरी दुनिया में एक नई धमक बन गई है। एक नई प्रतिष्ठा  प्राप्त हो रही है और यह सब तब हो रहा है, जब हम एक ओर चीन और पाक जैसे चिर शत्रुओं का सामना कर रहे हैं और दूसरी ओर देश के विकास के रथ को सर्वसमावेशी तरीके  से आगे बढ़ाते हुए हर मोर्चे पर उल्लेखनीय सफलता प्राप्त कर रहे हैं, जिससे अमेरिका जैसे विश्व शक्ति को भी रश्क होने लगा है और उसके राष्ट्रपति तो अब चीन के साथ हमें भी  विकासशील मानने को तैयार नहीं हैं। इसमें कोई दो राय नहीं कि प्रधानमंत्री की नजर देश और विदेश के कोने-कोने पर है और कैसे उसका उपयोग देश की आर्थिक, सामाजिक और  सामरिक, वैज्ञानिक प्रगति के लिए हो सकता है, इस पर है। इसके लिए कोई भी कड़ा से कड़ा कदम उठाने के लिए उनकी तैयारी है। बिना किसी दबाव का परवाह किए जो सही है  वह करने का मादा उन्हें अनूठा बनाता है और उनकी ऐसी शैली ने देश में एक ऐसे सकारात्मक बदलाव की शुरुआत की है, जो अब देश और दुनिया को दिखने लगा है। सत्ता की  प्राथमिकता मत बैंक की राजनीति नहीं है। देश के हर वर्ग का और देश का विकास है। देश को प्रगति के शिखर पर इतना ऊंचा पहुंचाना है, जिससे दुनिया उसकी आभा के सामने  चकाचौंध हो जाए और बौनी नजर आए। सिर्फ नारा ही नहीं दिया, जो सपना देखा उसकी योजना तैयार की और उसको अंजाम तक पहुंचाने का माद्दा भी दिखाया और ऐसा करते हुए  उन सभी राजनीतिक शक्तियों को जिसमें कांग्रेस,बसपा और तमाम समाजवादी दल शामिल हैं और जिन्होंने मत बैंक की राजनीति को, सत्ता की ही राजनीति को, अगड़ापिछड़ा और  अल्पसंख्यक परस्ती को, जातिवाद को ही देश सेवा मान लिया था को न सिर्फ झकझोर कर रख दिया, बल्कि इस कदर जनता के सामने रख दिया है कि उनमें से कइयों के अस्तित्व  पर प्रश्नचिन्ह लग गया है और कइयों का उठना असंभव नहीं, तो बहुत मुश्किल जरूर हुआ है। यह सब करते हुए मोदी सरकार ने जन भागीदारी को सर्वोच्च रखते हुए वह चाहे  सफाई की बात हो चाहे और कोई बात उसमें जन भागीदारी को सुनिश्चित करते हुए उसे जनआंदोलन की शब्ल दी है इससे देश की जनता का बहुमत भी उनका मुरीद और उन पर  लट्टू है। देश के लिए अभिशाप बनी गैर जिम्मेदार नौकरशाहों के उस वर्ग को भी झकझोरने का काम जो सत्तर साल में नहीं हुआ मोदी युग में हुआ और अब सही काम न करने वाले  अधिकारियों का क्या हाल होगा? यह सब जान गए हैं और अब उनके कामकाज में बदलाव दिख रहा है। जनता को दी जाने वाली सहायता अब सीधे उनके खातों में पहुंचती है।  संक्षेप में व्यवस्था से मतबैंक वालों का जाति और वर्ग का कार्ड खेलकर अपना और अपने परिवार और चाटुकारों का भला करने वालों का भट्ठा बैठ चुका है और आज राजनीति का  तौरतरीका और लक्ष्य बढ़ गया है। आज स्वहित और परिवार हित और चमचाहित से ऊपर देश हो गया है और हर वर्ग को चाहे वह किसान हो, ग्रामवासी उसे यह लग रहा है कि  सरकार उसकी सही तरह से चिंता कर रही है और देश की सीमा की रक्षा हो या आतंकवाद से देश की सुरक्षा की बात हो या देश के जन-जन का विकास हो, हर मोर्चे पर भी  सफलता पूर्वक काम कर रही है और यही बदलाव की बात आज प्रधानमंत्री ने लाल किले से रखांकित की और उसके साथ ही आवाहन किया कि देश के हर जन को राष्ट्र निर्माण के  इस कार्य में आगे आना होगा। उसी तरह से अपने दायित्वों को निभान होगा कि देश का विकास का पहिया तब तक तेज गति से चलता रहे जब तक हम इस पर आसीन होकर एक  पूर्ण विकसति राष्ट्र की तरह अपना कार्य और व्यवहार नहीं करने लगते कोई भी ऐसा कार्य बिना जनभागीदारी की वह सफलत नहीं प्राप्त कर सकता, जिसकी दरकार है, तो आइए  संकल्प लें कि हर तरह से सरकार के साथ कदम से कदम मिलाकर चलने की और भारत को विश्वशक्ति बनाने के सपने को साकार करें।

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