हर हाल में इंसाफ सुनिश्चित हो

उत्तर प्रदेश के उन्नाव में बलात्कार पीड़ित युवती के साथ जिस तरह के वाकए हो रहे हैं, उससे जाहिर है कि इंसाफ की राह में किस-किस तरह की अड़चनें पैदा की जा सकती हैं।  इससे बड़ी विडंबना और क्या हो सकती है कि एक तरफ बलात्कार के बाद युवती हर स्तर पर न्याय की गुहार लगा रही थी और दूसरी तरफ परिवार सहित उसे बेहद त्रासद हालात  का सामना करना पड़ रहा था। आरोपी विधायक की ओर से लगातार मिलने वाली धमकियों के बाद हाल ही में थक कर युवती ने सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिख कर  मदद की गुहार लगाई थी, लेकिन चार दिन पहले जब कथित हादसे में उसके परिवार की दो महिलाएं मारी गईं और वह खुद बुरी तरह घायल होकर मौत से लड़ रही है, तब जाकर  संबंधित पक्षों की सक्रियता दिख रही है। मामले के तूल पकड़ने के बाद अब केंद्र सरकार ने इस हादसे की जांच सीबीआई को सौंप दी है, जिसने आरोपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर  और अन्य दस लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है।
गौरतलब है कि पीड़िता जिस कार में सवार थी, उसे रायबरेली जाते हुए जिस ट्रक ने टक्कर मारी थी, उसकी नंबर प्लेट काले रंग से पुती होने और पीड़िता की सुरक्षा में तैनात  पुलिसकर्मियों के न होने का ब्योरा सामने आया है। इससे यह शक स्वाभाविक है कि इसके पीछे साजिश हो सकती है, लेकिन हैरानी की बात है कि शुरुआती तौर पर पुलिस की ओर  से इसे एक सामान्य हादसे के रूप में ही पेश करने की कोशिश की गई, जबकि युवती के खिलाफ होने वाले अत्याचार से लेकर अब तक जो भी हालात सामने रहे हैं, उनसे साफ है  कि उसके लिए इंसाफ के रास्ते में बड़ी बाधाएं खड़ी करने की कोशिश हो रही है। इससे पहले भी इस प्रकरण में पुलिस के नर्म रुख अख्तियार करने के आरोप लग चुके हैं। ऐसे में स्वाभाविक ही विपक्षी दल आरोपी को संरक्षण देने और उसे बचाने की कोशिश के आरोप लगा रहे हैं। इससे पहले जब युवती ने अपने बलात्कार का मामला सार्वजनिक किया था और  प्रशासन से आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी, तब पुलिस ने न केवल उचित कदम नहीं उठाए, बल्कि उसके पिता को हिरासत में ले लिया था, जहां उनकी मौत हो गई।  इस मामले में भी पुलिस पर यातना देने के आरोप लगे थे। अफसोसनाक यह है कि निराशा में जब युवती ने मदद की उम्मीद में सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई को  पत्र लिखा, तो वह भी समय पर सही जगह नहीं पहुंच सका। अंदाजा लगाया जा सकता है कि अगर पीड़ित कमजोर पृष्ठभूमि से हो तो उसके लिए इंसाफ की राह में किस-किस तरह  की अड़चनें सामने आ सकती हैं। स्वाभाविक ही मामले के संज्ञान में आने के बाद मुख्य न्यायाधीश ने नाराजगी जताते हुए सुप्रीम कोर्ट के महासचिव से पूछा कि शीर्ष अदालत के  नाम लिखी गई चिठ्ठी उनके सामने अब तक क्यों पेश नहीं की गई। इस समूचे मामले में पीड़िता और उसके परिवार को तकलीफ देह त्रासदी का सामना करना पड़ रहा है और इतना  तय है कि इंसाफ की राह में इस मामले को एक कसौटी की तरह देखा जाएगा।

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