पीओके भी हमारा है

नई दिल्ली
विदेश मंत्रालय ने जम्मू-कश्मीर के मसले पर पाकिस्तान की बौखलाहटों पर कहा है कि पड़ोसी देश इसलिए परेशान है कि अब उसे आतंकवाद का प्रसार करने में मदद नहीं मिलेगी।   कश्मीर मुद्दे पर संयुक्त राष्ट्र में जाने की पाकिस्तान की धमकी पर विदेश मंत्रालय ने कहा कि पीओके भी हमारा है और हमारे आंतरिक मामले को यूएन में उठाने का पाकिस्तान के  पास कोई आधार ही नहीं है।

डर का माहौल फैलाना चाहता है पाकिस्तान
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने शुक्रवार को कहा कि यह पूरी तरह से भारत का आंतरिक मामला है और पाकिस्तान डर का माहौल फैलाना चाहता है। कुमार ने कहा कि  पाकिस्तान इसलिए परेशान है कि अगर जम्मू और कश्मीर का विकास हुआ, तो वह वहां के लोगों को गुमराह नहीं कर पाएगा। पाकिस्तान को भारत के आंतरिक मामलों में दखल न  देने की नसीहत देते हुए कुमार ने कहा कि भारत के संप्रभु मामले में बेवजह के विषयों को पाकिस्तान जोड़  रहा है। हमने कई विदेशी सरकारों और संस्थानों को इस संबंध में बताया  है और अपनी स्थिति से अवगत कराया है। हमने बताया है कि कश्मीर में हमने क्या किया है और यह हमारा आंतरिक मामला है। हमने सभी देशों और संगठनों को इस बारे में  जानकारी दी है। पाकिस्तान को हकीकत को स्वीकार करना चाहिए और अन्य देशों के मामलों में दखल नहीं देना चाहिए। कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान के संयुक्त राष्ट्र में जाने के  धमकी पर रवीश कुमार ने कहा कि हमारे आंतरिक मामले को संयुक्त राष्ट्र में उठाने का उसे अधिकार ही नहीं है। पीओके भी हमारा हिस्सा है। जब उनसे पूछा गया कि पाकिस्तान अगर यूएन में जाता है, तो क्या भारत वहां पीओके और वहां के लोगों पर अत्याचार का मुद्दा उठाएगा, तो कुमार ने कहा कि यह स्ट्रैटिजी सार्वजनिक तौर पर शेयर नहीं की जा   सकती। उन्होंने कहा कि मुझे नहीं लगता कि पाकिस्तान के पास हमारे आंतरिक मामले को संयुक्त राष्ट्र में उठाने का कोई अधिकार है।

370 पर फैसला कश्मीर के हित में
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने आर्टिकल 370 पर सरकार द्वारा लिए गए फैसले को जम्मू और कश्मीर के हित में बताया। उन्होंने पाकिस्तान द्वारा भारत के साथ राजनयिक संबंधों  को घटाने, व्यापार और समझौता एम्सप्रेस बंद करने को एकतरफा फैसला करार दिया और उससे इस पर पुनर्विचार की अपील की। उन्होंने कहा कि हम उनसे इसकी सिर्फ गुजारिश  कर सकते हैं।

इस्लामिक देशों ने भारत के पक्ष को सही समझा
आर्टिकल 370 पर भारत सरकार के फैसले पर इस्लामिक देशों की प्रतिक्रिया से जुड़े सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि पिछले 5 सालों में या हालिया वर्षों में हमारा इस्लामिक देशों   से इंगेजमेंट काफी रहा। खुद प्रधानमंत्री ने इंगेजमेंट का नेतृत्व किया, कई देशों का दौरा किया। इस्लामिक देशों ने भारत के पक्ष को सही से समझा है और जब हम कहते हैं कि यह  हमारा आंतरिक मामला है, तो उन्हें समझना चाहिए। कुलभूषण जाधव मामले पर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि हम उनसे (पाकिस्तान से) लगातार बातचीत कर रहे हैं,

डिप्लोमैटिक चैनल ओपन हैं।
भारत ने जम्मू-कश्मीर को लेकर जो फैसला लिया है उससे सबसे ज्यादा दिक्कत पाकिस्तान को हो रही है। पाकिस्तान लगातार कुछ ऐसे फैसले ले रहा है, जो उसकी बौखलाहट को   दिखा रहा है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने पाकिस्तान के मसले पर प्रेस कॉन्फ्रेंस की। उन्होंने कहा कि भारत ने दुनिया के सामने अपनी स्थिति बता दी है कि हमने जो   भी फैसला लिया है, वह हमारा आंतरिक मामला है। पाकिस्तान जो अभी कदम उठा रहा है, वह उसकी बौखलाहट है। पाकिस्तान के एयरस्पेस बंद करने की खबर पर रवीश कुमार ने  कहा कि इसको लेकर पाकिस्तान ने खुद ही सफाई दे दी है। एयरस्पेस को बंद नहीं किया गया है, बल्कि उसके कुछ रुट में बदलाव किया गया है। पाकिस्तान जो भी फैसले ले रहा है, हमने उनसे उन फैसलों पर विचार करने को कहा है। वो सिर्फ ये फैसले इसलिए ले रहा है, ताकि दुनिया को इस ओर आकर्षित कर सके। पाकिस्तान के द्वारा दुनिया के सामने  इस मुद्दे को उठाए जाने पर रवीश कुमार ने कहा कि पाकिस्तान को हर मंच पर जवाब मिलेगा। हमने दुनिया के सभी देशों से कह दिया है कि ये हमारा आंतरिक मामला है, ऐसे में  इसमें किसी को कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए। पाकिस्तान को इस वक्त अपने देश के विकास पर ध्यान देना चाहिए और क्रॉस बॉर्डर आतंकवाद पर रोक लगानी चाहिए। पाकिस्तान  के द्वारा भारत के उच्चायुब्त अजय बिसारिया को वापस भेजने को लेकर रवीश कुमार ने कहा कि अभी वह दिल्ली में नहीं हैं, क्योंकि हमने पाकिस्तान को उसके फैसले पर विचार  करने को कहा है।
इस बीच अमेरिका ने स्पष्ट कर दिया है कि वह कश्मीर मुद्दे पर भारत के साथ है। साथ ही उसने पाकिस्तान से स्पष्ट कहा है कि वह खुद पर कंट्रोल रखे और ऐसी कोई हरकत न  करे जिससे इलाके की शांति भंग हो। अमेरिका के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मॉर्गन ऑर्टेगस ने शुक्रवार को कहा कि ट्रंप प्रशासन ने कश्मीर नीति में कोई बदलाव नहीं किया है।  साथ ही उन्होंने मौजूदा माहौल में भारत-पाकिस्तान को संयम बरतने की हिदायत भी दी।

यूएन महासचिव ने दिलाई शिमला समझौते की याद
जम्मू-कश्मीर को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़ती तल्ख़ी के दौरान संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने दोनों देशों से इस मुद्दे पर 'अधिकतम संयम' दिखाने की  अपील की है. महासचिव गुटेरेस ने इस मुद्दे के समाधान के लिए साल 1972 में हुए 'शिमला समझौते' की याद भी दिलाई है। भारत भी जम्मू- कश्मीर के मुद्दे का समाधान शिमला  समझौते के तहत तलाशने की हिमायत करता रहा है।

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