अर्थव्यवस्था मे जल्द आयेगी तेजी

मुंबई
रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने बुधवार को कर्ज सस्ता होने और सरकार की तरफ से संभवत: और कदम उठाए जाने से आर्थिक वृद्धि में जल्द तेजी आने का भरोसा  जताया। उन्होंने यह भी कहा कि अर्थव्यवस्था में दिख रही नरमी बुनियादी कारणों से नहीं है, बल्कि यह चक्रीय कारणों से है। उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार सुस्त पड़ रही आर्थिक  वृद्धि को गति देने के लिए और कदम उठाएगी। मार्च तिमाही में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर पांच साल के न्यूनतम स्तर 5.8 प्रतिशत रही और जून तिमाही में इसमें  और गिरावट की आशंका है। मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने 2019-20 की आर्थिक वृद्धि दर के जून में लगाए गए 7 प्रतिशत के अनुमान को घटाकर 6.9 प्रतिशत कर दिया। इस  बारे में दास ने साफ किया कि वृद्धि दर का अनुमान कम किया गया है, लेकिन यह गिरावट के जोखिम के साथ नहीं है। एमपीसी के नीतिगत दर में कटौती के बाद संवाददाताओं से  बातचीत में दास ने कहा कि आरबीआई की समझ है कि वृद्धि दर में नरमी इसके चक्रीय प्रभाव की वजह से है, बुनियादी वजह नहीं है। उन्होंने दूसरी छमाही में वृद्धि में तेजी की  उम्मीद जताई। मौद्रिक नीति समिति ने फरवरी से लगातार चौथी बार रेपो दर 0.35 प्रतिशत घटाकर 5.40 प्रतिशत कर दी है। दास ने नीतिगत दर में कटौती लाभ ग्राहकों को दिए  जाने पर संतोष जताया और कर्ज में वृद्धि की उम्मीद जताई जिससे वृद्धि को गति मिलेगी। आरबीआई गवर्नर के अनुसार इस बार नीतिगत दर में अधिक कटौती से केंद्रीय बैंक को  उम्मीद है कि बैंक आने वाले सप्ताहों में कर्ज की Žयाज दर में कटौती करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि फरवरी से जो कटौती की गई है, मुद्रा बाजार उसका पूरा उपयोग कर चुका है। दास ने कहा कि मौद्रिक नीति को नरम बनाने से आने वाले समय में आर्थिक गतिविधियों को गति मिलने की उम्मीद है। उन्होंने बैंकों द्वारा उच्च Žयाज दर बरकरार रखने को लेकर   साठगांठ की धारणा को खारिज कर दिया। देश के सबसे बड़े बैंक एसबीआई ने इस मामले में पिछले महीने अगुवाई की और दूसरे बैंक भी उसका अनुकरण करेंगे। दास ने कहा कि  सरकार और आरबीआई वृद्धि प्रक्रिया को गति देने के लिए हर संभव कदम उठा रहे हैं। हालांकि, उन्होंने तुंरत कहा कि एमपीसी का निर्णय स्वतंत्र है। उन्होंने कहा कि केंद्रीय बैंक  वृद्धि को आगे बढ़ाने के लिए यह सुनिश्चित करेगा कि अर्थव्यवस्था में पर्याप्त नकदी उपलब्ध हो। उन्होंने नकद आरक्षित अनुपात (सीआरआर) में फिलहाल कटौती से इंकार किया।  दास ने सरकार के विदेशों से धन जुटाने के लिए सरकारी बांड जारी करने के बारे में आरबीआई की राय बताने से इंकार कर दिया। उन्होंने कहा कि इस बारे में आंतरिक रूप से उच्च  स्तर पर राय दे दी गई है। एनबीएफसी क्षेत्र के बारे में उन्होंने कहा कि आरबीआई का यह सुनिश्चित करने का प्रयास है कि कोई महत्वपूर्ण गैरबैंकिंग वित्तीय कंपनी (एनबीएफसी)   अलग-थलग नहीं रह जाए।
Labels:

Post a Comment

[blogger]

MKRdezign

Contact Form

Name

Email *

Message *

Powered by Blogger.
Javascript DisablePlease Enable Javascript To See All Widget