'आयकर विवादों में मौद्रिक सीमा बढ़ाने से मुकदमेबाजी में आएगी कमी'

नई दिल्ली
वित्त मंत्रालय ने आयकर विभाग के वास्ते कर विवादों को लेकर अपीलीय न्यायाधिकरण से लेकर उच्चतम न्यायालय तक विभिन्न मंचों में  अपील दायर करने के मामलों में विवादित राशि की सीमा बढ़ा दी है। अब बढ़ी हुई राशि के मुताबिक ही विभाग मामले दायर कर सकेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे कर विवादों को लेकर मुकदमेबाजी में कमी  आएगी और प्रस्तावित प्रत्यक्ष कर संहिता को अपनाने में आसानी होगी। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण में विभाग की ओर से अपील करने की  मौद्रिक सीमा को 20 लाख रुपए से बढ़ाकर 50 लाख रुपए कर दिया है। यानी अब अपीलीय न्यायाधिकरण में आयकर विभाग उन्हीं मामलों में अपील दायर कर सकेगा, जिनमें  विवादित कर मांग 50 लाख रुपए अथवा उससे अधिक है। इससे कम राशि की संलिप्तता वाले मामले में अपील नहीं हो सकेगी। वहीं, उच्च न्यायालय के मामले में यह सीमा दोगुनी  बढ़ाकर एक करोड़ रुपए कर दी गई है। जहां तक उच्चतम न्यायालय की बात है उसमें अपील दायर करने के लिए कर विवादित वाले मामलों की सीमा एक करोड़ रुपए से बढ़ाकर दो  करोड़ रुपए कर दी गई है। एक साल के भीतर मौद्रिक सीमा में यह दूसरी बढ़ोत्तरी है। लक्ष्मीकुमारन एंड श्रीधरन अटॉर्नीज में पार्टनर एस. वासुदेवन ने कहा कि सीबीडीटी ने एक बार  फिर से कर विभाग द्वारा न्यायाधिकरण, उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय में अपील दायर करने की मौद्रिक सीमा बढ़ा दी है।
इससे अदालतों में भीड़ कम करने में मदद मिलेगी तथा आयकर विभाग को अधिक मूल्य वाले जटिल मामलों पर ध्यान केंद्रित करने में भी मदद मिलेगी। मौजूदा आयकर कानून के  तहत लंबित मामलों में कमी आने से नई प्रत्यक्ष कर संहिता को अपनाए जाने का रास्ता भी सरल होगा। पीडŽल्यूसी इंडिया में पार्टनर एंड लीडर (कॉरपोरेट एवं अंतर्राष्ट्रीय कर) फ्रैंक  डिसूजा ने कहा कि यह स्वागतयोग्य कदम है। उन्होंने कहा कि कर प्रशासन ने जो सीम बढ़ाई है यह उसके पिछले चार- पांच साल के दौरान किए जा रहे उपायों के अनुरूप है।  प्रशासन को विवादों को वापस लेने की योजना पर भी गंभीरता के साथ विचार करना चाहिए। हाल में अप्रत्यक्ष करों के क्षेत्र में इस तरह की योजना पेश की गई थी, इसी तरह की  योजना प्रत्यक्ष कर मामले में भी लाई जा सकती है।
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