मध्यस्तता बेनतीजा

नई दिल्ली
राजनीतिक रूप से संवेदनशील रामजन्मभूमिबाबरी मस्जिद जमीन विवाद मामले में मध्यस्थता की कोशिश असफल रहने के बाद अब सुप्रीम कोर्ट में 6 अगस्त से खुली अदालत में  रोज सुनवाई होगी। पैनल की रिपोर्ट पेश होने के बाद शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने यह आदेश दिया। मध्यस्थता पैनल में सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज कलीफुल्ला, आध्यात्मिक गुरु श्रीश्री  रविशंकर और वरिष्ठ वकील श्रीराम पंचू शामिल थे। मध्यस्थता की यह कोशिश पूरे 155 दिनों तक चली। कोर्ट ने रजिस्ट्री से कहा है कि वह अनुवाद सहित सभी जरूरी दस्तावेज  तैयार कर ले, जिससे रोजाना होने वाली सुनवाई में कोई बाधा न आए।

तेज सुनवाई करेगा सुप्रीम कोर्ट
चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने कहा कि मध्यस्थता पैनल समाधान निकालने में कामयाब नहीं हो पाया और अब रोजाना सुनवाई शुरू होगी। वास्तव में संविधान पीठ सप्ताह में तीन  दिन मंगलवार से गुरुवार तक सुनवाई करेगी, क्योंकि पीठ बाकी के दो दिन दूसरे मामले देखती है। ऐसे में अयोध्या पर रोजाना सुनवाई हब्ते के तीन दिन होगी। इससे साफ है कि  सभी पक्षों की दलीलें जल्द पूरी होंगी और चीफ जस्टिस के रिटायरमेंट से पहले मामले का समाधान निकल सकता है। पांच जजों की संविधान पीठ इस मामले की सुनवाई  कर रही  है, जिसमें जस्टिस एसए बोबडे, डीवाई चंद्रचूड़, अशोक भूषण और एस. अब्दुल नजीर भी शामिल हैं। मध्यस्थता पैनल ने गुरुवार को पेश अपनी रिपोर्ट में कहा था कि हिंदू और  मुस्लिम पार्टियां इस विवाद का समाधान निकालने में सफल नहीं रहीं। निर्मोही अखाड़े और रामलला विराजमान का केस पहले शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट के बाहर हिंदू महासभा के वकील विष्णु शंकर जैन ने कहा कि उन्होंने पहले ही मांग की थी कि इस मामले का हल मध्यस्थता के जरिए नहीं निकल सकता है और इसके लिए रोजाना सुनवाई होनी चाहिए।  जैन ने कहा कि आज खुशी का दिन है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई की रूपरेखा भी तय कर दी है।

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