मालाड-मार्वे, बोरीवली-गोराई रोप-वे परियोजना को मिली मंजूरी

मुंबई
पश्चिमी उपनगर में यातयात सुविधा बेहतर करने के लिए मालाड से मार्वे और बोरिवली से गोराई गांव के बीच प्रस्तावित दो रोपवे परियोजना को राज्य सरकार की तरफ से मंजूरी  मिल गयी है। दोनों परियोजनाओं को सार्वजनिक-प्राइवेट (पीपीपी) मॉडल से तैयार किया जाएगा। केंद्र की एक संस्था को परियोजना का पूरा खाका तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई  है। जबकि इस परियोजना के निर्माण कार्य की जिम्मेदारी एमएमआरडीए की होगी। सरकार ने इसके लिए एमएमआरडीए को किसी मंजूरी का इंतजार न करते हुए काम शुरू करने  का निर्देश दिया है। पश्चिमी उपनगर में ट्रैफिक जाम की समस्या के समाधान के लिए 'एमएमआरडीए' ने रोपवे का प्रस्ताव तैयार किया है। मालाड से मार्वे 4.5 किलोमीटर व बोरिवली से गोराई गांव के बीच 4.5 किमी के दो रोपवे बनाए जाएंगे। इंडियन पोर्ट रेल और रोपवे कॉर्पोरेशन लिमिटेड नामक केंद्र सरकार की इस संस्था को रोपवे बनाने में महारथ  हासिल है। यह संस्था पहले सप्तश्रृंगी से हट्टी के बीच रोपवे बनाने का आवश्यक प्रारूप तैयार कर रही है। इस संस्था के साथ सामंजस्य करार कर संस्था को सलाहकार नियुक्त किया जाएगा।

मेट्रो से जुड़ेगा रोपवे
मालाड से मार्वे इस रोपवे को मेट्रो मार्ग-2 के मालाड मेट्रो व मार्वे इन दो स्टेशनों से जोड़ा जाएगा। इसी तरह बोरिवली से गोराई रोपवे को बोरिवली उपनगरीय स्टेशन और मेट्रो मार्ग- 2 ए स्टेशन व गोराई जेट्टी से जोड़ा जाएगा। शहरी यातायात को मेट्रो व उपनगरीय रेलवे स्टेशन से आगे जोड़ने में रोपवे काफी मददगार साबित होगा। रोपवे से  प्रत्येक दिन हर घंटे  चार से 5 हजार यात्री सफ़र कर सकते हैं। मालाड-मार्वे और बोरिवली-गोराई रोपवे पश्चिमी उपनगर के रहिवासियों के लिए काफी फायदेमंद होगा। साथ ही लोगों को सार्वजनिक  यातायात का एक विकल्प मिल जाएगा।

मुंबई-एलिफंटा रोपवे
जल्द ही, मुंबईकर एलिंफेंटा की गुफाओं तक हाजी बंदर से 14 मिनट में पहुंच सकेंगे। केंद्र सरकार की समिति ने 8 किमी लंबे मुंबई-एलिफंटा रोपवे के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।  मुंबई पोर्ट ट्रस्ट (एमबीपीटी) का मानना है कि यह परियोजना पर्यटन को बढ़ावा दे रही है। फिलहाल मौजूदा समय में हाजी बंदर से एलिफेंटा गुफाओं तक जाने के लिए एक घंटे का  समय लगता है, जो इस रोप सेवा के बनने का बाद सिर्फ 14 मिनट ही लेगा। इस परियोजना का काम अगस्त 2019 से शुरु किया जाएगा और अक्टूबर 2022 तक पूरा होने की  उम्मीद है। टर्मिनल के निर्माण के लिए लगभग 10,000 वर्गमीटर जमीन दी जाएगी।

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