उन्नाव कांड मे ’सुप्रिम’ न्याय

सात दिन में जांच 45 दिन में फैसला


लखनऊ
भाजपा ने उन्नाव के बांगरमऊ से विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को पार्टी से बर्खास्त कर दिया है। भाजपा ने पहले कुलदीप सिंह को निलंबित किया था, लेकिन दुष्कर्म पीड़िता के साथ  हुए सड़क हादसे के बाद पार्टी ने विधायक सेंगर को बाहर का रास्ता दिखाया है। दुष्कर्म के आरोप में कुलदीप सिंह सेंगर फिलहाल सीतापुर जेल में बंद हैं। कुलदीप सिंह सेंगर को अब  प्रयागराज या फतेहगढ़ जेल भेजने की भी तैयारी की जा रही है। इस मामले के साथ ही अब रायबरेली में पीड़िता के सड़क दुर्घटना में घायल होने की सीबीआई जांच हो रही है।  उन्नाव रेप पीड़िता मामले में सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को बेहद सफ्त रुख अपनाते हुए इस केस से जुड़े सभी पांच मामलों को दिल्ली ट्रांसफर कर दिया। सड़क हादसे की छानबीन भी  एक हफ्ते के अंदर पूरी करने का आदेश दिया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने इसके साथ ही केस की रोजाना सुनवाई करते हुए फैसले के लिए 45 दिन की डेडलाइन भी तय कर दी है। कोर्ट  ने उत्तर प्रदेश सरकार से कहा कि वह पीड़िता के परिजनों को 25 लाख रुपए का मुआवजा भी दे। सुप्रीम कोर्ट ने इसके साथ ही पीड़िता और गवाहों को सुरक्षा देने का आदेश दिया।  कोर्ट ने कहा कि तत्काल प्रभाव से सीआरपीएफ पीड़ित परिवार को सुरक्षा मुहैया कराएगी। पीड़ित के चाचा को रायबरेली से तिहाड़ ट्रांसफर करने का आदेश भी दिया गया है।

सीबीआई की ज्वाइंट डायरेक्टर से कई सवाल
सुप्रीम कोर्ट गुरुवार को दिनभर उन्नाव मामले पर ऐक्टिव रहा। कोर्ट ने गंभीर रूप से घायल पीड़िता के स्वास्थ्य के प्रति गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कई सवाल किए। मामले
पर सुनवाई के दौरान सीजेआई रंजन गोगोई की अगुआई वाली तीन जजों की बेंच ने कहा कि वह इस मामले को जल्द से जल्द रफा-दफा करना चाहती है। कोर्ट ने तलब की गईं  सीबीआई की ज्वाइंट डायरेक्टर संपत मीणा से पीड़िता की पिता की हिरासत में हुई मौत को लेकर भी कई कड़े सवाल किए।

...तो एम्स में कराया जाए पीड़िता का इलाज
सुप्रीम कोर्ट पीड़िता के स्वास्थ्य को लेकर काफी चिंतित नजर आया। सीजेआई ने पीड़िता के स्वास्थ्य के प्रति चिंता जाहिर करते हुए अच्छे इलाज के लिए एम्स शिफ्ट करने की मंशा जताई। उन्होंने कहा, 'डॉक्टर्स सबसे अच्छे जज हैं। वही बता सकते हैं कि क्या पीड़िता और उनके वकील को दिल्ली एयरलिफ्ट किया जा सकता है या नहीं? सुप्रीम कोर्ट ने  सुनवाई के दौरान मौजूद सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से पूछा कि पीड़िता का स्वास्थ्य अभी कैसा है? इस पर मेहता ने बताया कि वह वेंटिलेटर पर है। फिर जजों ने पूछा कि  क्या उन्हें (पीड़िता को) शिफ्ट किया जा सकता है? इस पर सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि वह कुछ कह नहीं सकते। कोर्ट ने इसके बाद मेडिकल रिपोर्ट तलब की। इसके बाद दोपहर  बाद जब फिर सुनवाई हुई, तो सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पीड़िता की मेडिकल रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को दी। सुप्रीम कोर्ट को हॉस्पिटल ने बताया कि पीड़िता और उनके वकील  को एयरलिफ्ट किया जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर पीड़िता का परिवार चाहे, तो हम एयरलिफ्ट करने का आदेश दे सकते हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने पूछे सवाल पर सवाल
सीजेआई रंजन गोगोई, जस्टिस दीपक गुप्ता और जस्टिस ए बोस की बेंच ने सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल को कहा कि इस मामले को जल्द खत्म करना चाहते हैं, आप  कितने दिनों में स्टेटस रिपोर्ट सौंप देंगे? इस सवाल पर सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि एक महीना तो लग जाएगा। इस पर जजों ने कहा कि नहीं, 7 दिनों में स्टेटस रिपोर्ट आ जानी  चाहिए। जैसे भी हो, हम इसे 7 दिनों में खत्म करना चाहते हैं। खुद सीजेआई ने उनसे पूछा कि क्या आर्म्स ऐक्ट में पीड़िता के पिता की गिरफ्तारी हुई थी? क्या पीड़िता के पिता  की मौत हिरासत में हुई थी? हिरासत में लिए जाने के कितने देर बाद उनकी मौत हुई थी?

दुष्कर्म पीड़िता की सुरक्षा में तैनात रहे तीनों पुलिस कर्मी निलंबित
दुष्कर्म पीड़िता की कार से हुए हादसे के बाद जिन पुलिस कर्मियों को एसपी सहित डीजीपी ने फ्लीन चिट दे दी थी, उनको निलंबित कर दिया गया। पीड़िता की सुरक्षा में तैनात सुरक्षा कर्मियों में कांस्टेबल सुदेश कुमार (गनर), महिला आरक्षी रूबी पटेल व सुनीता देवी को पीड़िता की सुरक्षा ड्यूटी से अनुपस्थित होने के चलते निलंबित किया गया है। हादसे के  दूसरे दिन तक पुलिस अधिकारी ये कहते हुए तीनों का बचाव करते रहे कि पीड़िता ने खुद उन सभी को कार में जगह न होने की बात बोल कर ले जाने से इंकार कर दिया था।  हालांकि प्रतिसार निरीक्षक (आरआई) द्वारा ये खुलासा किया गया था कि सुरक्षा में तैनात किसी सुरक्षा कर्मी द्वारा ये सूचना नहीं दी गई कि पीड़िता ने उनको साथ ले जाने से मना कर दिया था।

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