निर्यातकों को सब्सिडी के दायरे से निकाले बाहर'

नई दिल्ली
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने निर्यातकों से साफ-साफ कहा है कि उन्हें सरकार से सब्सिडी की उम्मीद नहीं करना चाहिए। हालांकि सरकार अन्य सभी प्रकार से निर्यातकों  की मदद को तैयार है। निर्यातकों के साथ एक कार्यक्रम में गोयल ने कहा कि अमेरिका एवं चीन के बीच के टैरिफ वार का फायदा उठाने के लिए सरकार निर्यातकों को हर संभव  मदद देगी।

'तय है भारतीय अर्थव्यवस्था का पांच ट्रिलियन डॉलर का होना'

गोयल ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था को पांच ट्रिलियन डॉलर का होना तय है और निर्यात को एक ट्रिलियन डॉलर के स्तर तक पहुंचना है। गोयल ने उद्योग को आश्वासन दिया  कि एमईआईएस को वापस ले लिया जाएगा, लेकिन इसे डब्ल्यूटीओ की आरओएससीटीएल योजना से बदल दिया जाएगा, जो पहले से ही अपैरल और मेडअप को मिल रहा है। उन्होंने   उद्योग से आग्रह किया कि वहआरओएससीटीएल के माध्यम से सभी अप्रत्यक्ष करों और उपकर की छूट प्राप्त करने के लिए डेटा एकत्र करे, जिसमें बिजली, कोयला उपकर और  खनन पर दी जाने वाली रॉयल्टी शामिल है।

सरकार कर रही है एफटीए की समीक्षा
मंत्री ने कहा कि सरकार सभी मौजूदा एफटीए की समीक्षा कर रही है ताकि निर्यात के साथ-साथ विनिर्माण पर उनके प्रभाव का आकलन किया जा सके। इसके अलावा, आगे की नई  बातचीत के दौरान उनके एजेंडा में उद्योग और उपभोक्ता हित सबसे ऊपर होगा। उन्होंने आश्वासन दिया कि ऋण की लागत और ऋण की उपल धता के संबंध में उद्योग की  चिंताओं पर आरबीआई और बैंकों के साथ विचारविमर्श किया जा रहा है, ताकि उन्हें दूर किया जा सके। उन्होंने उद्योग को सरकार के साथ मिलकर काम करने का आग्रह किया,  ताकि वैश्विक निर्यात में भारत की 2 फीसदी से भी कम की हिस्सेदारी को 5 फीसदी तक किया जा सके।

भारत अपने निर्यात में कर सकता है बढ़ोतरी
टैरिफ युद्ध से निकलने वाले अवसर को भुनाने के लिए फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गेनाइजेशन (फियो) ने भारत सरकार के वाणिज्य विभाग के साथ मिलकर अमेरिका एवं  चीन में भारतीय निर्यात को बढ़ाने के लिए स्टेकहोल्डर्स के साथ परामर्श कार्यक्रम का आयोजन किया। फियो ने इस बात पर प्रकाश डाला कि टैरिफ युद्ध ने अमेरिका और चीन में  भारतीय निर्यात की गहरी पैठ और विस्तार के लिए बड़ा अवसर खोला है। भारत अपने निर्यात में आसानी से 10-12 अरब डॉलर की बढ़ोतरी कर सकता है, लेकिन इस काम के  लिए प्रतिस्पर्धा क्षमता को बरकरार रखने के साथ उत्पादन क्षमता में बढ़ोतरी करना जरूरी होगा, ताकि इन बाजार से निकलने वाली मांग की पूर्ति आसानी से की जा सके।
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