आसमान पर सब्जियों की कीमत

मुंबई
महाराष्ट्र के करीब 750 सौ गांव बाढ़ की चपेट में हैं और अपने नजदीकी शहरों से कट चुके हैं। यहां फंसे तकरीबन साढ़े चार लाख लोगों को सरकार ने सकुशल तो निकाल लिया  लेकिन डेढ़ लाख हेक्टेयर में बर्बाद हुई फसल के असर से लोगों को निकालने में अभी वक्त लग सकता है. मुंबई के सब्जी बाजार में बाढ़ का प्रभाव दिखने लगा है। सब्जियों की  कीमत आसमान छू रही हैं। हरी सब्जियां या तो अच्छी क्वालिटी की नहीं मिल रही हैं और जो मिल भी रही हैं उसके लिए लोगों को चौगुनी कीमत चुकानी पड़ रही है। आपकी थाली  में इस्तेमाल होने वाला टमाटर अपना सुर्ख रंग छोड़ कर कीमत का रंग पकड़ चुका है और तकरीबन 70 रुपए की ऊंचाई पर पहुंच चुका है। खाने में इस्तेमाल होने वाला लहसुन 200  से 300 रुपए किलो तक है जो पहले महज 50 रुपए में आसानी से मिल जाता था। मिर्ची भी अपने तीखे रूप में है। मिर्ची 450 रुपए प्रति किलो के भाव से बिक रही है। लौकी भी  90 से 100 रुपए किलो बिक रही है। शिमला मिर्च जिसे 25 से 30 रुपए किलो खरीदा जाता था अब वह 90 रुपए किलो की कीमत चुकाने पर भी अच्छी क्वालिटी की नहीं मिल रही  है। बाजार का सुनसान नजारा यह जरूर दर्शा रहा है कि आने वाले दिनों में आखिर इस बाजार में खरीदार की हालत क्या होगी। भायखला सब्जी मार्केट एसोसिएशन के चेयरमैन  किशन का मानना है कि आगे आने वाले कई महीनों तक इसका असर रहेगा। क्योंकि खेत में लगी हुई सब्जियों की फसल बर्बाद हुई है। दूरदराज यानी दक्षिण भारत से आने वाले  रास्ते बंद होने की वजह से बरसात के दिनों में वहां से भी आने वाली सब्जियां बंद हैं। जिससे बाजार में अच्छी क्वालिटी की सब्जी नहीं मिल रही है और जो भी सब्जी बाजार में आ  रही है उसकी कीमत ज्यादा है। पूरे इलाके में अगर देखा जाए तो सब्जियों के साथ-साथ गन्ना के खेत भी बाढ़ के पानी की चपेट में हैं जिससे गन्ने की फसल भी बर्बाद हुई है।  तकरीबन 40 से 45 हजार हेक्टेयर गन्ने की फसल बर्बाद हुई है जिसका असर आने वाले दिनों में जरूर दिखेगा। फिलहाल अगर सब्जियों की फसल को देखते हैं तो अलग-अलग  इलाकों में हजारों हेक्टेयर सब्जियों की खेती बर्बाद हुई है। नासिक में 25672 हेक्टेयर हरी सब्जी की फसल बर्बाद हुई। अहमदनगर में 13409, पुणे में 12891, सोलापुर में 10820  हेक्टेयर में लगी सब्जियां बाढ़ की तबाही की भेंट चढ़ गईं। महाराष्ट्र के 5 जिले में तकरीबन 125000 हेक्टेयर फसल के खेत पानी में समा गए हैं। पुणे डिविजन के 116 हेक्टेयर जमीन में, गन्ना, कपास, फल, बाजरा, सोयाबीन, हरी सब्जी बर्बाद हो चुके हैं। इसी तरह से रत्नागिरी और सिंधुदुर्ग में भी खेतों में पानी आने की वजह से और धान की फसल भी  बर्बाद हुई है। कई इलाकों में ज्यादा पानी होने की वजह से सड़क मुख्य मार्ग से उनका संपर्क ही टूट गया है। फसल तो वैसे ही नष्ट हो चुकी हैं। मुंबई में सब्जी के खरीददार यही बता रहे हैं कि अब वह महंगी सब्जियां महज जरूरत के हिसाब से खरीद रहे हैं. मुंबई कर सब्जियों के मामले में ज्यादा से ज्यादा कटौती करके इसे महज गुजारा भर ही खरीद रहे  हैं। बताया जा रहा है कि आने वाले कई दिनों तक यह असर देखा जा सकता है। हालांकि इसके लिए अभी तक कोई वैकल्पिक उपाय नहीं होने की वजह से बाजार में तेजी बरकरार रहने की उम्मीद है।
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