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कार्डिओ वर्कआउट:

कार्डिओ फायदेमंद है. यह वेट लौस करने में काफी मददगार है. इस से तनाव कम होता है. वर्कआउट से फेफड़ों तक औक्सीजन पहुंचने में मदद मिलती है, रक्तसंचार सही होता है, दिल मजबूत और ब्लड भी प्यूरिफाई होता है. कार्डियो वर्कआउट वजन को कम कर के बौडी में जमा अतिरिक्त फैट को कम करता है और बीमारियों से बचाता है.

ऐरोबिक्स:

ऐरोबिक्स आप कभी भी कहीं भी एक छोटी सी जगह पर कर सकते हैं. इस में अपनी पसंद के म्यूजिक पर कुछ स्टैप्स किए जाते हैं. ग्रेपवाइन लेग कर्ल जंपिंग जैक्स जैसे मूव्स से पूरे शरीर का वजन घटता है. पसीने के जरीए बौडी से टौक्सिन निकलना ही फैट और बीमारियों को दूर करता है. सिर्फ पसीना निकलना ही जरूरी नहीं, कड़ी मेहनत भी जरूरी है. ऐरोबिक्स वर्कआउट में आप के हार्ट रेट को लो से हाई ले जा कर एक स्तर पर मैंटैन किया जाता है, जो वेट लौस में मदद करता है.

स्ट्रैंथ वर्कआउट:

महिलाओं के लिए स्टैं्रथ वर्कआउट बहुत जरूरी भी है और ट्रैंड में भी. इस से महिलाओं में औस्टियोपोरेसिस की समस्या बहुत कम होती है. बोन डैंसिटी भी बढ़ती है. इस में बाइसैप कर्ल, ट्राइसैप ऐक्सटैंशन, हैमर कर्ल, शोल्डर प्रैस, पुशअप्स, ट्राइसैप डिप्स इत्यादि महिलाओं के लिए फायदेमंद हैं.

डांस फिटनैस:

फिटनैस डांस महिलाओं के लिए बहुत ही अच्छा है और आजकल तो यह ट्रैंड बनता जा रहा है. इस में आप भांगड़ा, बेली डांस इत्यादि पर अलगअलग तरीके से थिरक कर  30-50 मिनट तक वर्कआउट कर सकती हैं. मस्ती के साथसाथ वजन भी घट जाता है.

हाई इंटैंसिटी वर्कआउट:

कुछ महिलाएं अपने लिए समय नहीं निकाल पातीं जिस की वजह से वे जिम या पार्क में जा कर वर्कआउट नहीं कर पातीं. उन के लिए हाई इंटैंसिटी वर्कआउट बढि़या विकल्प है. यह बाकी वर्कआउट्स से थोड़ा मुश्किल होता है लेकिन इस से कम समय में ज्यादा वजन कम किया जा सकता है. यह मैटाबौलिज्म को तेजी से बढ़ाता है. इस वर्कआउट में कुछ हाई इंटैंसिटी ऐक्सरसाइज का चुनाव कर के उन्हें क्रम में लगा कर सैट्स में किया जाता है जैसे, जंप, स्विंग, ऐअर पुशअप्स, रौक क्लाइम्बिंग स्टार जंप, जंप हाईनीज को मिला कर 1 सैट करने के बाद इन सभी के 3 सैट या 5 सैट किए जाते हैं. हर ऐक्सरसाइज को मिनटों में या सैकंड्स के हिसाब से किया जाता है. वेट लौस और बौडी टोनिंग के लिहाज से कम समय में ज्यादा से ज्यादा वजन कम करने के लिए यह अच्छा वर्कआउट है.

ऐब्स वर्कआउट:

इस में आप लैग रेज, स्क्वाट्स, क्रंचेज इत्यादि कर सकती हैं. इस से पेट, कमर व टांगों की चरबी घटेगी. महिलाओं में ज्यादातर पेट, कमर और लैग्स की चरबी ज्यादा होती है.

महिलाओं के लिए प्लैंक, सूमो स्क्वाट्स, बैक लैग किकिंग, वुड चौपर, रशियन क्रंच, प्लैंक, लैग फ्लटर इत्यादि व्यायाम बढि़या  विकल्प हैं.


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टैटू बनवाना मानो एक रिवाज की तरह हो गया हो जैसे कपल अपने प्यार को जताने के लिए एक दूसरे का नाम लिखवा लेते है. कुछ अपनी पर्सनेलिटी टैटू के जरिये दिखाना पसंद करते हैं कुछ ऐसे भी लोग है जो भगवान के प्रति अपनी भक्ति भी टैटू बनवा कर दर्शाते हैं.

टैटू से होने वाली स्किन प्रौब्लम

टैटू आजकल इतना ट्रेंड में है की हम लगभग हर किसी के बौडी पार्ट पर बना हुआ देखते है, लेकिन टैटू से कई तरह की गंभीर समस्या आपके सामने आ सकती है. इससे हमारे स्किन पर लालिमा, मवाद, सूजन जैसी कई तरह की परेशानियां हो सकती है. इसके अलावा कई तरह के बैक्ट्रियल इन्फ़ैकशन होने का भी डर रहता है. परमानेंट टैटू के दर्द से बचने के लिए कई लोग नकली टैटू का सहारा लेते हैं, लेकिन ऐसा ना करें. इससे आपको और भी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है.

टैटू से कैंसर होने का डर

टैटू बनाते समय हम यह सोचते हम बहुत कूल दिखेंगे लेकिन इस कूलनेस से हमे कई तरह की बीमारियां भी हो सकती है जिसमे से एक सोराइसिस हैं. टैटू से सोराइसिस नाम की बीमारी होने का डर रहता है. कई बार हम ध्यान नहीं देते और दूसरे इंसान पर इस्तेमाल की गई सुई हमारे स्किन पर इस्तेमाल कर दी जाती है जिससे स्किन संबंधित रोग, एचआईवी और हेपेटाइटिस जैसी बीमारियों का खतरा रहता है. टैटू बनवाने से कैंसर का खतरा भी बढ़ जाता है.

स्याही स्किन के लिए खतरनाक

टैटू बनाने के लिए हमारे स्किन पर अलग-अलग तरह की स्याही का इस्तेमाल किया जाता है, जो कि हमारी स्किन के लिए काफी खतरनाक होती है. टैटू बनाने के लिए नीले रंग की स्याही का इस्तेमाल किया जाता है जिसमें एल्यूमिनियम और कोबाल्ट होता है. नीले रंग के अलावा और रंगों में कैडियम, क्रोमियम, निकल व टाइटेनियम जैसी कई धातुएं मिली रहती हैं, जो कि स्किन के लिए खराब होती हैं. यह स्किन की बिलकुल अंदर तक समा जाती है जिससे बाद में कई तरह की दिक्कतें भी हो सकती हैं.

इन बातों का टैटू बनवाते वक्त रखें ध्यान

  •  टैटू 18 साल से अधिक उम्र वाले लोगों को ही बनवाना चाहिए.
  •  टैटू बनवाने के लिए किसी अच्छे टैटू प्रोफेशनल के पास ही जाए.
  •  टैटू बनवाने से पहले हेपेटाइटिस बी का टीका जरूर लगवाएं.
  •  टैटू बनवाने वक़्त अपने स्किन पर इंक टेस्ट जरूर करवाए इससे आपको पता चल जाएगा की इंक से आपके स्किन पर कोई एलर्जी तो नहीं हो रहीं.
  •  टैटू बनवाने वक्त देख लें नीडल नया है या नहीं.
  •  टैटू बनवाने के बाद करीब 2 हफ्ते पानी को उस जगह को दूर रखें. जिस जगह पर टैटू बनवाया हो उस जगह पर रोजाना एंटीबायोटिक क्रीम लगाएं


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किच
न के काम को जल्दी खत्म करने के लिए हम तेज धार वाले चाकूओं का इस्तेमाल करते हैं. लेकिन कुछ दिनों के बाद चाकू मंद हो जाता है. ऐसे में चीजों को काटना मुश्किल हो जाता है. इसलिए, आज हम आपको चाकू की धार को तेज करने के कुछ आसान तरीके बता रहे हैं. आप अपने आम चाकू को पत्थर या ईंट पर रगड़ कर तेज कर सकती हैं. लेकिन कुछ विशेष चाकू केवल शार्पनर की सहायता से तेज होते हैं. इसलिए आपको अपने चाकू का प्रकार भी पता होना चाहिए. 

स्टील या लोहे की शीट

चाकू की धार को तेज करने के लिए स्टील की या लोहे की शीट खरीदें. काम शुरू करने से पहले शीट को पानी से धोएं और पोंछ कर गर्म होने के लिए धूप में रखें. जब यह शीट अच्छे से गर्म हो जाए, इस पर चाकू की धार तेज करना आरंभ करें. घर्षण के कारण चिंगारियां उठेंगी, इसलिए ध्यान से काम करें.

लोहे का रौड

शीट ना होने पर आप लोहे के रॉड का इस्तेमाल कर सकती हैं. रेस्तरां में लोहे के रॉड का उपयोग मांस-मछली को काटने के लिए किया जाता है. इस उपकरण से चाकू को तेज करना बहुत आसान है.

ग्रेनाइट

चाकू को तेज करने के लिए रसोई के स्लैब पर लगे ग्रेनाइट के पत्थर को भी काम में लाया जा सकता है. चाकू को पत्थर पर रखें और ब्लेड के दोनों हिस्सों को पत्थर पर 20 सेकंडों के लिए लगातार रगड़ते रहें. इस प्रक्रिया में भी आपको चिंगारियां उठती नजर आएंगी.

चाकू शार्पनर

खराब हुए चाकू को तेज करने के लिए आप बाजार से चाकू शार्पनर (नाइफ शार्पनर) खरीद सकती हैं. हालांकि, ये शार्पनर बहुत महंगे होते हैं और केवल कुछ प्रकार के चाकूओं को ही तेज करते हैं.


भारत में कई सालों से शिलाजीत का औषधि के रूप में इस्तेमाल किया जाता रहा है. यह दुर्लभ पदार्थ अंदरूनी ताकत बढ़ाने के साथसाथ स्मरण शक्ति बढ़ाने, गठिया के इलाज, रक्तचाप को नियंत्रित रखने इत्यादि में काफी लाभकारी माना जाता है. शिलाजीत से बनी औषधि का सेवन पुरुषों के साथसाथ महिलाओं के लिए भी फायदेमंद माना गया है. अब इस में स्वर्ण और मकरध्वज जैसे तत्वों का भी मिश्रण हो तो इस का लाभ कई गुना बढ़ जाता है. आइए, जानें इन सभी तत्वों के सेहत वाले फायदों के बारे में.

शिलाजीत: शिलाजीत को ऐस्फाल्ट या मिनरल पिच के नाम से भी जाना जाता है. यह खनिज पदार्थ की श्रेणी में आता है और चुनिंदा पर्वतों पर पाया जाता है. यों तो शिलाजीत का सेवन यौन शक्ति को बढ़ाने के लिए किया जाता है, मगर इस के संपूर्ण सेहत से जुड़े कई दूसरे फायदे भी हैं. इस से बनी औषधि गठिया और ऐनीमिया की समस्याओं से राहत दिला सकती है. मूत्र विकार और उच्च रक्तचाप जैसी समस्याओं  से पीडि़त लोगों के लिए भी इस के फायदे बताए गए हैं. इस में दिमाग को तेज करने के गुण  भी मौजूद हैं. इस के सेवन से दिमाग को पोषण मिलता है जिस से तनाव घटता है  और धीरेधीरे एकाग्रता बढ़ने लगती है. कोलेस्ट्रौल के बढ़ते स्तर को नियंत्रित  रखने में भी इस की बड़ी भूमिका है. इन  सब के अलावा शिलाजीत शरीर की  कमजोर हो चुकी कोशिकाओं को मजबूत बनाने का काम भी करती है और कोशिशकाओं की मजबूती शरीर को  स्फूर्ति से भर देती है.

स्वर्ण: शरीर की बीमारियों से लड़ने की क्षमता बढ़ाने क लिए स्वर्ण भस्म को सब से बेहतरीन तत्व माना गया है. स्वर्ण भस्म का इस्तेमाल परंपरागत चिकित्सा पद्धति में कई तरह से किया जाता है. स्वर्ण यौन शक्ति को बढ़ाने के साथसाथ मानसिक स्वास्थ्य को दुरुस्त रखने और मधुमेह क नियंत्रण के लिए भी जाना जाता है. इस के प्रयोग से बनी औषधि के सेवन से पहले भी चिकित्सक सलाह दे तो अच्छे ब्रैंड की स्वर्ण भस्म युक्त औषधि का ही सेवन करें.

मकरध्वज: मकरध्वज का इस्तेमाल कफ, पित्त के इलाज के साथसाथ पौरुष शक्ति बढ़ाने के लिए भी किया जाता है. इस के अलावा शुक्राणु संबंधी विकारों के इलाज के लिए भी मकरध्वज को फायदेमंद माना गया है. मधुमेह की समस्या से ग्रसित लोगों के लिए इस का सेवन फायदेमंद बताया गया है. बाजार में इस से बनी कई औषधियां उपलब्ध हैं, मगर डाक्टर की सलाह से ही और अच्छे ब्रैंड के उत्पाद का सेवन करें.


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गर्भावस्था में सही खान-पान मां और बच्चे दोनों के लिए बेहद जरूरी होता है. ठीक तरह से खाना लेने से गर्भस्थ्य शिशु का शारीरिक और मानसिक विकास अच्छी तरह से हो पाता है. कई बार गर्भ के दौरान महिलाओं को इस बात का पता नहीं होता है कि उन्हें किन फलों के सेवन से बचना चाहिए. सही जानकारी का पता होना हर गर्भवती महिला के लिए जरूरी है. इसलिए आज हम आपको बताएंगे कि गर्भावस्था के दौरान किन फलों को और क्यों नहीं खाना चाहिए. गर्भ के दौरान कई बार महिलाएं कुछ गलतियां कर बैठती हैं जिसकी वजह से गर्भपात तक हो सकता है. गर्भ के दौरान कई सारी चीजें निर्भर करती हैं महिला के खान पान पर. यदि वह इस दौरान कुछ गलत फलों को चयन करती हैं जो गर्भ के दौरान नहीं लेने चाहिए. तो इससे उन्हें नुकसान उठाना पड़ सकता है.

अंगूर से बचें

गर्भवती महिलाओं को गर्भ के आखिर के तीन महिनों में अंखूर का सेवन कभी नहीं करना चाहिए. ये बात डॉक्टर इसलिए कहते हैं क्योंकि अंगूर की तासीर गर्म होती है जिससे समय से पहले प्रसव हो सकता है इसलिए जितना हो सके आप अंगूरों को न खाए.

पपीता खाने से बचें

पपीता खाने से गर्भवती महिला को बचना चाहिए. कच्चा पपीता बेहद खतरनाक होता है गर्भवती महिलाओं के लिए. पपीता गर्भावस्था में नहीं लेना चाहिए.डाक्टर भी सलाह देते हैं कि इस दौरान पपीता खाना से बचना चाहिए. पपीता खाने से भी प्रसव जल्दी होने की संभावना होती है. पपीता गर्भाशय के संकुचन को ट्रिगर कर देता है. जिससे गर्भ ठहरता नहीं है. गर्भावस्था के तीसरे और आखिर की तिमाही के समय पका हुआ पीपता थोड़ा खाया जा सकता है. क्योंकि पका हुआ पपीता विटामिन सी और अन्य पौष्टिक तत्वों से भरपूर होता है जो गर्भावस्था के शुरूआती लक्षणों में कब्ज जैसी समस्या को रोकने में मददगार होता है. पका हुआ पपीता खाना खाने के बीच में खा सकते हैं. 

अनानस से दूर रहें

गर्भ के दौरान महिलाओं को अनानस भी नहीं खाना चाहिए. क्योंकि यह हानिकारक हो सकता है. अनानस खाने से गर्भ में नरमी हो जाती है जो असमय प्रसव का कारण बन सकती है. पहली तिमाही से ही अनानस का सेवन करना बंद कर देना चाहिए.


इन सब्जियों से भी बचें

इन फलों के साथ कुछ सब्जियों से भी गर्भवती महिलाओं को परहेज करना चाहिए. गर्भवती महिलाओं को कच्ची सब्जी का सेवन नहीं करना चाहिए. साथ ही साथ वे जो भी सब्जी खाए वह ठीक तरह से धुली हुई और साफ हो. एैसा इसलिए होता 


है ताकि आप संक्रामक रोगों से बच सकें. हर महिला को गर्भावस्था के दौरान इन बातों का पता होना जरूरी है क्योंकि इस दौरान थोड़ी सी भी लापरवाही मां और बच्चे दोनों के लिए खतरनाक हो सकती है इसलिए समय-समय पर डॉक्टर से सलाह भी लेती रहें. हमारी कोशिश भी यही है कि मां और बच्चा दोनों स्वस्थ रहें.


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कोलकाता

पश्चिम बंगाल में छठे चरण के चुनाव के लिए प्रचार करने पहुंचे भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर चुन चुन कर हमला बोला है। मुसलमानों के एक होने संबंधी ममता बनर्जी के आह्वान का जिक्र करते हुए जेपी नड्डा ने कहा कि ममता समाज को बांटने और तोड़ने का षड्यंत्र रच रही हैं, जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सबका साथ और सबका विकास का लक्ष्य लेकर चलते हैं।  बर्दवान के केतुग्राम में जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा,हमने सुना था कि ममता जी मां, माटी और मानुष की बात करती थीं। लेकिन 10 साल में हमने देखा कि न मां की चिंता हुई, न माटी की रक्षा हुई और न ही मानुष की रक्षा हुई। केंद्र सरकार किसानों के लिए पीएम किसान सम्मान निधि योजना का पैसा भेजने को तैयार, लेकिन वो आप तक पहुंचने नहीं दिया गया। क्या आप ऐसी ही सरकार चाहते हैं ? अभी कुछ दिन पहले ममता जी के एक नेता ने दलितों के लिये ऐसे अपशब्द कहे, जो हम बयान नहीं कर सकते। कहा कि इनको कितना भी दे दो ये बिक जाते हैं। लेकिन ममता जी ने आजतक उसकी भर्त्सना नहीं की।  नड्डा ने कहा कि ममता जी सहित तृणमूल के सभी नेता दलित विरोधी हैं। चुनाव आयोग द्वारा ममता बनर्जी पर लगाए गए 24 घंटे का प्रतिबंध लगाने का जिक्र करते हुए नड्डा ने कहा कि अभी हाल में सीआरपीएफ को घेरने संबंधी बयान की वजह से चुनाव आयोग ने ममता बनर्जी पर 24 घंटे का प्रतिबंध लगाया था। जब संविधान की रक्षा करने वाला ही, भक्षक बन जाए, जब संविधान की रक्षा करने वाला ही संविधान के खिलाफ बोले, जब संविधान की रक्षा करने वाला ही, पुलिस के खिलाफ बोले, हमने कभी ऐसा देखा नहीं था। बंगाल में समाज को बांटने का षड्यंत्र रचा जाता है, वो लोग एक समाज के लिए  कहते हैं कि इकट्ठा हो जाओ, अलग हो जाओ। 


पांचवें चरण का मतदान :

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कोलकाता

गत 10 मार्च को चौथे चरण के मतदान के दौरान पांच लोगों की मौत की कड़वी यादें लिए पश्चिम बंगाल पांचवें चरण के मतदान के लिए तैयार है। शनिवार को कड़ी सुरक्षा के बीच छह जिलों की 45 सीटों पर वोटिंग शुरू हो जाएगी। सुबह 7:00 बजे से शाम 6:30 बजे के बीच 1.13 करोड़ मतदाता अपने मताधिकार का इस्तेमाल कर 319 उम्मीदवारों की किस्मत का फैसला करेंगे। 

चौथे चरण में सुरक्षाबलों पर ग्रामीणों के कथित हमले के बाद फायरिंग में चार लोगों की मौत के बाद सतर्क चुनाव आयोग ने पांचवें चरण में सुरक्षा की पुख्ता व्यवस्था की है। 853 कंपनी केंद्रीय बलों की तैनाती की गई है। इसके पहले चौथे चरण में 44 सीटों पर वोटिंग के लिए 789 कंपनी केंद्रीय बलों की तैनाती हुई थी। 

इस चरण में सिलीगुड़ी के महापौर अशोक भट्टाचार्य, राज्य के मंत्री ब्रात्य बुस और भाजपा के समिक भट्टाचार्य समेत कई दिग्गजों की राजनीतिक तकदीर का फैसला करना है। 

उत्तरी 24 परगना के 16 , पूर्ब बर्दवान एवं नादिया के आठ-आठ, जलपाईगुड़ी के सात, दार्जिलिंग के पांच और कलिम्पोंग जिले की एक विधानसभा क्षेत्र में 17 अप्रैल को 15,789 मतदान केंद्रों पर मतदान होगा। एक चुनाव अधिकारी ने बताया कि स्वतंत्र एवं निष्पक्ष मतदान सुनिश्चित करने के लिए केंद्रीय बलों की कम से कम 853 कंपनियां तैनात की हैं।


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