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पणजी (गोवा)
जीएसटी काउंसिल ने अपनी 37वीं बैठक में एक्सपोर्ट और होटल जैसे उद्योगों के लिए तोहफे का ऐलान किया। साथ ही, खास क्षमता के वाहनों पर भी जीएसटी रेट में कटौती की।  वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में हुई जीएसटी काउंसिल की मीटिंग में सभी राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। जीएसटी काउंसिल में हुए प्रमुख  फैसले इस प्रकार हैं। जीएसटी परिषद ने 13 सीटों तक के 1,200 सीसी पेट्रोल वाहनों और 1,500 सीसी इंजन वाले डीजल वाहनों पर सेस की दर को घटाकर 12 प्रतिशत करने की  सिफारिश की। समुद्री नौकाओं का ईंधन, ग्राइंडर, इमली और हीरा, रूबी, पन्ना या नीलम को छोड़कर अन्य सस्ते रत्नों पर टैक्स की दर घटाई। कैफीनयुक्त पेय पदार्थों पर जीएसटी  रेट 18 प्रतिशत से बढ़ाकर 28 प्रतिशत कर दिया गया। इनपर 12 प्रतिशत कंपेनसेशन सेस भी लगेगा। माल की पैंकिंग में इस्तेमाल होने वाले पॉलीप्रोपेलीन की थैलियों  और बोरियों   पर एकसमान 12 प्रतिशत की दर से जीएसटी लगेगा। भारत में नहीं बनने वाले कुछ विशेष किस्म के रक्षा उत्पादों को जीएसटी से छूट। कटे और पॉलिस किए हुए थोड़े कम मूल्यवान (सेमी प्रीसियस) पत्थरों पर जीएसटी दर 3प्रतिशत से घटाकर 0.25 प्रतिशत कर दी गई है। जूलरी निर्यात पर जीएसटी नहीं देना होगा। एयरेटेड ड्रिंक निर्माताओं को  कंपोजिशन स्कीम के अंदर आने की जरूरत नहीं रही। रेलवे वैगन, कोच पर जीएसटी रेट 5 प्रतिशत से बढ़ाकर 12प्रतिशत कर दिया गया। 1,000 रुपए से कम किराए वाले कमरों  को जीएसटी नहीं देना होगा। इससे ऊपर के किराए वाले कमरों पर टैक्स घटा दिया गया है। 1,000 रुपए से 7,500 रुपए तक के किराए वाले होटल रूम पर 18 फीसदी की जगह  अब 12 फीसदी जबकि 7,500 से ज्यादा के किराए वाले कमरे पर 28 प्रतिशत की जगह अब 18 प्रतिशत जीएसटी लगेगा। हीरों पर किए जाने वाले काम से जुड़ी सेवाओं पर  जीएसटी 5 प्रतिशत से घटाकर 1.5 प्रतिशत कर दिया गया। इंजिनियरिंग इंडस्ट्री में मशीन जॉब वर्क्स पर जीएसटी 18 प्रतिशत से घटाकर 12 प्रतिशत कर दिया गया। हालांकि, बस  बॉडी बिल्डिंग वर्क्स पर 18 प्रतिशत से जीएसटी लगता रहेगा। गृह मंत्रालय के तहत आनेवाली पार्ल्यामेंट्री फोर्सेज के ग्रुप इंश्योरेंस स्कीक्स को जीएसटी से मुक्त कर दिया गया।

नई दिल्ली
देशभर के लोगों को कॉल ड्रॉप और स्लो इंटरनेट कनेक्शन की समस्या से निजात दिलाने के लिए सरकार ने बड़ी पहल की है। सरकार के नए नियमों के तहत अब देश में कहीं भी  किसी भी सोसायटी का रेजिडेंट वेलफेयर असोसिएशन अपनी मनमानी नहीं कर पाएगा। सरकार के शीर्ष टेलीकॉम पैनल डिजिटल कम्युनिकेशंस कमीशन ने कहा कि ग्राहकों को
बेहतर सुविधा मिल सके और वे अपनी मर्जी के सर्विस प्रोवाइडर की सेवाओं का लुत्फ उठा सकें, इसके लिए आरडब्ल्यूए को नए नियम मानने पड़ेंगे। एक खबर के मुताबिक, अब तक आरडब्ल्यूए किसी एक टेलीकॉम ऑपरेटर या इंटरनेट प्रोवाइडर से समझौता कर लेते थे। इसके बाद उस सेक्टर में सिर्फ उसी टेलीकॉम ऑपरेटर और इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर्स की  सेवाएं प्रदान की जाती थीं। उस ऑपरेटर से इतर दूसरे ऑपरेटर्स की सिम इस्तेमाल करने वाले लोगों को खराब मोबाइल कनेक्टिविटी या कम इंटरनेट स्पीड से जूझना पड़ता है। ऐसे  में सरकार की नई पहल के बाद अब आरडब्ल्यूए किसी एक सर्विस प्रोवाइडर के साथ एक्सफ्लूसिव डील साइन नहीं कर पाएंगे। उन्हें कम्युनिकेशन इंफ्रास्ट्रक्चर को सभी सर्विस  प्राइडर्स और टेलीकॉम ऑपरेटर्स के साथ साझा करना होगा। इससे ग्राहक किसी भी कंपनी की सिम का इस्तेमाल कर सकेंगे और उन्हें कॉल ड्रॉप की समस्या का शिकार नहीं होना पड़ेगा।

मुंबई
रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर शक्तिकांत दास ने जोर देते हुए कहा कि आरबीआई पूर्ण रूप से स्वायत्त है। उन्होंने कहा कि केंद्रीय बैंक सरकार के साथ निष्पक्ष और पूरी तरह  खुलकर विचारविमर्श करता है। निर्णय लेने के मामले में सरकार का कोई हस्तक्षेप नहीं होता है। दास ने एक कार्यक्रम में कहा कि सभी देशों में सरकार और मौद्रिक प्राधिकरण के  विचारों में भिन्नता होती है। हालांकि, विचारों की भिन्नता को लेकर विचार-विमर्श करना और उसे सुलझाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि मैं आपको बताना चाहता हूं कि आरबीआई और  सरकार के बीच काफी बातचीत होती है, लेकिन जहां तक किसी मुद्दे पर निर्णय लेने या अंतिम फैसला लेने का संबंध है तो मैं आपको पूरे विश्वास के साथ बताना चाहता हूं कि यह  काम आरबीआई करता है। आरबीआई फैसले लेने के लिए पूरी तरह से स्वतंत्र है। गवर्नर ने कहा कि विचारों का आदान-प्रदान और एक-दूसरे को अपने पक्ष से रू -ब-रू करवाना जरूरी है क्योंकि इससे सौहदर्य पूर्ण और अच्छे संबंध बनते हैं। उन्होंने रेखांकित किया कि सरकार के साथ विचार - विमर्श को बंद नहीं किया जा सकता है, क्योंकि सरकार सर्वोच्च   शासक (सबसे ऊपर) है और आरबीआई उस शासन का हिस्सा है। दास ने हैरानी जताते हुए कहा कि केंद्रीय बैंक किसी के जयकारे (चीयरलीडर) लगाने वाला नहीं है लेकिन जो लोग  यह कहते हैं कि आरबीआई को सरकार के लिए जयजयकार

करने वाला नहीं होना चाहिए, उनसे मेरा एक सवाल है
क्या आप यह उम्मीद करते हैं कि आरबीआई अर्थव्यवस्था पर सरकार की खुलेआम आलोचना करेगा?' उन्होंने स्पष्ट किया कि कई मुद्दों पर सरकार और आरबीआई के बीच मतभेद   होंगे लेकिन हम बातचीत करते हैं और यह विचार-विमर्श आंतरिक होता है।

Piyush goyal
मुंबई
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने शुक्रवार को उम्मीद जताई है कि सरकार की ओर से कॉरपोरेट कर में दी गई 'राहत' से अर्थव्यवस्था को आवश्यक तेजी मिलेगी। गोयल ने  कहा कि इन उपायों से हमारी कर की दरों की तुलना अमेरिका और दक्षिण एशियाई अर्थव्यवस्थाओं की दरों से की जा सकती है। उन्होंने कहा कि ये उपाय निवेश को बढ़ाने में मदद   करेंगे। सरकार ने नरम पड़ती अर्थव्यवस्था को गति देने तथा निवेश एवं रोजगार सृजन को बढ़ावा देने के लिए शुक्रवार को कई उपायों की घोषणा की। इनमें कॉरपोरेट कर की दरें  करीब 10 प्रतिशत कम करके 25.17 प्रतिशत करना, एफपीआई के पूंजीगत लाभ पर अधिभार के रूप में लगने वाला धनाढम्य - कर वापस लेना, सीएसआर का दायरा बढ़ाना आदि  शामिल हैं। उल्लेखनीय है कि भारत की आर्थिक वृद्धि दर चालू वित्त वर्ष की जून तिमाही में गिरकर छह साल के निचले स्तर पांच प्रतिशत पर आ गई है। यह पाकिस्तान की 5.4  प्रतिशत की आर्थिक वृद्धि दर से भी कम है। इन घोषणाओं से सरकारी खजाने पर इस साल 1,45,000 करोड़ रुपए का बोझ  आएगा। गोयल ने इंडो अमेरिकन चैंबर ऑफ कॉमर्स की  ओर से आयोजित एक कार्यक्रम में कहा कि अभी-अभी कुछ बेहतरीन घोषणाएं की गई हैं, अर्थव्यवस्था को आवश्यक तेजी देने के लिए जिसका हम सब लंबे समय से इंतजार कर  रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि छूट को शामिल कर लिया जाए तो हमारी कर की दरें प्रतिस्पर्धी हैं और अमेरिका तथा दक्षिण एशियाई देशों से इनकी तुलना की जा सकती है। गोयल ने  कहा कि अमेरिका में कॉरपोरेट कर की दरें 21-22 प्रतिशत है। गोयल ने कहा कि यदि छूट का शामिल किया जाए तो हमारी कर दरें 15 प्रतिशत पर आ गई हैं। उन्होंने कहा कि इन  उपायों से निवेश को बढ़ावा मिलेगा। गोयल ने कहा कि राजस्व पर पड़ने वाले 1.45 लाख करोड़ रुपए के इस बोझ से कंपनियों और लोगों को लाभ होगा और इसका इस्तेमाल निवेश  के लिए किया जा सकता है, जो कि सुस्त पड़ती आर्थिक वृद्धि को गति देने में मदद करेगा। वर्तमान में निजी पूंजीगत निवेश सबसे कम है और सरकार ने विनिर्माण क्षेत्र में नया  निवेश आकर्षित करने के लिए नया प्रावधान किया है। इससे एक अक्टूबर 2019 या इसके बाद गठित किसी भी कंपनी को विनिर्माण में निवेश करने पर 15 प्रतिशत की दर से  आयकर भरने का विकल्प मिलेगा। घोषणा के बाद, कॉरपोरेट कर की प्रभावी दर अधिभार सहित 25.17 प्रतिशत होगी जबकि न्यूनतम वैकल्पिक कर की दर 3.5 प्रतिशत घटाकर 15  प्रतिशत हो गई है। उन्होंने कहा कि कर को लेकर की गई घोषणा से कोल इंडिया, इंफोसिस और विप्रो जैसे बड़े करदाताओं को फायदा होगा। मुकेश अंबानी के जियो इंस्टीट्यूट की  तरह कई उद्योगपति शिक्षा क्षेत्र में कदम रखने पर विचार कर रहे हैं। इसे लेकर गोयल ने कहा कि सार्वजनिक रूप से वित्तपोषित विश्वविद्यालयों के लिए सहायता को मान्यता देने  का उपाय शिक्षा क्षेत्र में कंपनियों को आकर्षित करेगा। उन्होंने कहा कि सरकार नवाचार में सार्वजनिक निजी भागीदारी चाहती है।

reliance
नई दिल्ली
रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (आरआईएल) ने बाजार पूंजीकरण (एम-कैप) के मामले में शुक्रवार को टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) को पीछे छोड़ दिया। आरआईएल के शेयरों में   तेजी से उसका बाजार पूंजीकरण बढ़ गया। शुक्रवार को कारोबार बंद होने के समय रिलांयस इंडस्ट्रीज का बाजार पूंजीकरण बढ़कर 7,95,179.62 करोड़ रुपये हो गया है। वहीं,  टीसीएस का एम-कैप 7,75,092.58 करोड़ रुपए रहा, जो कि रिलायंस इंडस्ट्रीज के पूंजीकरण से 20,087.04 करोड़ रुपए कम है। बंबई शेयर बाजार में रिलायंस का शेयर 6.42  प्रतिशत बढ़कर 1,254.40 रुपए पर बंद हुआ जबकि टीसीएस का शेयर 1.74 प्रतिशत गिरकर 2,065.60 रुपए पर आ गया। बाजार पूंजीकरण के लिहाज से रिलायंस इंडस्ट्रीज और  टीसीएस के बाद एचडीएफसी बैंक (6,56,546.37 करोड़ रुपए) तीसरे स्थान, हिंदुस्तान यूनिलीवर (4,26,467.98 करोड़ रुपए) चौथे और एचडीएफसी (3,54,270.94 करोड़ रुपए) पांचवें   स्थान पर है।

प्रयागराज
शहर के लोगों कोअब सड़क किनारे या किसी भी खुले स्थान पर मलबा फेंकना महंगा पड़ेगा। नगर निगम ने लोगों को ऐसा न करने की सलाह की है। साथ ही किसी के घर से मलबा आदि  निकलता है उसे उठवाने के लिए नगर निगम से संपर्क करने को कहा गया है। इसके लिए फोन नंबर जारी किए गए है। मलबा हटवाने के बदले लोगों से 303 रुपये प्रति ख्यूबिक मीटर की दर  से यूजर चार्ज लिया जाएगा। यदि किसी ने खुले में मलबा फेंका तो उससे यूजर चार्ज का तीन गुना अर्थदंड वसूला जाएगा। इस संबंध में नगर आयुक्त ने गुरुवार को आदेश जारी कर दिया।
आमतौर पर दिवाली के पहले लोग अपने घरों में मरम्मत, रंगाई, साफ-सफाई आदि काम कराते है। इस दौरान बड़ी मात्रा में मलबा भी निकलता है, जिसे सड़क किनारे, गलियों या खुले स्थानों  पर फेंक दिया जाता है। इससे गंदगी फैलती है। दुर्घटना होने का भी खतरा रहता है। ऐसे में नगर निगम ने लोगों को आगाह किया है कि मलबा सार्वजनिक स्थलों पर न फेंके, बल्कि इसके लिए  दूरभाष नंबर 0532-2427204, 2427206 पर संपर्क करें। नगर निगम संबंधित व्यक्ति के घर से मलबा उठाएगा और इसके बदले 303 रुपये प्रति ख्यूबिक की दर से यूजर चार्ज लेगा। नगर  आयुक्त डॉ.उज्ज्वल कुमार ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी भी भवन स्वामी द्वारा खुले में मलबा फेंका जाता है तो उसे राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण के आदेशों का उल्लंघन मानते हुए निर्धारित  यूजर चार्ज के अतिरिक्त तीन गुना अर्थदंड वसूला जाएगा। साथ ही विधिक कार्रवाई भी की जाएगी। 

गोरखपुर
इंडियन रेलवे केटरिंग एंड टूरिज्म कॉरपोरेशन की पहली प्राइवेट ट्रेन 4 अक्टूबर को चलेगी। ट्रेन तेजस एक्सप्रेस शुक्रवार सुबह शहर के कई हिस्सों से होते हुए गोरखपुर तक ट्रायल के दौर पर निकली। ट्रायल के लिए ठीक सुबह करीब 6:50 बजे पर लखनऊ जंक्शन से तेजस रवाना हुई। 110 किमी. प्रति घंटा की रक्तार से 279 किमी की दूरी तय कर एक्सप्रेस करीब 4 घंटे 10 मिनट  में गोरखपुर पहुंची है। इस दौरान तेजस में सवार स्टाफ के सदस्यों ने वीडियो और सेल्फी लेकर सोशल मीडिया में साझा किया। वहीं, तेजस में लगी पॉवर कार, ट्रेन में आग या हीट पर नजर  रखने वाला सेंट्रल मॉनिटरिंग सिस्टम, गेट खोलने-बंद करने वाले बटन, ऑटोमेटिक स्मोक सिस्टम सभी सही तरह से काम करते दिखे। बता दें कि ट्रेन में जब आपकी एंट्री हो जाएगी तो फिर  आपको एक स्लाइड वाला दरवाजा मिलेगा, जिसको खोलने के बाद आप अपनी सीट पर जा सकेंगे। वहां पर भी आपको हाईटेक सुविधा का अहसास होगा। आरामदायक सीट के साथ ही हर सीट   ऊपर कोच अटेंडेंट को बुलाने के पीला बटन लगाया गया है। साथ ही पढ़ाई के लिए रीडिंग बटन की सुविधा दी गई है। वहीं ट्रेन में लगे पर्दे भी बटन दबाने पर खुलेंगे और बंद होंगे। बोगी के दोनों  छोर पर सेंसर युक्त स्लाइडिंग दरवाजे लगे हैं। सिगरेट पीने पर तुरंत अलर्म बज उठेगा, संदिग्ध लोगों पर नजर रखने के लिए हर बोगी में 6 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं।
चेन की जगह इमरजेंसी में ट्रेन रोकने के लिए हैंडल लगाया गया है, डिस्पले बोर्ड से यात्रियों को ये पता चलेगा कि ट्रेन कहां पहुंची है और कितनी स्पीड में चल रही है। हर बोगी में एंटी ब्रेकिंग  सिस्टम लगाया गया है, जो पहिए को जाम नहीं होने देंगे। ओएचई से बिजली लेकर उसे बोगियों के लिए कनवर्ट करने की आधुनिक तकनीक का प्रयोग किया गया है। हर बोगी में सूप व कॉफी  बनाने की लिए मिनी किचन बनाया गया है। साथ ही हर बोगी में दो सेंट्रल टेबल लगाई गई है। लखनऊ दिल्ली के बीच चलने वाली तेजस एक्सप्रेस में कुल 758 यात्री सफर कर सकेंगे। इस ट्रेन 
एक एक्ज़िख्यूटिव ब्लास की चेयर कार होगी, जिसमें 56 सीटें होंगी। वहीं 9 चेयरकार होंगी, जिसमें 78 सीटें होंगी। इस ट्रेन का टिकट ऑनलाइन ही बुक किया जा सकेगा। साथ ही ट्रेन का टिकट  शताब्दी या उससे कुछ अधिक हो सकता है।

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