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Narali Purnima
उत्तर भारत में रक्षा बंधन वाले दिन अर्थात भद्रपद की पूर्णिमा को राखी का त्योहार मनाया जाता है, जबकि दक्षिण भारत में समुद्री क्षेत्रों में नारियल पूर्णिमा का त्योहार मनाया जाता है। आओ जानते हैं नारियल पूर्णिमा की पांच खास बातें।
भारत के दक्षिण भारत में पश्चिमी घाट सहित सभी समुद्री क्षेत्रों में हिन्दू कैलेंडर अनुसार भाद्रपद पूर्णिमा को नारियल पूर्णिमा कहा जाता है।
नारियल पू र्णिमा खासकर सभी मछु आरों का त्योहार होता है। मछुआरे भी मछली पकड़ने की शुरुआत इसी दिन से भगवान इंद्र और वरुण की पूजा करने से करते हैं।
यह इस दिन वर्षा के देवता इंद्र और समुद्र के देवता वरुण देव की पूजा की जाती है ।पू जा के दौरान विधिवत रूप में उन्हें केल के पत्तों को समुद्र किनारे नारियल अर्पित किए जाते हैं। मतलब समुद्र में नारियल फेंके जाते हैं ताकि समुद्र देव हमारी हर प्रकार से रक्षा करें। इसीलिए इस राखी पू र्णिमा को वहां नारियल पूर्णिमा भी कहते हैं।
समुद्र को अर्पित करने के पूर्व नारियल को पीले वस्त्र और पत्तों से अच्छे से सजाते हैं और फिर उसे जुलूस के रूप में ले जाते हैं। फिर नारियल की शिखा समुद्र की ओर रखकर विधिवत पूजा अर्चुना और मंत्र पढ़ने के बाद अर्पित किया जाता है। इसके उपरांत धूप और दीप किया जाता है। नारियल अर्पण करते समय प्रार्थना करते हैं कि हे वरुणदेव आपके रौद्ररूप से हमारी रक्षा हो और आपका आशीर्वाद प्राप्त हो।
दक्षिण भारत में यह त्योहार समाज का हर वर्ग अपने अपने तरीके से मनाता है। इस दिन जनेऊ धारण करने वाले अपनी जनेऊ बदलते हैं। इस कारण इस त्योहार को अबित्तम भी कहा जाता है। इसे श्रावणी या ऋषि तर्पण भी कहते हैं।

Honey Milk
दूध पीना सेहत के लिए फायदेमंद है, यह तो आप जानते ही हैं। लेकिन दूध में अगर शहद मिलाएंगे, तो कई गुना ज्यादा फायदे पाएंगे। इतना ही नहीं, सेहत की समस्याओं से भी निजात पा जाएंगे। जानिए दूध में शहद मिलाकर पीने के फायदे.


रोजाना दूध के साथ शहद मिलाकर पीना, आपकी शारीरिक और मानसिक सेहत के लिए लाभकारी है। यह दोनों प्रकार की क्षमताओं में इजाफा करने में सहायक है।
अगर नींद न आने या कम नींद की समस्या है, तो रातको सोते समय गर्म दूध में शहद का प्रयोग करें, इससे नींद भी बेहतर होगी और आप रिलेक्स महसूस करेंगे।
पाचन क्रिया को दु रुस्त करने के लिए दू धमें शहद डालकर पीना एक बढ़िया उपाय है। इससे कब्ज की समस्या भी हल हो जाएगी।
दूध आपको प्रोटीन और कैल्शियम के अलावा कई जरूरी पोषक तत्व देता है और शहद प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में मदद करता है। दोनों मिलकर एक बेहतरीन सेहत विकल्प साबित होते हैं
तनाव दूर करने के लिए यह बेहतरीन उपाय है। इसके अलावा हल्के गुनगुने दूध में शहद मिलाकर पीने से प्रजनन क्षमता और शुक्राणुओं की संख्या में वृद्धि होती है।

Rakshabandhan
भाई-बहिन के प्यार का प्रतीक रक्षाबन्धन का पर्व देश का एक प्रमुख त्यौहार है। श्रावण मास की पूर्णिमा के दिन मनाये जाने के कारण इसे श्रावणी पर्व भी कहते हैं। रक्षाबन्धन पर्व में रक्षासूत्र यानि राखी का सबसे अधिक महत्व है। इस पर्व के दिन बहनें अपने भाई को राखी बांधती हैं। इस दिन ब्राह्मण, गुरु द्वारा भी राखी बांधी जाती है। हिन्दू धर्म के सभी धार्मिक अनुष्ठानों में रक्षासूत्र बांधते समय पण्डित संस्कृत में एक श्लोक का उच्चारण करते हैं। जिसमें रक्षाबन्धन का सम्बन्ध राजा बलि से स्पष्ट रूप से दृष्टिगोचर होता है। यह श्लोक रक्षाबन्धन का अभीष्ट मन्त्र है।


येन बद्धो बलि राजा दानवेन्द्रो महाबल:
तेन त्वाम प्रतिबद्धनामी रक्षे माचल माचल:
इस श्लोक का मतलब है कि जिस रक्षासूत्र से महान शक्तिशाली दानवेन्द्र राजा बलि को बांधा गया था, उसी सूत्र से मैं तुझे बांधता हूं। तुम अपने संकल्प से कभी भी विचलित मत होना।
रक्षाबंधन का त्योहार कब शुरू हुआ यह कोई नहीं जानता। लेकिन भविष्य पुराण में इस पर्व का वर्णन मिलता है। जब देवताओं और दानवों में युद्ध शुरू हुआ। तब देवताओं पर दानव हावी होने लगे। देवराज इन्द्र ने घबरा कर देवताओं के गुरू बृहस्पति से मदद की गुहार की। वहां बैठी इन्द्र की पत्नी इन्द्राणी सब सुन रही थी। उन्होंने रेशम का धागा मन्त्रों की शक्ति से पवित्र करके अपने पति के हाथ पर बांध दिया। संयोग से वह श्रावण पूर्णिमा का दिन था। लोगों का विश्वास है कि इन्द्र इस लड़ाई में इसी धागे की मन्त्र शक्ति से ही विजयी हुए थे। उसी दिन से श्रावण पूर्णिमा के दिन यह धागा बांधने की प्रथा चली आ रही है। यह धागा धन, शक्ति, हर्ष और विजय देने में पूरी तरह समर्थ माना जाता है। स्कन्ध पुराण, पद्मपुराण और श्रीमद्भागवत में वामनावतार नामक कथा में रक्षाबन्धन का प्रसंग मिलता है। दानवेन्द्र राजा बलि ने जब 100 यज्ञ पूर्ण कर स्वर्ग का राज्य छीनने का प्रयत्न किया तो इन्द्र आदि देवताओं ने भगवान विष्णु से प्रार्थना की। तब भगवान विष्णु वामन अवतार लेकर ब्राह्मण का वेष धारण कर राजा बलि से भिक्षा मांगने पहुंचे। गुरु के मना करने पर भी राजा बलि ने तीन पग भूमि दान कर दी। भगवान ने तीन पग में सारा आकाश, पाताल और धरती नापकर राजा बलि को पाताल लोक में भेज दिया। कहते कि पाताल लोक में राजा बलि ने भक्ति के बल पर भगवान विष्णु से रात-दिन अपने सामने रहने का वचन ले लिया। भगवान के घर न लौटने से परेशान लक्ष्मी जी को नारद जी ने एक उपाय बताया। उस उपाय का पालन करते हुए लक्ष्मी जी ने राजा बलि के पास जाकर उसे रक्षाबन्धन बांधकर अपना भाई बनाया और अपने पति भगवान विष्णु को अपने साथ ले आयीं। उस दिन श्रावण मास की पूर्णिमा तिथि थी।
विष्णु पुराण के एक प्रसंग में कहा गया है कि श्रावण की पूर्णिमा के दिन भगवान विष्णु ने हयग्रीव के रूप में अवतार लेकर वेदों को ब्रह्मा के लिये फिर से प्राप्त किया था। हयग्रीव को विद्या और बुद्धि का प्रतीक माना जाता है। महाभारत में ही रक्षाबन्धन से सम्बन्धित कृष्ण और द्रौपदी का एक और वृत्तान्त भी मिलता है। जब कृष्ण ने सुदर्शन चक्र से शिशुपाल का वध किया तब उनकी तर्जनी में चोट आ गई। द्रौपदी ने उस समय अपनी साड़ी फाडकर उनकी उंगली पर पट्टी बांध दी। यह श्रावण मास की पूर्णिमा का दिन था। कृष्ण ने इस उपकार का बदला बाद में चीरहरण के समय उनकी साड़ी को बढ़ाकर चुकाया। कहते हैं परस्पर एक दूसरे की रक्षा और सहयोग की भावना रक्षाबन्धन के पर्व में यहीं से प्रारम्भ हुई।
महाभारत में भी इस बात का उल्लेख है कि जब युधिष्ठिर ने भगवान कृष्ण से पूछा कि मैं सभी संकटों को कैसे पार कर सकता हूं। तब भगवान कृष्ण ने उनकी तथा उनकी सेना की रक्षा के लिये राखी का त्योहार मनाने की सलाह दी थी। उनका कहना था कि राखी के इस रेशमी धागे में वह शक्ति है जिससे आप हर विपत्ति से मुक्ति पा सकते हैं। इस समय द्रौपदी द्वारा कृष्ण को तथा कुन्ती द्वारा अभिमन्यु को राखी बांधने के कई उल्लेख मिलते हैं।
महाराष्ट्र राज्य में यह त्योहार नारियल पूर्णिमा या श्रावणी के नाम से विख्यात है। इस दिन लोग नदी या समुद्र के तट पर जाकर अपने जनेऊ बदलते हैं और समुद्र की पूजा करते हैं। इस अवसर पर समुद्र के स्वामी वरुण देवता को प्रसन्न करने के लिये नारियल अर्पित करने की परम्परा भी है। राजस्थान में रामराखी और चूड़ाराखी या लूंबा बांधने का रिवाज है। रामराखी सामान्य राखी से भिन्न होती है। इसमें लाल डोरे पर एक पीले छींटों वाला फुंदना लगा होता है। यह केवल भगवान को ही बाँधी जाती है। चूड़ा राखी भाभियों की चूडियों में बांधी जाती है।
उत्तरांचल में इसे श्रावणी कहते हैं। ब्राह्मण अपने यजमानों को यज्ञोपवीत तथा राखी देकर दक्षिणा लेते हैं। अमरनाथ की अतिविख्यात धार्मिक यात्रा गुरु पूर्णिमा से प्रारम्भ होकर रक्षाबन्धन के दिन सम्पूर्ण होती है। कहते हैं इसी दिन यहां का हिमानी शिवलिंग भी अपने पूर्ण आकार को प्राप्त होता है। इस उपलक्ष्य में इस दिन अमरनाथ गुफा में प्रत्येक वर्ष मेले का आयोजन भी होता है। नेपाल के पहाडी इलाकों में ब्राह्मण एवं क्षत्रीय समुदाय में रक्षा बन्धन गुरू के हाथ से बांधा जाता है। लेकिन दक्षिण सीमा में रहने वाले भारतीय मूल के नेपाली भारतीयों की तरह बहन से राखी बंधवाते हैं।
राजपूत योद्धा जब शत्रु से युद्ध करने जाते थे तब महिलाएं उनको माथे पर कुमकुम का तिलक लगाने के साथ हाथ में रेशमी धागा भी बांधती थी। इस विश्वास के साथ कि यह धागा उन्हे विजयश्री के साथ वापस ले आयेगा। राखी के साथ एक और प्रसिद्ध कहानी जुड़ी हुई है। कहते हैं मेवाड़ की रानी कर्मावती को बादशाह बहादुरशाह द्वारा मेवाड़ पर हमला करने की पूर्व सूचना मिली। रानी लडने में असमर्थ थी अत: उसने मुगल बादशाह हुमायूं को राखी भेजकर रक्षा की याचना की। हुमायूं ने मुसलमान होते हुए भी राखी की लाज रखी और मेवाड़ पहुंचकर बहादुरशाह के विरूद्ध मेवाड़ की ओर से लड़ते हुए कर्मावती व उसके राज्य की रक्षा की।

आठ पहर आराधिये, ज्योतिर्लिंग शिव रूप॥
नैनन बीच बसाये, शिव का रूप अनूप॥ 

सृष्टि के कल्याण और मंगल के लिए शिव ने स्वयं को साक्षात लिङ्ग रूप में स्थापित किया है। शिव का स्मरण आत्मा में आनंद की धारा प्रवाहित करने वाला है। महादेव का ध्यान ही अनेक सुखों का उद्गम स्थल है। शिवशम्भु का नाम और दर्शन ही मनुष्य के अनेक कष्ट को हरने के लिए पर्याप्त है। शिव ईश्वर का सबसे सरल, पवित्र और शक्तिशाली नाम है। सच्चे हृदय से शिव का स्मरण करने से अनेक पाप क्षण भर में नष्ट हो जाते है।
शिव तत्व में समाहित अनेक शिक्षाओं को हम अपने जीवन से जोड़ सकते है। जैसे त्रिकालदर्शी शिव त्रिनेत्रधारी है वे दो नेत्रों से बाहरी दृष्टि और तीसरे नेत्र से अंतर्मन में झाँकते है। मनुष्य को भी जीवन मे अपने बाहर और भीतर में अवलोकन करने वाला होना चाहिए। शिव उमापति की अंतर्दृिष्ट हमे स्वमूल्यांकन को प्रेरित करती है। उमापति नागेश्वर तो वे देव है जिन्होंने काम को भस्म कर विजय प्राप्त की है। उमाकांत तो जीवन में उपासना को महत्व प्रदान करते है वासना को नहीं। जगपालनकर्ता शिव ने तो जीवन से कामनाओ का भी अंत कर दिया। उन्हें सिर्फ राम आराधना, राम दर्शन,राम कथा श्रवण और अपने आराध्य राम नाम के अनवरत जप की ही मनोकामना रहती है। शिव के आराध्य देव श्रीराम एवं श्रीराम के ईश्वर रामेश्वर है। महादेव पार्वती से कहते है की राम नाम विष्णुसहस्त्रनाम के तुल्य है और में सदैव राम नाम का ही भजन करता हूँ। 

राम रामेति रामेति, रमे रामे मनोरमे ।
सहस्रनाम तत्तुल्यं, रामनाम वरानने ॥ 

विश्वनाथ शम्भु बहिर्मुखी होने के बजाए अंतर्मुखी होने पर बल देते है। वे महायोगी,परमार्थी, भक्तवत्सल, अभिमानमुक्त, क्षमावान एवं भक्त की मनोवांछित मनोकामना को पूर्ण करने में सक्षम है। शिव तत्व का एक और अनोखा सूत्र विशिष्ट है। भगवान चंद्रशेखर की गृहस्थी में अजीब सा विराधाभास होने पर भी सर्वत्र शांति व्याप्त है। शिव का वाहन नंदी और शक्ति का वाहन शेर है और दोनों का परस्पर वैमनस्य रहता है परंतु फिर भी शिव परिवार में यह दोनों प्रेमपूर्वक साथ में रहते है। इसी प्रकार कार्तिकेय का वाहन मोर एवं शिव के गले मे सर्प की माला, इन दोनों का भी वेर जगजाहिर है। विनायक का वाहन चूहा और शिव का सर्प, इतने सारे विरोधभास होने के बाद भी शिव परिवार में कोई वैमनस्य उत्पन्न नहीं होता है, सर्वत्र शांति ही व्याप्त है। इसी प्रकार घर को भी शिवालय का रूप देने के लिए घर के समस्त सदस्यों के स्वत्रंत अस्तित्व का सम्मान करना चाहिए। अलग जीवन, अलग विचार होते हुए भी सबके प्रति सदभाव रखना होगा। शिव तत्व को जीवन मे निहित करके हम भोजन को प्रसाद, संगीत को भजन, कर्म को पूजा, यात्रा को तीर्थयात्रा एवं जीवन को मोक्ष प्राप्ति का मार्ग बना सकते है। शिव तो जीवन मे भव्यता को छोड़कर दिव्यता को स्थान देते है।

Sweets
त्योहार पर मिठाईयों और पकवानों खूब दौर चलता है। इसके साथ यह बात भी पुख्ता हो जाती है कि आप अतिरिक्त कैलोरी लेकर अपना थोड़ा-बहुत वजन भी बढ़ा लेते हैं। तो फिर सोच क्या रहे हैं, वजन को संतुलित करने के लिए जरूर जानिए ये 10 उपाय, ताकि बढ़ता वजन नियंत्रित कर सकें.... त्योहार के समय भले ही खाने-पीने में कोई कोर-कसर न छोड़ें, लेकिन अन्य दिनों में आपको सही डाइट लेनी होगी। ताकि शरीर और बढ़े हुए वजन में एक संतुलन बनाया जा सके। जानें कैसे करना है वजन नियंत्रित

आम दिनों में अपनी डाइट पर खास तौर से ध्यान दीजिए, और इस बात पर भी कि आप जो भी खा रहे हैं वह अतिरिक्त कैलोरी लिए हुए न हो। ऐसी चीजों को डाइट में शामिल करें जिनमें फैट और कैलोरी बहुत कम हो और उर्जा भी मिलती रहे।
फल व कच्ची सब्जियों पर फोकर करें। जूस, सूप और सलाद भी बेहतर विकल्प है। यह सारी चीजें आपको उर्जा भी देंगी और शरीर से हानिकारक तत्वों को बाहर निकाल कर पाचन तंत्र को भी बेहतर बनाएंगी।
खाना पकाते समय घी-तेल का प्रयोग करने से बचें। अगर आपके लिए यह संभव नहीं हो, तो बहुत कम मात्रा में घी, तेल और मसालों का प्रयोग करें।
दिनभर में कम से कम 3 लीटर पानी जरूर पिएं। हर थोड़ी-थोड़ी देर में पानी पीते रहें। चाहें तो नींबू निचोड़कर पानी पी सकते हैं, यह स्वाद और सेहत दोनों के लिए बढ़िया रहेगा।
जिन चीजों में शर्करा की मात्रा अधिक हो उनसे बिल्कुल दूरी बना लें और खाद्य पदार्थों में वसा की मात्रा पर भी विशेष ध्यान दें।
सुबह का नाश्ता भले ही अच्छी मात्रा में करें लेकिन रात का खाना बिल्कुल हल्का हो इस बात का ध्यान रखें। रात का खाना हमेशा के समय की अपेक्षा जल्दी खाएं और खाने व सोने के समय में अंतर रखें।
एंटीऑक्सीडेंट तत्वों के लिए दिनभर में दो से तीन बार ग्रीन-टी पिएं। यह आपको हल्का महसूस कराएगी और उर्जावान बनाए रखने के साथ तनाव से भी दूर रखेगी।
दिनभर एक स्थान पर बैठे रहने के बजाए समय-समय पर उठकर चलते-फिरते रहें। सुबह या रात के समय टहलना आपके लिए फायदेमंद रहेगा। चाहें तो घर की छत पर ही चहलकदमी कर सकते हैं।
व्यायाम जरूर करें। नियमित तौर पर व्यायाम करने से आप जल्दी अपना वजन नियंत्रित कर सकते हैं। ज्यादा कुछ करने का मूड न हो तो घर पर रस्सी कूदना या बच्चों के साथ खेल-खेलना भी अच्छा तरीका है।
खाना खाने के बाद गरम या गुनगुना पानी पिएं। यह पाचनक्रिया को बेहतर करेगा और वसायुक्त भोजन करने पर पेट की चर्बी बढ़ने से रोकेगा।

Dhoni
नई दिल्ली
पूर्व तेज गेंदबाज आशीष नेहरा का मानना है कि इस साल के इंडियन प्रीमियर लीग में महेंद्र सिंह धोनी के बारे में चर्चा हो सकती है। लेकिन यह टूर्नमेंट पूर्व भारतीय कप्तान के लिए चयन ट्रायल नहीं हो सकता। धोनी टेस्ट क्रिकेट से संन्यास ले चुके हैं और पिछले साल वर्ल्ड कप के बाद से सीमित ओवरों के प्रारूप में भारत के लिए नहीं खेले हैं। उनकी वापसी और संन्यास को लेकर काफी अटकलें लगायी जा रही हैं। उनकी वापसी आगामी आईपीएल में चेन्नै सुपरकिंग्स के साथ होने की उम्मीद है, जिसका आयोजन 19 सितंबर से संयुक्त अरब अमीरात में होगा। नेहरा ने 'क्रिकेट कनेक्टिड' में कहा, 'मेरे लिए एमएस धोनी का खेल कभी भी नीचे नहीं आया था। भारत के लिए 17 टेस्ट और 120 वनडे खेलने वाले 41 साल के नेहरा ने कहा, 'वह जानते हैं कि टीम की अगुआई कैसे की जाए, वह जानत हैं कि युवाओं को आगे कैसे बढ़ाया जाए और इन चीजों को मुझे बार-बार दोहराने की जरूरत नहीं है लेकिन मुझे नहीं लगता कि इस आईपीएल से बतौर खिलाड़ी एमएस धोनी के कद या उनकी ख्याति में कोई अंतर पड़ेगा। उन्होंने कहा, 'मुझे नहीं लगता कि आईपीएल जैसा टूर्नमेंट एमएस धोनी के चयन का मापदंड होना चाहिए। यह शायद केवल बात करने का मुद्दा है।' नेहरा ने कहा कि धोनी किसी भी कप्तान के लिए पहली पसंद बने रहेंगे। अगर वह उपलब्ध होते हैं तो। उन्होंने कहा, 'जहां तक एम एस धोनी के अंतरराष्ट्रीय करियर का सवाल है तो मुझे नहीं लगता कि इस आईपीएल का इससे कुछ लेना देना है। अगर आप चयनकर्ता हैं, अगर आप कप्तान हैं, आप कोच हैं और एमएस धोनी अगर खेलने के लिए तैयार हैं तो वह सूची में मेरे लिए सबसे पहले खिलाड़ी होंगे।'

IPL
नई दिल्ली
इंडियन प्रीमियर लीग गर्वनिंग काउंसिल की बैठक में बड़े फैसले हुए। इसमें आईपीएल के शेड्यूल के अलावा कई अन्य बातों पर भी मुहर लगी। इसके बाद साफ हो गया है कि लीग का 13वां सीजन खेला जाना तय है। यह यूएई में 19 सितंबर से 10 नवंबर के बीच खेला जाएगा। साल 2014 के बाद पहली बार आईपीएल यूएई में होगा। उस सीजन में कुछ मैच यूएई में हुए थे। दुबई, शारजाह और अबु धाबी में इस लीग के मैच होंगे। इसके अलावा किन बातों पर मुहर लगी।

साढ़े सात बजे होंगे मैच

आईपीएल के मुकाबले इस बार भारतीय समयानुसार रात 8 बजे के बजाय आधा घंटा पहले यानी साढ़े सात बजे से खेले जाएंगे। प्रसारणकर्ता काफी समय से इसकी मांग कर रहे थे। उनका कहना था कि मैच देरी से शुरू होने पर देरी से खत्म होते हैं और इसका असर दर्शकों की संख्या पर पड़ेगा।

10 डबल हेडर होंगे
आईपीएल का मार्च में जो शेड्यूल जारी किया गया था उसमें सिर्फ 5 डबल हेडर थे। यानी सिर्फ पांच दिन ऐसे थे जिसमें दिन में दो मैच खेले जाने थे। इस बार खबर है कि दस दिन ऐसे होंगे जिसमें एक दिन में दो मैच खेले जाएंगे। इससे ऐसा लग रहा है कि मैच के बीच में कुछ दिनों का अंतराल भी हो सकता है। जिस दिन दो मैच होंगे उस दिन पहला मैच भी थोड़ा जल्दी शुरू होगा।

10 नवंबर को फाइनल

बीते 12 सीजन से आईपीएल का फाइनल सप्ताहंत पर ही होता आया है। लेकिन इस बार गर्वनिंग काउंसिल ने इसे मंगलवार को करवाने का फैसला किया है। 10 नवंबर को मंगलवार है और यह पहली बार होगा जब सप्ताह के बीच में इस लीग का फाइनल होगा। प्रसारणकर्ता और अन्य कई हितधारक चाहते थे कि आईपीएल का फाइनल इस बार दिवाली वाले सप्ताह में करवाया जाए। दिवाली 14 नवंबर की है। हितधारकों का कहना था कि वह दिवाली वाले सप्ताह का अधिक से अधिक इस्तेमाल कर सकें। हमने पहले भी खबर दी थी कि आईपीएल के फाइनल का तारीख बदली जा सकती है। प्रसारणकर्ताओं को लगता है कि दिवाली वाला पूरा हफ्ता ही वीकएंड की तरह होता है और वह इसका फायदा उठाना चाहते थे।

रिप्लेसमेंट
इंडियन प्रीमियर लीग की संचालन समिति ने यूएई में होने वाले टूर्नामेंट के दौरान कोविड-19 प्रतिस्थापन को मंजूरी दी है। यानी खिलाड़ियों को टूर्नमेंट के बीच से ही नए खिलाड़ी को शामिल करने की इजाजत होगी। कोरोना वायरस के चलते खिलाड़ी बदलने की छूट इस वैश्विक महामारी के दौर में मिली है।

दर्शक भी आ सकेंगे मैदान में
यूएई की सरकार ने मैदान में दर्शकों को आने की इजाजत दे रखी है। इसलिए माना जा रहा है कि लीग में मैदान में सीमित संख्या में दर्शक आ सकते हैं। हालांकि खबरों के अनुसार लीग के शुरुआती चरण में तो मैदान खाली ही रहेंगे लेकिन जैसे-जैसे टूर्नमेंट आगे बढ़ेगा मैदान में दर्शक नजर आ सकते हैं।

24 खिलाड़ियों की लिमिट
आईपीएल की कई टीमों में 27-28 खिलाड़ी शामिल हैं लेकिन नियमों के अनुसार अधिकतम 24 खिलाड़ी ही जा पाएंगे। खबरों के अनुसार टीमें 26 अगस्त के बाद ही यूएई के लिए जाएंगी। उससे पहले, बीसीसीआई का एक कैंप होगा।

चार्टेड फ्लाइट्स होंगी
सभी खिलाड़ियों के लिए चार्टेड फ्लाइट्स होंगी। यानी कोई भी खिलाड़ी कर्मशल फ्लाइट से नहीं आएगा। विदेशी खिलाड़ियों को भी चार्टेड फ्लाइट से ही यूएई पहुंचाया जाएगा। इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया के खिलाड़ी सीरीज खत्म होने के बाद इंग्लैंड से चार्टेड फ्लाइट से पहुंचेंगे। कैरेबियन प्रीमियर लीग खत्म होने के बाद वेस्टइंडीज के खिलाड़ी चार्टेड फ्लाइट से पहुंचेगे। साउथ अफ्रीका चूंकि अभी बंद है तो हालात सुधरने का इंतजार किया जा रहा है। वरना वहां की सरकार से संपर्क साधा जाएगा।

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