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Grossery Shop
नई दिल्ली
केंद्र सरकार छोटे किराना स्टोर्स के लिए नेशनल रिटेल फ्रेमवर्क तैयार करने जा रही है, जिससे वे ई-कॉमर्स प्लेटफॉ्र्स से मिलने वाली चुनौतियों का बेहतर तरीके से सामना कर सकें।  इस योजना में किराना स्टोर्स को वन-टाइम रजिस्ट्रेशन फीस, वर्किंग कैपीटल के लिए सॉफ्ट लोन और उन्हें इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम अपनाने में मदद करने जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।

अर्थव्यवस्था में 15 फीसदी योगदान देता है लोकल ट्रेड
अनुमान के मुताबिक, देश की 2.7 लाख करोड़ डॉलर की अर्थव्यवस्था में लोकल ट्रेड 15 फीसदी का योगदान देता है। देश में 6 करोड़ से भी ज्यादा बिजनेस इंटरप्राइज हैं। यह घरेलू  ट्रेड 25 करोड़ लोगों को रोजगार देता है और सालाना 15 फीसदी की दर से बढ़ रहा है। अधिकतर राज्यों में दुकानों से जुड़े नियम हैं, जिनके तहत स्टोर को रजिस्टर किया जाता है।  हर राज्य में रजिस्ट्रेशन पॉलिसी, फीस और अन्य कायदे अलग हैं। कुछ राज्यों में सालाना तो कुछ में हर पांच साल पर दुकानों को रजिस्ट्रेशन कराना होता है।

Sugar
नई दिल्ली
नई दिल्ली। महाराष्ट्र में चीनी मिलों के परिचालन अभी तक शुरू नहीं करने से चालू विपणन सत्र में देश का चीनी उत्पादन 15 नवंबर तक 64 प्रतिशत गिरकर 4.85 लाख टन पर   आ गया है। चीन का विपणन वर्ष अक्टूबर से सितंबर है। निजी चीनी मिलों के शीर्ष संगठन इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन (इस्मा) ने कहा कि 15 नवंबर 2019 तक सिर्फ 100  चीनी मिलों ने गन्ने की पेराई शुरू की है जबकि 15 नवंबर 2018 तक 310 मिलों ने पेराई शुरू कर दी थी। इस्मा ने कहा कि चीनी के चालू वितरण वर्ष के दौरान 15 नवंबर तक  4.85 लाख टन चीनी उत्पादन हुआ है। इसकी तुलना में विपणन वर्ष 2018-19 में 15 नवंबर तक 13.83 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ था। इस सत्र में महाराष्ट्र में चीनी मिलों ने  अब तक गन्ने की पेराई शुरू नहीं की है। इसकी वजह से चीनी उत्पादन में गिरावट आई है। पिछले विपणन वर्ष में 15 नवंबर तक महाराष्ट्र ने 6.31 लाख टन चीनी का उत्पादन  किया था। हालांकि, उत्तर प्रदेश में चीनी उत्पादन में सुधार आया है। 15 जनवरी 2019 तक 2.93 लाख टन चीनी का उत्पादन किया गया है। एक साल पहले की इसी अवधि में यह  आंकड़ा 1.76 लाख टन था। समीक्षाधीन अवधि के दौरान कर्नाटक में चीनी उत्पादन 3.60 लाख टन से कम होकर 1.43 लाख टन पर आ गया है। अब तक कम मिलों द्वारा परिचालन शुरू करना इसकी वजह है।

Flipcart Amazon
नई दिल्ली
व्यापारी संगठनों ने बुधवार को अमेजॉन और फ्लिपकार्ट जैसी प्रमुख ई-कॉमर्स कंपनियों के खिलाफ देश के 700 से अधिक शहरों में धरना प्रदर्शन किया। व्यापारियों के संगठन  कनफेडरेशन आफ आल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के आह्वान पर व्यापारियों ने राष्ट्रीय विरोध दिवस मनाया और अमेजॉन व फ्लिपकार्ट द्वारा अपनाएं जा रहे अनुचित व्यापार व्यवहार पर  विरोध जताया। कैट ने कहा कि अमेजॉन एवं फ्लिपकार्ट ने अपनी अनैतिक व्यापार पद्धति से ई-कॉमर्स बाजार को दूषित कर दिया है। ये कंपनियां खुलेआम सरकार की प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) नीति का उल्लंघन कर रही हैं। कैट के अनुसार प्रदर्शकारियों ने सरकार से ई-कॉमर्स पोर्टल अमेजॉन और फ्लिपकार्ट पर प्रतिबंध लगाने की मांग की है। कैट के महासचिव प्रवीन खंडेलवाल ने कहा कि व्यापारियों को अमेजॉन और फ्लिपकार्ट के भारत में व्यापार करने पर कोई एतराज नहीं है किन्तु व्यापारियों की तरह इन ई-कॉमर्स कंपनियों  को भी सरकार की एफडीआई नीति तथा अन्य कानूनों का पालन करना होगा, जिससे बाजार में समान प्रतिस्पर्धा बनी रहे। कैट ने मांग की है कि जब तक कि ये कंपनियां अपने  पोर्टल को पूरी तरह देश की एफडीआई नीति और अन्य कानूनों के अनुरूप नहीं कर लेती हैं, उनका परिचालन बंद कर दिया जाना चाहिए। कैट ने सरकार से यह भी मांग की है कि  इन कंपनियों के कारोबारी मॉडल, खातों और उनको मिले विदेशी निवेश की जांच की जानी चाहिए। कैट ने यह भी मांग की है कि यह पता लगाया जाना चाहिए कि ऐसा कौन सा  कारोबारी मॉडल है जिसमें हर साल करोड़ों रुपए का घाटा उठाने के बावजूद ये कंपनियां ग्राहकों को लगातार छूट दे रही हैं।

Indian Econimy
नई दिल्ली
भारत की आर्थिक विकास दर में बीते तिमाही में और ज्यादा गिरावट देखी गई है। ताजा अनुमान के मुताबिक भारत की विकास दर 5 फीसदी से भी नीचे जा सकती है। बता दें कि  स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, नोमुरा होल्डिंग्स इंक और कैपिटल इकोनॉमिक्स लिमिटेड के अर्थशास्त्रियों के मुताबिक सितंबर की आखिरी तिमाही में अनुमान के मुताबिक विकास दर 4.2  फीसदी से 4.7 फीसदी रही। सरकार आगामी 29 नवंबर को यह डाटा पब्लिश कर सकती है। साल 2012 के बाद से यह जीडीपी की सबसे बड़ी गिरावट है। सिंगापुर स्थित नोमुरा  होल्डिंग्स इंक की मुख्य अर्थशास्त्री सोनल वर्मा का कहना है कि हमें लगता है कि जिस जीडीपी विकास दर का अनुमान लगाया गया था, वह सही साबित नहीं हुई। एक रिपोर्ट के  अनुसार, वर्मा ने अब वित्तीय वर्ष की आखिरी तिमाही में 4.2 फीसदी विकास दर की बात कही है। वर्मा के अनुसार, कमजोर वैश्विक मांग, उच्च आवृत्ति संकेतक गिर गए हैं और घरेलू ऋण की स्थिति भी खराब है। बता दें कि केंद्रीय रिजर्व बैंक इस साल विकास दर को बढ़ाने के लिए ब्याज दर में 5 बार कमी कर चुका है। इसके साथ ही विभिन्न कंपनियों के   20 बिलियन डॉलर के टैक्स में भी कटौती की गई है। एसबीआई, मुंबई के मुख्य आर्थिक सलाहकार सौम्या कांति घोष का कहना है कि आरबीआई दिसंबर में और ज्यादा ब्याज दरों  में कटौती कर सकता है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बीते हफ्ते बताया था कि अभी यह कहना मुश्किल है कि आर्थिक मंदी अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई है।  कंपनियां अभी नए निवेश की योजना बना रही हैं और अभी उसका आकलन करने के लिए समय चाहिए। कैपिटल इकॉनोमिक्स इंक, सिंगापुर के अर्थशास्त्री शीलन शाह का कहना है  कि अभी तक जो उपाय किए गए हैं, हमें शक है कि वह विकास दर की कमजोरी को दूर करने के लिए काफी हैं। शीलन शाह ने भारत की विकास दर आखिरी तिमाही में 4.7  फीसदी आंकी है। गौरतलब है कि देश में घरेलू खपत में भी गिरावट देखी जा रही है। वित्तीय वर्ष 2019-20 की शुरुआत से ही ग्रामीण क्षेत्रों में मांग की स्थिति बदतर होती जा रही  है। देश के ग्रामीण इलाकों में एफएमसीजी, ट्रैक्टर, दोपहिया वाहनों आदि की डिमांड नहीं बन पा रही है।

फायदा उठाने के लिए सरकार देगी जमीन और इनसेंटिव

Trade War
नई दिल्ली
मोदी सरकार ट्रेड वॉर से फायदा उठाने के लिए मास्टर प्लान पर काम कर रही है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, केंद्र विश्व की 324 बड़ी कंपनियों को यहां निवेश करने के लिए जमीन  देने पर विचार कर रहा है। इन कंपनियों में एलन मस्क की टेस्ला, एली लिली ऐंड कॉर्पोरेशन, साउथ कोरिया की हनवाह केमिकल कॉर्पोरेशन, ताइवान की होन है प्रीसिसन इंडस्ट्री  कॉर्पोरेशन जैसी कंपनियां शामिल हैं। पिछले दिनों एक रिपोर्ट आई थी जिसके मुताबिक, भारत को मात्र 5300 करोड़ रुपए का फायदा हुआ, जबकि उम्मीद की जा रही थी कि भारत  का निर्यात करीब 11 अरब डॉलर (करीब 77 हजार करोड़ रुपए) बढ़ जाएगा। उस रिपोर्ट में कहा गया था कि टैरिफ वॉर का सबसे ज्यादा फायदा ताइवान, मेक्सिको और वियतनाम  जैसे देशों को हुआ था। ट्रेड वॉर का फायदा उठाने में भारत कैसे पीछे छूट गया इसको लेकर रिपोर्ट में कहा गया था कि यहां भूमि अधिग्रहण के पेंचीदा नियम और सख्त श्रम कानून  की वजह से प्रभावित कंपनियों ने भारत को चीन के विकल्प के रूप में कम चुना। इन्हीं समस्याओं को ध्यान में रखते हुए सरकार ने विदेशी कंपनियों के लिए स्पेशल मैन्युफैक्चरिंग  लैंड, आसान नियमन और कम से कम रेगुलेटरी प्रक्रियाओं के साथ आगे बढ़ने के बारे में सोचा है। रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों के लिए रेडी-टू-मूव लैंड बैंक  तैयार करेगी। वर्तमान में फैक्ट्री लगाने के लिए निवेशकों को सबसे ज्यादा जमीन अधिग्रहण करने में दिक्कतें आती हैं, क्योंकि जमीन की डील उन्हें खुद से करनी पड़ती है। ऐसे में  अगर इन निवेशकों के लिए स्पेशल लैंड बैंक तैयार हो जाता है तो वे आसानी से इसे सरकार से ले सकते हैं और समय की बर्बादी भी नहीं होगी। इसके अलावा सरकार निवेश करने  वाली कंपनियों को तरह-तरह की इनसेंटिव देने के बारे में भी सोच रही है। भारत ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के मामले में लगातार अच्छा प्रदर्शन कर रहा है। वर्ल्ड बैंक की तरफ से  जारी होने वाली इस लिस्ट में भारत अभी 63वें पायदान पर है। हालांकि 2017 के मुकाबले इसमें 37 पायदान का सुधार आया है।

Reliance
नई दिल्ली
देश की सबसे मूल्यवान कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिडेट (आरआईएल) का बाजार पूंजीकरण (एम-कैप) 10 लाख करोड़ रुपए के करीब पहुंच गया है। कंपनी का शेयर लगातार बढ़ने  की वजह उसका बाजार पूंजीकरण बढ़ रहा है। बंबई शेयर बाजार (बीएसई) में बुधवार को रिलायंस इंडस्ट्रीज का शेयर 2.47 प्रतिशत बढ़कर 1,547.05 रुपए पर बंद हुआ। कारोबार के  दौरान, शेयर 4.10 प्रतिशत बढ़कर 1,571.85 रुपए पर पहुंच गया था। यह इसका सर्वकालिक उच्च स्तर है। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) पर रिलायंस का शेयर 2.56 प्रतिशत  बढ़कर 1,548.50 रुपए पर बंद हुआ। कंपनी का शेयर तेजी से बढ़ने की वजह से उसका बाजार पूंजीकरण बढ़कर 9,80,699.59 करोड़ रुपए पर पहुंच गया। कारोबार के दौरान यह 9,96,415 करोड़ रुपए तक गया था। मुकेश अंबानी की अगुवाई वाली रिलायंस जियो ने मंगलवार को अगले कुछ हफ्तों में मोबाइल कॉल और डेटा के दाम में वृद्धि की घोषणा की है।  रिलायंस इंडस्ट्रीज ने मंगलवार को एक नया कीर्तिमान रचा। रिलायंस 9.5 लाख करोड़ रुपए बाजार पूंजीकरण का स्तर छूने वाली देश की पहली कंपनी बनी। इस साल अब तक  रिलायंस इंडस्ट्रीज का शेयर 37 प्रतिशत से ज्यादा बढ़ चुका है।

मुंगेर
 ऐतिहासिक और योग की नगरी मुंगेर हथियारों के लिए भी फेमस है। पिछले दिनों अवैध एके 47 की काफी संख्या में बरामदगी ने मुंगेर को चर्चा में ला दिया था। एक बार फिर इसी मुंगेर में  हथियारों का जखीरा मिला है। दो दर्जन से अधिक दोनाली बंदूकों के अलावा रिवॉल्वर व सैकड़ों कारतूस मिले हैं। आ्र्स का जखीरा देखकर पुलिस भी सकते में है। मिल रही जानकारी के अनुसार  मुंगेर पुलिस ने कासिम बाजार इलाके में छापेमारी कर हथियारों का जखीरा बरामद किया है। ये हथियार कहीं भेजे जाने के लिए थे। पुलिस ने चार तस्करों को भी गिरफ्तार किया है। पुलिस के  अनुसार बरामद हथियारों में 29 दोनाली बंदूक और दो राइफल के अलावा 529 कारतूस को बरामद किया है। सबसे खास बात कि तस्करों के पास से एक वेवली एस्कॉर्ट रिवॉल्वर भी बरामद की गई है। पुलिस गिरफ्तार तस्करों से पूछताछ कर  रही है। पुलिस को पूछताछ भी कई और सुराग मिलने की उम्मीद है। हालांकि अधिकारी अभी कुछ भी बताने से बच रहे हैं। 

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