78 हजार पेट्रोल पंप खोलना नहीं है फायदे का सौदा

नई दिल्ली
सरकार की देश में पेट्रोल पंपों की संख्या बढ़ाकर दोगुनी से ज्यादा करने की योजना फायदे का सौदा साबित नहीं होगी। इससे पेट्रोल पंप एक-दूसरे की बिक्री में सेंध लगाएंगे और  इनमें से कई मुनाफा कमाने में ही कामयाब नहीं होंगे। क्रिसिल रिसर्च ने गुरुवार को जारी एक रिपोर्ट में ये बातें कही हैं। पब्लिक सेक्टर की तीन ऑयल मार्केटिंग कंपनियों इंडियन  ऑयल कॉर्प, भारत पेट्रोलियम कॉर्प और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्प ने देश भर में 78,493 नए पेट्रोल पंप खोलने के लिए बीते साल नवंबर में विज्ञापन जारी किया था। हालांकि इससे  पहले से ही देश में 64,624 रिटेल आउटलेट चल रहे हैं। रिपोर्ट में कहा गया कि सरकार के स्वामित्व वाली कंपनियों की विस्तार की योजना के अलावा निजी कंपनियां भी रिटेल  आउटलेट बढ़ाने जा रही हैं। रिलायंस इंडस्ट्रीज और बीपीके संयुक्त उपक्रम और नायरा एनर्जी (पूर्व नाम एस्सार ऑयल) की अगले तीन साल के दौरान 2 हजार (प्रत्येक) पंप खोलने  की योजना है। वहीं रॉयल डच शेल इस अवधि के दौरान 150-200 पेट्रोल पंप खोलने की दिशा में काम कर रही है। इसके चलते निजी कंपनियों के पंपों की संख्या वित्त वर्ष 2030  तक 7,500-8,000 के स्तर पर पहुंचने का अनुमान है। रिपोर्ट में कहा गया कि विश्लेषण से जाहिर होता है कि आंकड़े 78 हजार से ज्यादा नए पेट्रोल पंप खोले जाने के फैसले को  सपोर्ट नहीं करते हैं। क्रिसिल रिसर्च की राय है कि यदि बिक्री का मौजूदा स्तर ही बरकरार रखना चाहते हैं तो फिलहाल इसके आधे से भी कम लगभग 30 हजार पंप खोले जाने की  ही गुंजाइश है। रिपोर्ट में कहा गया, यदि प्रस्ताव की तुलना में 30 फीसदी यानी 30 हजार पेट्रोल पंपों की स्थापना की जाती है तो इन्हें मुनाफे में आने में 12 साल लग जाएंगे। इससे  पंपों का बिक्री का स्तर हर महीने 160 किलोलीटर से ज्यादा के स्तर पर बरकरार रहने का अनुमान है, जिससे डीलर का रिटर्न 12-15 फीसदी के स्तर पर बना रहेगा।
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