सीएम नितीश और स्वास्थ्य मंत्रीयों पर मुकदमा

पटना
बिहार में एईएस (एख्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम) या इंसेफेलौपैथी से मौत का सिलसिला थमता नजर नहीं आ रहा। इस साल अभी तक मौत का आंकड़ा 143 पार कर गया है। बुधवार  की सुबह भी कुछ बच्चों की मौत हुई है। बीमारी के इस कहर के कारण केंद्र व राज्य सरकारों पर मुकदमों का सिलसिला चल पड़ा है। अस्पतालों में सुविधाओं को बढ़ाने के लिए  सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई। मुजफ्फरपुर के एसकेएमसीएच के सुपरिटेंडेंट सुनील कुमार शाही ने बताया कि अभी 68 बच्चे आइसीयू में भर्ती हैं और 65 बच्चे वार्ड  में इलाजरत हैं और आज बच्चों की मौत का आंकड़ा भी पिछले दिनों की अपेक्षा कम है। आज मात्र पांच बच्चों की ही मौत हुई है। बच्चों के परिजन कुछ जागरूक हुए हैं, जिसकी  वजह से बच्चों की तबीयत भी अब जल्दी ठीक हो रही है।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार तथा केंद्र व राज्य के स्वास्थ्य मंत्रियों के खिलाफ मुकदमा किया गया। इसके पहले भी केंद्र व राज्य के स्वास्थ्य मंत्रियों पर एक और मुकदमा दर्ज किया जा  चुका है। उधर, मानवाधिकार आयोग ने भी केंद्र व राज्य से रिपोर्ट तलब किया है। बिहार में एईएस से बच्चों की मौत का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा। इसे देखते हुए अब  सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर कर इलाज की सुविधाएं बढ़ाने तथा इसमें अभी तक हुई लापरवाही की जिम्मेदारी तय करने का आग्रह किया गया है। याचिका में प्रभावित  इलाकों में सौ मोबाइल आइसीयू बनाने तथा अस्पतालों में डॉक्टरों की संक्या बढ़ाने की मांग की गई है।
वकील मनोहर प्रताप और सनप्रीत सिंह अजमानी द्वारा सुप्रीम कोर्ट में दायर इस जनहित याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया है। इसकी सुनवाई सोमवार  को होगी। एईएस से बच्चों की मौत को लेकर मुजफ्फरपुर के अधिवक्ता पंकज कुमार ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार व अन्य के विरुद्ध मंगलवार को मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी  (सीजेएम) कोर्ट में परिवाद दाखिल किया है। इसमें उन्होंने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन, केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री अश्विनी कुमार चौबे, राज्य के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय,  स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव संजय कुमार, बिहार मेडिकल सर्विसेज एंड इंफ्रास्ट्रक्चर कॉरपोरेशन लिमिटेड (बीएमएसआइसीएल) के प्रबंध निदेशक संजय कुमार सिंह, जिलाधिकारी  आलोक रंजन घोष, सिविल सर्जन डॉ. शैलेश प्रसाद सिंह व एसकेएमसीएच के अधीक्षक डॉ. सुनील कुमार शाही को आरोपी बनाया है।
परिवाद में आरोप लगाया गया है कि सरकारी अस्पतालों में आपूर्ति की जाने वाली दवाएं केंद्रीय व राज्य प्रयोगशालाओं से जांच रिपोर्ट मिले बिना ही मरीजों को दी जाती हैं। सरकारी  अस्पतालों में जेनेरिक दवाओं की आपूर्ति की जाती है। इनकी पोटेंसी सामान्यत: छह माह की होती है, जबकि इनका उपयोग एक से दो साल तक किया जाता है। सूचना के अधिकार  के तहत मांगी जानकारी में बीएमएसआइसीएल ने बताया है कि दवाओं की गुणवत्ता की जांच निजी जांच प्रयोगशाला में कराई जाती है।

Post a Comment

[blogger]

MKRdezign

Contact Form

Name

Email *

Message *

Powered by Blogger.
Javascript DisablePlease Enable Javascript To See All Widget