दारुल उलूम के युवा मौलवी सेना में बनेंगे धर्म गुरु

मेरठ
जल्द ही भारतीय सेना में दारुल उलूम के युवा मौलवी धर्म गुरु के रूप में नजर आएंगे। उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड जोन के भर्ती निदेशालय के एडीजी मेजर जनरल डॉ. सुभाष शरण  ने बताया कि सेना में मौलवी डिग्रीधारक युवाओं के लिए धर्म गुरु बनने के लिए रास्ते खुले हैं। मेजर जनरल डॉ. सुभाष शरण ने शनिवार को देवबंद स्थित दारुल उलूम पहुंचकर यह  बात कही। दारुल उलूम के 150 साल के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है। इस दौरान एक दिलचस्प घटनाक्रम भी हुआ। दारुल उलूम के मोहतमिम मौलाना अम्दुल कासिम नौमानी  ने इस पहल की वजह पूछी, तो एडीजी सुभाष शरण ने बताया कि यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सबका साथ-सबका विकास और सबका विश्वास के आह्वान से प्रेरित है।
बता  दें, सेना में पंडित, पुजारी, गोरखा पंडित, मौलवी सुन्नी और शिया, पादरी, ग्रंथी और बौद्ध भिक्षु नियुक्त होते हैं। इनका काम बटालियन में स्थित धार्मिक स्थलों में पूजा या  इबादत कराना होता है। इसके लिए शास्त्री, मौलवी अथवा ज्ञानी की डिग्री होना अनिवार्य है। पादरी अभ्यर्थी के लिए स्थानीय बिशप से मान्यता प्राप्त होनी चाहिए और इसी तरह  महायान भी संबंधित अथॉरिटी से मान्यता प्राप्त बौद्ध भिक्षु होने चाहिए। इस मौके पर मेजर जनरल सुभाष शरण ने बताया कि उन्हें हैरानी है कि आज तक दारुल उलूम के किसी भी   छात्र ने सेना में धर्म गुरु के लिए आवेदन नहीं किया, जबकि सेना में बड़ी संख्या में मौलवी के पदों पर भर्ती होती है, लेकिन ज्यादातर सीटें खाली ही रह जाती हैं। बकौल सुभाष  शरण, सेना भर्ती निदेशालय की ओर से दारुल उलूम को सभी महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश प्रदान किए जाएंगे, जिससे वह युवाओं को सेना में भर्ती के योग्य प्रशिक्षित कर सकें। इसके बाद  नौमानी ने भी खुशी जाहिर की कि, 150 साल में पहली बार कोई सैन्य अधिकारी दारुल उलूम में युवाओं को सेना में करियर की राह दिखाने के लिए पहुंचा है।

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