डोभाल और जयशंकर को चीन पाकिस्तान से निपटने की जिम्मेदारी!

नई दिल्ली
केंद्र में फिर एक बार मोदी सरकार के आते ही विदेश नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने वाली जोड़ी वापस लौट आई है, लेकिन एक अलग किरदार में। पिछली मोदी सरकार  में एनएसए अजीत डोभाल और उस समय के विदेश सचिव एस जयशंकर की सुपरहिट जोड़ी ने भारत को न सिर्फ अंतरराष्ट्रीय मंच पर एक नया मुकाम दिया, बल्कि जटिल  चुनौतियों से निपटने में भी कामयाब रहे। मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में पाकिस्तान समर्थित आतंक का भी मुंहतोड़ जवाब दिया गया। पहले सर्जिकल स्ट्राइक और फिर बालाकोट  एयर-स्ट्राइक ने साफ कर दिया कि यह देश आतंक को बर्दाश्त नहीं करेगा। पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय मंच पर अलग-थलग करने पर भी डोभालजयशंकर की जोड़ी को कामयाबी  मिली। चीन के साथ 74 दिनों तक चलने वाले डोकलाम विवाद को हल करने में भी इस जोड़ी को बड़ी कामयाबी मिली। विवाद हल करने के लिए जयशंकर न सिर्फ अन्य देशों के  विदेश मंत्रियों से चर्चा करते हैं, बल्कि सीधे राष्ट्राध्यक्षयों से मिलकर भारत के हितों की बात करते हैं। वहीं सरकार के रहते लद्दाख के दौलत बेग ओल्डी में भी चीन ने घुसपैठ कर  डेरा जमा लिया था, उस वक्त भी एस जयशंकर ने बतौर भारतीय राजदूत चीन से सीधे संपर्क कर इस विवाद को हल करने में अहम भूमिका निभाई थी। मोदी सरकार सत्ता में  लौटी तो अजीत डोभाल को कैबिनेट मंत्री का दर्जा देकर फिर एनएसए बनाया गया, वहीं एस जयशंकर इस बार विदेश मंत्री की भूमिका में लौटे हैं, लेकिन आज भी इस जोड़ी के  लिए चुनौतियां बरकरार है। अगले पांच सालों में भी पाकिस्तान और चीन पर मोदी सरकार की खास नजर रहेगी।
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