शिवसेना की मंच से सीएम ने फूंका विराट जीत का बिगुल

मुंबई
शिवसेना-भाजपा के मजबूत होते रिश्तों के बीच मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस ने शिवसेना के 53वें स्थापना दिवस कार्यक्रम में शिरकत कर एक नया इतिहास रचा। किंग्स सर्कल स्थित  षण्मुखानंद हॉल में आयोजित स्थापना दिवस समारोह में मुख्यमंत्री ने अक्टूबर माह में होने वाले विधानसभा चुनाव में विराट जीत का बिगुल फूंका। उन्होंने कहा कि चुनाव में  ऐसी  जीत हासिल करनी है, जो भूतो न भविष्यति हो।
सीएम ने कहा कि हमें सत्ता के लिए कुर्सी नहीं चाहिए। मुख्यमंत्री कौन, मंत्री कौन? इसका महत्व नहीं है। मीडिया में इस तरह की चर्चा चलती है। उस पर विचार करने की जरूरत  नहीं है। स्वर्गीय बाला साहेब ठाकरे ने महाराष्ट्र को सुजलाम-सुफलाम करने का जो सपना देखा था, हमारा लक्ष्य उसे ही पूरा करना है। इसके लिए हमें प्रचंड बहुमत से युति सरकार  बनानी है। बेवजह के मसलों पर चर्चा नहीं करनी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि शिवसेना और भाजपा वाघ-सिंह की जोड़ी है और जब वाघ-सिंह की जोड़ी एकसाथ आती है, तो जंगल पर कौन राज करेगा, यह बताने की जरूरत नहीं है। ऐसे  में 56 दल एक साथ आए या फिर 156 दल एकत्र आए, जनमत वाघ-सिंह को मिलेगा, यह तय है। देश और महाराष्ट्र के लिए आए हैं एक साथ सेना-भाजपा संबंधों में तनातनी पर  मुख्यमंत्री ने कहा कि सेना भाजपा की युति सबसे अधिक समय तक चलने वाली युति है। यह सही है कि इसमें तनाव था, लेकिन दो सगे भाई एक साथ रहते हैं, तो कभी कभी  उनमें भी तनातनी हो जाती है। सेनाभाजपा के हर कार्यकर्ता की इच्छा थी कि यह तनाव दूर हो। हमने यह तनाव दूर किया है। आज देश और महाराष्ट्र के लिए शिवसेना और भाजपा  एक साथ आए हैं। लगा नहीं किसी दूसरी जगह आया हूं मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले चारपांच दिनों से चर्चा थी कि शिवसेना के स्थापना दिवस पर सीएम को बुलाया है? क्या वे जाएंगे? उन्हें सही में बुलाया है? मुझे आश्चर्य है कि यह सवाल न तो मेरे मन में था और नहीं शिवसेना पक्ष प्रमुख उद्धव ठाकरे के मन में, लेकिन अनेक लोगों के मन में सवाल उठ  रहे थे। मैं यहां बाला साहेब ठाकरे का आशीर्वाद लेने, उद्धव जी के प्रेम और शिवसैनिकों की ऊर्जा लेने आया हूं। उन्होंने कहा कि शिवसेना के मेले में जाते वक्त कभी लगा ही नहीं  कि कहीं दूसरी जगह जा रहा हूं। सीएम ने कहा कि उनके जीवन की शुरुआत भगवा से हुई। हमारा हिंदुत्व संकुचित नहीं है। किसी भी जात-पात को न मानने वाला व्यक्ति जो देश  को मातृभूमि मानता है, वह हिंदू है।

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