मराठी भाषा को लेकर सरकार गंभीर

मराठी भाषा को बचाने नहीं, बल्कि बढ़ाने की जरूरत


मुंबई
राज्य के मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस ने कहा कि डिजिटल स्कूल, अभिनव पहल से मराठी स्कूलों की तरफ लोगों का रुख बढ़ रहा है। मराठी भाषा को सिर्फ बचाने की जरूरत नहीं,   बल्कि इसे बढ़ाने का प्रयत्न किए जाने की जरूरत है। सोमवार को मराठी भाषा को लेकर आजाद मैदान में आंदोलन करने वाले चौबीस संगठनो (यूनियन ) के प्रतिनिधियों ने विधानभवन में मुख्यमंत्री फड़नवीस से मुलाकात की। मुलाकात में प्रतिनिधियों ने मराठी भाषा को अनिवार्य करने की मांग सीएम फड़नवीस से की। जिसे आश्वस्त करते हुए  मुख्यमंत्री ने कहा कि मुझे बहुत खुशी है, मराठी भाषा को लेकर कोई लड़ाई लड़ रहा है। प्रतिनिधियों द्वारा मराठी भाषा को अनिवार्य करने के नीतियों का स्वागत करते हुए  मुख्यमंत्री फड़नवीस ने कहा कि अन्य राज्यों की तुलना में महाराष्ट्र स्कूलों में अनुदानित खर्च सबसे अधिक खर्च करने वाला राज्य है।
डिजिटल स्कूल, अभिनव उपक्रम से आज मराठी स्कूलों की तरफ झुकाव बढ़ रहा हैं। अंग्रेजी माध्यम वाले अन्य स्कूलों में जाने वाले बच्चे इस पहल के कारण मराठी स्कूलों में  वापस आए हैं। राज्य के पास स्कूली शिक्षा के लिए संसाधनों की किसी भी प्रकार कमी नहीं है और आगे भी किसी तरह की कमी का सामना नहीं होने दिया जाएगा। सीएम फड़नवीस  ने कहा कि इसी के साथ ही, स्कूलों में गुणवत्ता बढ़ाने के लिए और उसे बनाए रखने के लिए प्रयास करना पड़ेगा। मराठी भाषा को महज बरकार रखने के लिए नहीं है, बल्कि बढ़ाना  चाहिए और अधिक समृद्धशाली बनाने के लिए समयबद्ध तरीके से प्रयास करना होंगा। उन्होंने कहा कि इन प्रयासों के लिए निधि की कोई कमी नहीं पड़ेगी और मराठी भाषा के  विकास के लिए कानून में किए जाने वाले सकारात्मक प्रयास किया जाएगा। वहीं सांस्कृतिक मामलों के मंत्री विनोद तावड़े ने कहा कि सरकार मराठी भाषा के संवर्धन के लिए सभी  प्रयास कर रही है। मराठी भाषा के विकास के लिए विभिन्न नवीन उपक्रमों कार्यान्वित किया जा रहा हैं। मराठी भाषा संवर्धन के लिए आंदोलन में भागीदारी की संख्या बढ़ें, ऐसी   अपेक्षा है। मराठी भाषा को वैभव मिलें, इस बाबत सभी के प्रयास महत्वपूर्ण साबित होंगे। इसका सभी घटकों का स्वागत करना चाहिए। इस चर्चा के दौरान स्कूलों और जूनियर  कॉलेजों में मराठी भाषा अनिवार्य करने, मराठी शिक्षा कानून, मराठी भाषा को अभिजात दर्जा, मराठी भाषा भवन, मराठी भाषा विकास प्राधिकरण की स्थापना और पढ़ने की संस्कृति  को बढ़ाने के प्रयासों के बारे में भी चर्चा की गई। इस बैठक के दौरान मंत्री विनोद तावडे, स्कूली शिक्षा मंत्री आशीष शेलार, डॉ. नीलम गोरे, मनीषा कायंदे, मेधा कुलकर्णी, हेमंत  टकले, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव भूषण गगराणी उपस्थित थे।
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