योग और व्यायाम

योग शरीर मन और बुद्धि को ठीक से प्रशिक्षित और एकीकृत करते हुए अनंत क्षमता को साकार करने का साधन है। योग हमें दिनप्रति िदन के जीवन में भी अधिक कुशल बनने में मदद करता है। यह हमें बेहतर स्वास्थ्य की ओर ले जाता है और भलाई की भावना और सार्वभौमिक मूल्यों के प्रति हमारी संवेदनशीलता को बढ़ाता है। दरअसल मौजूदा दौर में   जबकि हम जीवन शैली से संबंधित बीमारियों और तनाव से घिरे हुए हैं ऐसे में योग मानव जाति के लिए एक वास्तविक वरदान बन गया है। इन कारणों से हर दिन योग की प्रासंगिकता और लोकप्रियता बढ़ रही है। प्रत्येक भारतीय इस तथ्य पर गर्व कर सकता है कि योग भारत की आत्मा में उत्पन्न हुआ और प्रस्फुटित हुआ। अक्सर अनेक लोग यह  सवाल करते हैं कि व्यायाम के अन्य रूपों की तुलना में योग में क्या विशेष बात है। व्यायाम के सभी प्रकार शरीर और मन को असंख्य लाभ प्रदान करते हैं। हालांकि, योग करने से  जो लाभ होते हैं, वे अन्य प्रकार के व्यायामों से भी प्राप्त होते हैं। अधिकांश व्यायाम वसा को कम करने और मांसपेशियों के विकास के लिए तेजी से शारीरिक मूवमेंट पर निर्भर करते हैं। इसके विपरीत, योग का उद्देश्य शरीर के सभी हिस्सों को शिथिल करना और शरीर को, हमारी प्राण ऊर्जा को अच्छी तरह से शुद्ध करना है। यह हमारे सभी अंगों और  ग्रंथियों के स्वास्थ्य में सुधार करता है और रोग को कम करता है। यह हमारी नसों को शुद्ध करता है, हमारे दिमाग को मजबूत करता है और हमारी एकाग्रता की शक्ति को बढ़ाता  है। यह मांसपेशियों को आराम और मजबूती भी देता है। योग अवसाद को कम करने और हंसमुख स्वभाव को बनाए रखने में मदद करने के मामले में किसी भी अन्य व्यायाम की  तुलना में अधिक प्रभावी है। अन्य अभ्यासों के विपरीत योगासन उचित रूप से श्वास लेते हुए किए जाते हैं। उसी समय हमें अपने शरीर की प्रत्येक हलचल पर पूरी सजगता के साथ  नजर रखनी चाहिए। इस तरह कोई भी व्यक्ति अपने मन को शांत बना सकता है और ध्यान संबंधी शांति का अनुभव कर सकता है। दरअसल विश्राम ऊर्जा का उचित चैनलाइजेशन  और जागरूकतायो ग अभ्यास के ये तीन आधार हैं। अन्य अभ्यासों के विपरीत प्रतिदिन सिर्फ एक या दो घंटे योग का अभ्यास करना हमारे लिए पर्याप्त नहीं है। अंतत: यह जीवन  का एक तरीका बन जाना चाहिए।
यदि कोई गंभीर बीमारी से पीड़ित व्यक्ति ठीक होना चाहता है, तो उसे दवाई लेनी चाहिए। लेकिन साथ ही उसे अपने आहार का ध्यान भी रखना होगा और पर्याप्त आराम भी करना   होगा। इसी तरह, योग के पूर्ण लाभों को हासिल करने के लिए हमें सार्वभौमिक मूल्यों में निहित एक अनुशासित जीवन जीना चाहिए। मन लगाकर योग का अभ्यास करने से हम  अंतत: जीवन में हर क्रिया को जागरूकता के साथ कर पाएंगे। इस तरह, हम अपने विचारों और भावनाओं में सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं। धीरे-धीरे, हम अपने ध्यान में अधिक  एकाग्रता प्राप्त कर सकते हैं और अंतत: आत्म-साक्षात्कार प्राप्त कर सकते हैं। योग स्वस्थ जीवन के साथसाथ आंतरिक और बाहरी पवित्रता के संदेश को बढ़ावा देता है। यह सभी  प्राणियों के प्रति अहिंसा का संदेश देता है और एकता के एक ऐसे सूत्र में बांधता है, जो सभी बाधाओं से भी ऊपर है। इन कारणों से, योग को बढ़ावा देने से समाज में प्रेम और  एकजुटता बढ़ेगी और दुनिया में शांति आएगी। योग के माध्यम से मानवता उच्च शारीरिक मानसिक और आध्यात्मिक स्तर प्राप्त कर सकती है।

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