यूएस ने भारत को चेताया

नई दिल्ली
अमेरिका और चीन के बीच काफी लंबे समय से ट्रेड वॉर चल रहा है। ऐसे में अमेरिका ने भारत को चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर कोई भारतीय कंपनी हुआवे या उसकी सहयोगी  कंपनियों को अमेरिका में बने पार्ट्स या प्रोडक्ट्स सप्लाई करती है, तो उसके खिलाफ कार्यवाई हो सकती है। इसे भारत पर चाइनीज टेलीकॉम इक्विपमेंट कंपनी के खिलाफ कार्रवाई  के लिए दबाव बनाने की पहल माना जा रहा है। अमेरिका का पत्र मिलने के बाद मिनिस्ट्री ऑफ एक्सटर्नल अफेयर्स ने हुवावे पर लगे अमेरिकी प्रतिबंधों के भारतीय कंपनियों पर  पड़ने वाले असर पर डिपार्टमेंट ऑफ टेलीकम्युनिकेशंस, नीति आयोग, मिनिस्ट्री ऑफ इलेक्ट्रॉनिक्स, मिनिस्ट्री ऑफ कॉमर्स और प्रिंसिपल साइंटिफिक एडवाइजर की राय मांगी है।  सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि मिनिस्ट्री ऑफ एक्सटर्नल अफेयर्स की तरफ से तीन काम करने के लिए कहा गया है- हुवावे को अमेरिका में बने सॉफ्टवेयर/इक्विपमेंट मुहैया कराने वाली इंडियन कंपनियों के खिलाफ उसकी तरफ से प्रतिबंध लगाए जाने की संभावना सहित उसकी तरफ से मुहैया कराई सूचना की जांच कराई  जाए, प्राग में हालिया 5जी सिक्योरिटी कांफ्रेंस की सिफारिशों पर राय मुहैया कराई जाए और पूरे मामले में राय दी जाए। मई में प्राग में हुए 5जी सिक्योरिटी कांफ्रेंस के दौरान  अमेरिका की तरफ से जारी सूचना में हुवावे के इक्विपमेंट्स पर उसकी तरफ से हाल में लगाए गए बैन के अलावा चीन में रजिस्टर्ड 35 कंपनियों और हुवावे श्रीलंका, हुवावे पाकिस्तान और हुवावे हांगकांग जैसी कंपनी की सहयोगी फर्मों की सूची शामिल थी। प्राग समिट की सिफारिशों के मुताबिक हर देश का कम्युनिकेशन सिस्टम टिकाऊ और सुरक्षित   तरीके से डिजाइन किया जाना चाहिए और उसकी अपनी सिक्योरिटी पॉलिसी होनी चाहिए। 32 देशों के टेलीकॉम चीफ के पार्टिसिपेशन वाले कांफ्रेंस के लिए चीन को नहीं बुलाया गया था।
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