मिशन 2022 के लिए साधा क्षेत्रीय और जातीय संतुलन

लखनऊ
उत्तर प्रदेश में वर्ष 2014 से सभी आम चुनावों में विजय पताका फहरा रही भाजपा ने योगी मंत्रिमंडल के पहले विस्तार के जरिये 2022 जीतने की भूमिका तैयार की है। जातीय और क्षेत्रीय  संतुलन साधने के साथ ही मंत्रिमंडल विस्तार में भाजपा के प्रति निष्ठा रखने का इनाम दिया गया है। जिन मंत्रियों के चलते सरकार की साख पर बट्टा लग रहा था उनकी छुट्टी कर यह भी संदेश दिया गया है कि साफ सुथरी छवि के लोग ही सरकार में रह पाएंगे।
अब योगी टीम के कुल 56 सदस्यों में 27 अगड़े, 21 पिछड़े और सात अनुसूचित जाति के मंत्रियों के अलावा एक मुस्लिम मंत्री भी शामिल हैं। बुधवार को जिन 23 मंत्रियों को शपथ दिलायी गयी  उनमें दो क्षत्रिय, छह ब्राह्मण, तीन वैश्य, एक गुर्जर, एक पाल, दो कुर्मी, दो जाट, एक राजभर, एक कश्यप और एक लोध के साथ अनुसूचित जाति के तीन मंत्री हैं। मार्च 2017 में योगीसरकार  के शपथ ग्रहण में रमापति शास्त्री और प्रोफेसर एसपी सिंह बघेल अनुसूचित जाति से कैबिनेट मंत्री बने थे। सांसद बनने के बाद बघेल के इस्तीफे से एक पद रिक्त था।
इस विस्तार में कानपुर नगर के घाटमपुर की कमल रानी वरुण को कैबिनेट मंत्री बनाकर अनुसूचित जाति का यह कोटा भरा गया है। पासी समाज से आने वाली कमल रानी सांसद भी रह चुकी  हैं। पासी समाज ने लोकसभा चुनाव में भाजपा का खुलकर साथ दिया था। मैनपुरी के भोगांव क्षेत्र के विधायक रामनरेश अग्निहोत्री ने लोकसभा चुनाव में सपा के गढ़ में बिगुल बजा दिया। सपा  संस्थापक मुलायम सिंह यादव के क्षेत्र में भाजपा की हनक बनाने की वजह से उन्हें सीधे कैबिनेट मंत्री बनने का मौका मिला। संगठनात्मक पृष्ठभूमि के अग्निहोत्री की कार्यकर्ताओं में भी पकड़ है।  दूसरे रीता बहुगुणा जोशी के इस्तीफे से रिक्त हुई कैबिनेट में ब्राह्मण सीट को भी उनके जरिये भरा गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने चार मंत्रियों ओमप्रकाश राजभर, धर्मपाल सिंह,  नुपमा जायसवाल और अर्चना पांडेय की छुट्टी करने में जहां उनके खिलाफ शिकायतों का संज्ञान लिया, वहीं कई लोगों की निष्ठा और समर्पण को भी महत्व दिया। डॉ. महेंद्र सिंह ने ग्राक्य विकास विभाग  के तबादले में जिस तरह की पारदर्शी व्यवस्था बनाई, उसका उन्हें कैबिनेट मंत्री के रूप में तोहफा मिला। दूसरे राज्यों में प्रभावी चुनावी प्रबंधन से डॉ. महेंद्र भाजपा के शीर्ष नेतृत्व की भी पसंद  बन गए। कैबिनेटमंत्री के रूप में प्रोन्नति पाने वाले सुरेश राणा मुख्यमंत्री के करीबी होने के साथ ही विपरीत परिस्थितियों के बावजूद गन्ना किसानों को राहत देने में कामयाब रहे। योगी सरकार में गन्ने को लेकर कोई बड़ा आंदोलन नहीं हुआ। राणा पश्चिम में हिंदू चेहरे के रूप में भी पहचाने जाते हैं।
पश्चिम के प्रभावी जाट चेहरा चौधरी भूपेंद्र सिंह ने पंचायती राज विभाग में शौचालय निर्माण में बेहतर भूमिका निभायी और संगठन से समन्वय बनाने के साथ ही विवाद से भी दूर रहे। भाजपा की सहयोगी सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर ने जब विद्रोह करते हुए सरकार के लिए मुश्किल खड़ी की तो अनिल राजभर ने ही उन्हें ललकारा। राजभर बिरादरी के  बीच वह भाजपा के सिंबल बन गए। लोकसभा चुनाव में राजभर ने चंदौली में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्हें पार्टी ने कैबिनेट का इनाम दिया है। सरकार में बेहतर कार्य करने के साथ  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी से आने वाले नीलकंठ तिवारी राज्यमंत्री से प्रोन्नति पाने वाले अकेले मंत्री हैं। वह पूर्वांचल में ब्राह्मण चेहरे के रूप में भी उभर रहे हैं। जिन मंत्रियों  के इस्तीफे हुए उनकी जाति से मंत्री जरूर बनाये गए हैं। वित्त मंत्री राजेश अग्रवाल के इस्तीफे के बाद मुज फरनगर के कपिलदेव अग्रवाल को स्वतंत्र प्रभार देकर जातीय भरपाई की गई है। 
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