घोटाले के चक्रव्यूह मे घिरे अजित पवार सहित 50 नेता

मुंबई हाईकोर्ट ने दिया एफआईआर दर्ज करने का आदेश


मुंबई
महाराष्ट्र राज्य सहकारी बैंक (एमएससी) में हुए कथित 25 हजार करोड़ रुपए के कर्ज वितरण घोटाले प्रकरण में बंबई उच्च न्यायालय ने पुलिस को पांच दिनों में एफआईआर दर्ज  करने का आदेश दिया है। कोर्ट के आदेश से बैंक के संचालक मंडल में शामिल राष्ट्रवादी कांग्रेस के नेता अजित पवार, मधुकर चव्हाण, हसन मुश्रिफ, विजय सिंह मोहित पाटिल  सहित 50 नेता मुश्किल में घिर गए हैं। सुरेंद्र अरोरा की याचिका पर हाईकोर्ट ने पुलिस को अगले पांच दिनों में एफआईआर दाखिल करने का निर्देश दिया। राज्य के अग्रणी बैंक के  रूप में पहचाने जाने वाले महाराष्ट्र राज्य सहकारी बैंक ने नियमों के विरुद्ध जाकर हजारों करोड़ रुपए के कर्ज का वितरण किया। नेताओं के अपनी मर्जी की संस्थाओं और व्यक्तियों  को कर्ज देने से बैंक संकट में आ गया और रिजर्व बैंक को प्रशासक नियुक्तकरने पर मजबूर होना पड़ा। इस संबंध में आरटीआई कार्यकर्ता सुरेंद्र अरोरा ने हाईकोर्ट में एक जनहित  याचिका दायर की। इस याचिका में उन्होंने कहा कि नाबार्ड, सहकारिता और चीनी आयुक्त, कैग इत्यादि की रिपोर्ट के बावजूद इस मामले में एफआईआर दर्ज नहीं की गई। उन्होंने  इस प्रकरण में एफआईआर दर्ज करने की मांग की। इस मामले में हाईकोर्ट के निर्देश देने के बाद मुंबई पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने जनवरी महीने में अरोरा का जवाब रिकॉर्ड  किया, लेकिन इसके बाद कोई कार्रवाई नहीं की। इस पर हाईकोर्ट ने आर्थिक अपराध शाखा से सवाल किया कि एफआईआर दर्ज क्यों नहीं की गई तब आर्थिक अपराध शाखा ने कहा  कि अरोरा की शिकायत में कोई तथ्य नहीं पाए गए। इसके बाद न्यायाधीश सत्यरंजन धर्माधिकारी व न्यायाधीश संदीप शिंदे की खंडपीठ ने 31 जुलाई को याचिका पर अपना फैसला  सुरक्षित रखा। गुरुवार को खंडपीठ ने अपना फैसला सुनाते हुए याचिकाकर्ता की मांग को मंजूर करते हुए पुलिस को एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया।
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