देश और जनता के सरोकारों से होगा जुड़ना

कांग्रेस के लिए यह मानना अस्वाभाविक नहीं था कि वही देश है या जो वह तय करती है या सोचती है, वह देश सोचता है। कोई भी व्यक्ति या संस्थान जब वर्षों ऐसी अवस्था में रहता   है। जब उसकी प्रभुसत्ता को चुनौती देने वाले लोग दूर-दूर तक नहीं दिखते, तो ऐसा हो जाता है। 2014 तक के काल को देखें, तो विफल जनता पार्टी और जनता दल के प्रयोग के  बाद पहली बार लगभग छह साल तक अटल बिहारी के नेतृत्व में राजग सरकार सत्ता में रही, परंतु अपने दम पर बहुमत न होने की स्थिति में भाजपा उन मुद्दों पर कुछ नहीं कर   पाई, जो उसके अस्तित्व के आधार विंदु थे। मसलन राम मंदिर , समान नागरी कानून और अनुच्छेद 370 हटाना। पहली बार 2014 में पूर्ण बहुमत से भाजपा सरकार  बनी और उसके बाद उक्त आधार विंदुओं के साथ देश के हर विकास के हर क्षेत्र में कांग्रेस से इतर दूसरी कार्यशैली का श्री गणेश हुआ, जिसमें संकल्पना और क्रियान्वयन सरकार ही  करती आई, परंतु करते समय जन आकंक्षाओं को और जन आवश्यकताओं का भी पूरा ध्यान रखा गया और उसका फल धरातल पर खड़ी जनता तक कैसे पहुंचे? उसका पूरा का पूरा  ध्यान सख्ती से रखा गया। कांग्रेस की सोच अच्छी थी, परंतु नीचे तक फल पहुंचाने में वह नाकाम रही या पहुंचा तो बहुत कम। परंतु मोदी युग में फल इच्छुक और लक्षित वर्ग तक   पहुंचा और बिना किसी भेदभाव के या तुष्टिकरण के पहुंचा। यदि जो चाहिए वह आप तक सीधे से पहुंच रहा है, तो आप सवाल करेंगे और यही कांग्रेस के साथ-साथ समग्र विपक्ष के   साथ हो रहा, लोग सवाल कर रहे हैं, तो इनके कार्यों में सिर्फ नारे और वादे पा रहे हैं। साथ ही यह दंभ भी पा रहे हैं कि हम राजा हैं और हम बेहतर सोचते हैं। जिसके कारण  जनता रोज इन्हें नकार रही है और इसी का प्रतिफल है कि इन्होंने हर कर्म कर लिया। पानी पी-पी कर मोदी को उनकी नीतियों को कोसा, फिर भी उनकी पार्टी ने और उनके   सहयोगियों ने 2019 में ज्यादा सीटें लाकर जनता का अनुमोदन किसे है यह डंके की चोट पर दिखा दिया। कांग्रेस सहित पूरा विपक्ष अपनी नीतियों से, जनता के सरोकारों से दूर जा  चुका है, जबकि मोदी का हर कार्य जनता की आवश्यकताओं का, आकांक्षाओं का आइना है। अब लगता है कि इस दोहरी करारी मार के बाद कांग्रेस सहित विपक्ष को यह बात समझ  आ रही है कि मोदी को खलनायक बनाकर,  उलटा-सीधा कहकर उन्हें कुछ हासिल नहीं होने वाला। कारण उनका मुकाबला जिस मोदी से है वह जननायक हैं, जिस पर जनता का  भरोसा अनायास ही नहीं आया है, बल्कि जिन बातों को लेकर जनता भ्रमित थी, जिनके बारे में यह कोई कहता नहीं था कि यह कभी होगा, उसे मोदी ने करके दिखाया है। विपक्ष को  उस जनता का विश्वास जीतना है, जिसने उन्हें खारिज किया है और सतत खारिज कर रही है। कारण उन्होंने अपनी इच्छा और आकांक्षा को जनता की इच्छा मानने की गलती की  है उसकी आवश्यकता नहीं समझी, उस पर निर्णय थोपा है। वह अच्छी सड़क, बिजली आपूर्ति, दवाई, घर और छूल्हे की गैस जैसी छोटी-छोटी चीजों के लिए तड़पती रही और आपके  लोग मालामाल होते रहे और गरीबी हटाओ को झूठा नारा देते रहे। कोई गरीबी हटाने के नाम पर, कोई जाति के नाम पर राजनीतिक दुकान खोलकर अपनी और अपनों के लिए लोगों  का हक मारता रहा, उन्हें लूटता रहा, तो लड़ाई मोदी से नहीं अपने काले अतीत से है। उस सोच से, जिसने विकल्प सामने आते ही अस्तित्व ही संकट में डाल दिया है। यदि अस्तित्व  बचाना है, जो जन सरकारों और देश समाज की जरूरतों को वरीयता देनी होगी। यदि ऐसा करोगे, तो जनता खुद आपको हाथोहाथ लेगी नहीं तो ऐसे ही किनारे भी पड़े रहोगे। इसमें  संदेह नहीं है और अब जो मंथन जयराम रमेश ने शुरू किया है वही सही मंथन है विपक्ष का विध्वंसक मोदी ने नहीं वह रीति-नीति और सोच है, जिसने देश को खोखला कर दिया  था और जिस पर कोई राह नहीं दिख रही थी। मोदी युग यह दिखा रहा कि प्रगति के रास्ते उक्त सोच से अलग और बेहतर भी हो सकते हैं। अब विपक्ष को मोदी से बेहतर मॉडल  सामने लाना होगा और करके दिखाना होगा, नहीं तो उसे इस दुर्दशा से कोई नहीं निकाल सकता, पुरानी रीति-नीति और सोच तो एकदम नहीं।

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