पंच तत्व में विलीन जेटली

नई दिल्ली
लंबी बीमारी के बाद पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली का दिल्ली एक्स में 24 अगस्त, शनिवार को निधन हो गया। उनका रविवार को राजकीय सम्मान के साथ निगम बोध घाट पर  अंतिम संस्कार किया गया और वे पंचतत्व में विलीन हो गए। बेटे रोहन जेटली ने उन्हें मुखाग्नि दी। इस मौके पर सत्ता पक्ष के साथ विपक्ष ने भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। इस  मौके पर उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू, गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, रेल मंत्री पीयूष गोयल, महिला मंत्री स्मृति ईरानी सहित भाजपा  शासित राज्यों के मुख्यमंत्री और राज्यपाल के अलावा कई कांग्रेस नेताओं, स्वामी रामदेव, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल, उपमुख्यमंत्री मनीष  सिसौदिया आदि ने उन्हें श्रद्धांजलि दी।
इससे पहले उनका पार्थिव शरीर दीनदयाल मार्ग स्थित भाजपा मुख्यालय पर रविवार सुबह 10 बजे रखा गया, जहां भारी संख्या में भाजपा कार्यकर्ताओं और अन्य लोगों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी। शनिवार को भाजपा के बड़े नेता ही नहीं विपक्ष के बड़े नेता भी श्रद्धांजलि देने दिल्ली स्थित उनके आवास पर पहुंचे। उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू, गृह मंत्री अमित शाह,  रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, रेल मंत्री पीयूष गोयल, महिला मंत्री स्मृति ईरानी सहित राज्यों के मुख्यमंत्री और राज्यपाल उन्हें श्रद्धांजलि दी। उन्हें श्रद्धांजलि  देने वालों में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, राहुल गांधी, मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमल नाथ, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, ओडिशा के  मुख्यमंत्री नवीन पटनायक, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मोतीलाल वोरा, राकांपा नेता शरद पवार और प्रफुल्ल पटेल, आरएलडी नेता अजीत सिंह और  आंध्र प्रदेश के पूर्व सीएम और तेदेपा नेता एन. चंद्रबाबू नायडू शामिल रहे। उन्हें पार्टी और सरकार का संकट मोचक माना जाता था।

पीएम ने असाधारण राजनीतिज्ञ, बुद्धिजीवी और कानून का जानकार बताया 
पीएम मोदी ने जेटली को असाधारण राजनीतिज्ञ, बुद्धिजीवी और कानून का जानकार बताया। उनके अनुसार, जेटली स्पष्टवादी नेता थे जिन्होंने देश को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण  योगदान दिया। प्रधानमंत्री मोदी के अनुसार, जेटली जीवन से भरपूर, हाजिर जवाब, विनोदी स्वभाव के साथ बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे, यही कारण है कि उन्हें समाज के हर वर्ग के  लोग चाहते थे। वे भारत के संविधान, इतिहास, शासकीय नीति, शासन और प्रशासन के बारे में गहरी जानकारी रखते थे। उन्होंने कहा कि भाजपा और अरुण जेटली का अटूट बंधन  था। प्रखर छात्र नेता के रूप में, आपातकाल के दौरान वह लोकतंत्र की रक्षा में अग्रणी रहे। बहरीन में अपने दौरे के एक भाषण में उन्होंने कहा कि जब सभी कृष्ण जन्मोत्सव मना  रहे हैं, उस समय मेरे भीतर एक शोक है। मैं गहरा दर्द दबाए हुए बैठा हूं।

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