सस्ते बिस्कुट से जीएसटी घटाने के पक्ष मे सरकार

मुंबई
बिस्कुट सहित अन्य उत्पाद बनाने वाली कंपनी पारले एग्रो की तरफ से मंदी की वजह से 10 हजार कर्मचारियों की छटनी की खबर पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए राज्य के वित्त  और नियोजन मंत्री सुधीर मुनगंटीवार ने कहा कि जीएसटी का भुगतान कंपनी नहीं, उपभोक्ता करते हैं, साथ ही महाराष्ट्र सरकार ने पहले ही कम कीमत वाले बिस्कुट पैकेट्स पर  कम जीएसटी वसूलने की भूमिका अपनाई थी, लेकिन कई राज्यों ने इसका विरोध किया। अब सरकार की तरफ से जीएसटी काउंसिल की बैठक में इस मुद्दे को दोबारा उठाया जाएगा।  वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार ने जीएसटी काउंसिल की बैठक में बिस्कुट पर दो श्रेणियों में जीएसटी लगाने का सुझाव दिया था। पांच रुपए से कम कीमत वाले बिस्कुट पर कम  जीएसटी लगाने का सुझाव था, लेकिन सभी राज्य इसके लिए तैयार नहीं हुए। इस तरह सभी प्रकार के बिस्कुट पर 18 फीसदी जीएसटी लगाया गया। मुनगंटीवार ने कहा कि जीएसटी  के पहले आक्ट्राय, एक्साइज और वेट को मिलाकर कुल 20.63 फीसदी कर था। इसलिए बिस्कुट को दो फीसदी की छूट देकर 18 फीसदी जीएसटी की श्रेणी में रखा गया। उन्होंने कहा   कि बिस्कुट से सालाना 35 हजार करोड़ रुपए का राजस्व मिलता है। बता दें कि पारले कंपनी ने मंदी की मार पड़ने के कारण दस हजार कर्मचारियों की छटनी के संकेत दिए हैं।  ग्रामीण क्षेत्र के संकट के कारण फास्ट मूविंग कंज्यूमर गुड्स (एफएमसीजी)वाली उपभोक्ता वस्तुओं की बिक्री पर पिछली कुछ तिमाहियों से काफी असर पड़ा है। पारले प्रोडक्ट्स के  प्रमुख मयंक शाह ने कहा था कि जीएसटी के तहत कर में राहत नहीं मिली तो कंपनी को दस हजार कर्मचारियों की छटनी करनी पड़ सकती है। नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव  कुमार के बयान पर वित्त मंत्री ने कहा कि यह सही बात है कि विश्व के कई देशों में मंदी है, लेकिन भारत की विकास रफ्तार अमेरिका से अधिक है। हमने अपनी विकास दर बढ़ाने की चिंता करनी चाहिए।
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