जीएसटी से राफेल डील तक सबसे बड़े ट्रबलशूटर रहे जेटली

नई दिल्ली
पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में ट्रबलशूटर रहे। वे प्रधानमंत्री और तत्कालीन गृह मंत्री राजनाथ सिंह के बाद सरकार में तीसरे सबसे ताकतवर मंत्री   माने जाते थे। गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (जीएसटी) लागू कराने का श्रेय उन्हीं को जाता है। जेटली पेशे से वकील थे, लेकिन कानून के साथ वित्तीय मामलों पर भी अच्छी पकड़ रखते  थे। उनके पास कुछ महीने वित्त के साथ रक्षा जैसे दो अहम मंत्रालय का प्रभार था। चार साल बाद जब राफेल का मुद्दा गरमाया, तब वे सरकार के लिए ट्रबलशूटर बनकर उभरे,  संसद में विपक्ष के खिलाफ मोर्चा संभाला। लंबे समय तक भाजपा के प्रवक्ता रहे।
टैक्स रिफॉर्म का सबसे बड़ा जिम्मा जेटली को मिला जब 1 जुलाई 2017 को केंद्र और राज्यों के 17 से ज्यादा इनडायरेक्ट टैक्स के बदले में जीएसटी लागू किया गया, तब जेटली ही  वित्त मंत्री थे। उस समय तक जीएसटी 150 देशों में लागू हो चुका था। भारत 2002 से इस पर विचार कर रहा था। 2011 में यूपीए सरकार के समय तत्कालीन वित्त मंत्री प्रणब   मुखर्जी ने भी इसे लागू कराने की कोशिश की थी, लेकिन यह एनडीए की सरकार बनने के तीन साल बाद 2017 में लागू हो सका।
जब राफेल पर सवाल उठे तो मोर्चा संभाला 2018 में जेटली ने किडनी ट्रांसप्लांट कराया। उस वक्त वित्त मंत्रालय का जिम्मा पीयूष गोयल को मिल गया। आलोचक सवाल उठाने लगे   कि देश में पूर्णकालिक वित्त मंत्री कौन है? कुछ महीने बाद जनवरी 2019 में जब राफेल लड़ाकू विमान के सौदे में भ्रष्टाचार के आरोप लगा रहे विपक्ष का विरोध मुखर होने लगा,  तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी या तत्कालीन रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण की जगह जेटली संसद में मोर्चे पर आ गए। उन्होंने लोकसभा में राफेल पर बहस के दौरान कहा कि कांग्रेस को  जहाज और लड़ाकू जहाज के बीच का मौलिक अंतर ही नहीं पता। हमारे समय जो पहला विमान हमें मिलेगा, उसकी कीमत यूपीए के समय तय किए गए बेसिक विमान से 9'  कम  होगी। वेपनाइज्ड विमान की कीमत 20' तक कम होगी। उन्होंने इस मुद्दे पर सवाल उठा रही कांग्रेस से नेशनल हेराल्ड, अगस्ता-वेस्टलैंड और बोफोर्स पर सवाल पूछ लिए। फरवरी में  ही अंतरिम बजट के बाद जेटली ने दोबारा वित्त मंत्रालय का प्रभार संभाल लिया।
यूपीए सरकार के वक्त मोदी-शाह का बचाव करने वालों में जेटली सबसे आगे रहे माना जाता है कि गुजरात के गोधराकांड और दंगों के बाद जेटली उन चुनिंदा नेताओं में शामिल थे,   जिन्होंने पार्टी के अंदर तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी का बचाव किया था। इसके बाद 2004 से 2014 के बीच यूपीए सरकार के वक्त वे सोहराबुद्दीन एनकाउंटर केस, तुलसी   प्रजापति एनकाउंटर केस, इशरत जहां एनकाउंटर केस में मोदी और शाह का बचाव करने वालों में सबसे आगे रहे।

Post a Comment

[blogger]

MKRdezign

Contact Form

Name

Email *

Message *

Powered by Blogger.
Javascript DisablePlease Enable Javascript To See All Widget