अपने हालात के लिए खुद ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री है जिम्मेदार : बजाज

Rajeev Bajaj
मुंबई
 पिछले कई महीनों से ऑटोमोबाइल सेक्टर संकट के दौर से गुजर रहा है। वित्त मंत्री ने इसके लिए लोगों के माइंडसेट को भी जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि लोग ईएमआई  भरने से ज्यादा ओला और ऊबर को पसंद करते हैं। अब बजाज ऑटो के एमडी राजीव बजाज ने कहा है कि ओवर प्रॉडक्शन और इकनॉमिक स्लोडाउन की वजह से ऑटो सेक्टर में सुस्ती आई है। उन्होंने कहा कि जीएसटी कट का इसपर कोई फर्क नहीं पड़ेगा। बता दें कि 20 सितंबर को जीएसटी काउंसिल की बैठक होने वाली है।
ऑटोमोबाइल सेक्टर की मांग के अनुसार इसमें जीएसटी कट का फैसला लिया जा सकता है। बजाज ने कहा कि इंडस्ट्री बीएस-6 मॉडल के अनुसार खुद को ढाल रही है और नवंबर  तक यह समस्या खत्म हो जाएगी। उन्होंने कहा कि कोई ऐसा उद्योग नहीं है जिसमें सुधार न किया जाए और हमेशा एक ही रफ्तार से बढ़ती रहे। गौरतलब है कि बजाज ऑटो देश  की तीसरी सबसे बड़ी मोटरसाइकल बनाने वाली कंपनी है। कंपनी अपने उत्पादन का आधा निर्यात करता है। बजाज ने कहा कि जुलाई और अगस्त में वाहनों की बिक्री में 30  प्रतिशत के लगभग कमी दर्ज की गई है। उनका कहना है कि इसमें से 5-7 फीसदी की गिरावट की वजह आर्थिक नीतियां हैं। बजाज ने कहा कि सभी उद्योगों का एक चक्र होता है  जिसमें विकास या गिरावट होती है।
यह कहा नहीं जा सकता है कि ऑटोमोबाइल सेक्टर के हालात सुधरने में कितना समय लगेगा लेकिन 1 या दो साल में स्थिति बेहतर हो जाएगी। उनके मुताबिक ऑटोमोबाइल सेक्टर  खुद भी इस स्थिति के लिए जिम्मेदार है क्योंकि जरूरत से ज्यादा उत्पादन किया गया। बजाज ने कहा कि इंडस्ट्री कई बार बिना सोचे समझे पासा फेकती है और फोरकास्ट पर  ध्यान दिए बिना प्रोडक्शन करती है। ऑटोमोबाइल सेक्टर की कई कंपनियों ने मांग की है कि जीएसटी को 28 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया जाए। लेकिन बजाज का  मानना है कि इस कदम से डीलरों का पैसा फंस जाएगा। उनका मानना है कि डीलर पहले से ही जीएसटी दे चुके हैं और जीएसटी कट के बाद ग्राहक सस्ती गाड़ियां खरीदना चाहेंगे  से में डीलरों को ही नुकसान उठाना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि जीएसटी कट केवल बीएस- 6 गाड़ियों तक ही सीमित रहना चाहिए। इससे नए नियमों के हिसाब से बनने वाली गाड़ियों की कीमत में भी थोड़ी कमी आएगी।

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